सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर सक्रिय भाजपा

सरकार जहां अपने पहले दिन से ही जनकल्याण के निर्णय लेने में लगी है, वहीं संगठन उपचुनाव में सफलता के साथ-साथ सदस्यता बढ़ाने की कवायदों में जुट गया है। ऐसे परिश्रम और सक्रियता को देखते हुए भाजपा का लगातर चुनावी सफलता अर्जित करना कोई आश्चर्य की बात नहीं लगता।

आम चुनाव के परिणामों ने जहां भाजपा को उत्साहित किया है, वहीं अधिकांक्ष पार्टियों को निराश  होना पड़ा है। ऐसे में सोचा जा रहा था कि भाजपा कुछ समय तक निश्चिंत भाव में रहेगी, क्योंकि केंद्र में पांच वर्षों तक उसका शासन सुनिश्चित हुआ है, जबकि खराब प्रदर्शन करने वाली पार्टियां आत्मचिंतन करेंगी। उनमें सुधार के प्रयास तेज होंगे। लेकिन हो रहा है इसके विपरीत।

केंद्र में सरकार बनाने के तत्काल बाद ही भाजपा सक्रिय हो गई। ऐसा लग रहा है जैसे उसने कई प्रदेशों में होने वाले चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश जैसे प्रदेश में अभी चुनाव नहीं होना है। लेकिन भाजपा ने इस सबसे बड़े प्रदेश पर भी फोकस किया है। सदस्यता अभियान के राष्ट्रीय संयोजक शिवराज सिंह चौहान की लखनऊ यात्रा इसी संदर्भ में थी।

पार्टी ने यहां सुनियोजित रूप में सदस्यता अभियान चलाने का रोडमैप तैयार किया है। उधर कुछ दिन पहले ही जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। क्योंकि अमित शाह गृहमंत्री बने हैं। उनकी सहायता के लिए नड्डा रहेंगे। अमित शाह और जेपी नड्डा की कार्यशीली लगभग एक जैसी है। संगठन का यह कदम दूरदर्शी है।

इसी प्रकार शिवराज सिंह चौहान को सदस्यता अभियान का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है। वह भी पूरी मुस्तैदी से सक्रिय हैं। यह कहा जा सकता है कि अमित शाह, जेपी नड्डा और शिवराज सिंह चौहान भाजपा को नई बुलंदी पर ले जाने की योजना पर कार्य कर रहे हैं।

इसी क्रम में शिवराज सिंह की लखनऊ यात्रा को बानगी के रूप में देखा जा सकता है। यहां वह सदस्यता अभियान की बैठक में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि  छह जुलाई से होने वाला सदस्यता अभियान सफल रहेगा। पार्टी की सदस्य संख्या में बड़ी वृद्धि होगी। कार्यालय में ही सदस्य बनाये जायेगें।  सदस्यता लेने वालों की सहायता हेतु कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा अनेक स्थानों पर कैम्प लगा कर भी सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। अभियान ग्यारह अगस्त तक चलेगा।

संगठन का उद्देश्य सर्वस्पर्शी और सर्वव्यापी है। पार्टी ने तय किया है कि कोई ऐसा बूथ नहीं होगा जहां भाजपा का सदस्य नहीं होगा। बड़ी जीत के बाद अभी कई राज्यों में भाजपा को मजबूत करना है। वहां सरकार बनानी है जहां अभी भाजपा सत्ता में नहीं है। बूथ को मजबूत बनाने पर भाजपा सदैव ध्यान देती है। इस बार भी ऐसा ही किया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान के जाने के बाद पुनः संगठन और सरकार के बीच बैठक हुई। जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य,अनेक मंत्रीगण और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए। इसमें सदस्यता अभियान के साथ साथ बारह क्षेत्रों में होने वाले उपचुनाव की रणनीति बनाई गई।

मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई। इस प्रकार अघोषित रूप से इन लोगों की जबाबदेही भी निर्धारित हो जाएगी। मंत्रियों और पदाधिकारियों को अभी से इन क्षेत्रों में सक्रियता दिखानी होगी। कार्यकर्ताओं और आमजन से संवाद स्थापित करना होगा। जहां जरूरत होगी वहाँ बूथ स्तर पर समितियों का पुनर्गठन किया जाएगा। पूर्णकालिक विस्तारकों की भी नियुक्ति की जाएगी। बैठक में उपचुनाव हेतु मंत्रियों और पदाधिकारियों  को प्रभारी भी बना दिया गया। डॉ दिनेश शर्मा, देवेंद्र चौधरी, रंजना उपाध्याय,श्रीकांत शर्मा,सुरेश राणा,महेंद्र सिंह,अशोक कटारिया, आशुतोष टण्डन, दारा सिंह चौहान, बृजेश पाठक, स्वतंत्र देव सिंह, उपेंद्र तिवारी आदि लोग विभिन्न उपचुनाव क्षेत्रों में प्रभारी का दायित्व निर्वाह करेंगे।

लखनऊ में ही एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रत्येक बूथ पर साठ प्रतिशत वोट हासिल करने हेतु काम करने का आह्वान किया। भाजपा से समाज के सभी वर्गों के लोग जुड़े हैं, ऐसे में यह लक्ष्य हासिल करने में खास कठिनाई नहीं होगी। केशव प्रसाद ने पार्टी के लोगों का उत्साह बढ़ाया। कहा कि सपा बसपा  मिलकर भाजपा का मुकाबला नहीं कर सके, अब तो दोनों अपनी असलियत पर आ गए हैं। बसपा लगातार सपा पर हमला बोल रही है। दोनों पार्टियों का जातिवादी और परिवारवादी रूप सबके सामने आ गया है। ये पार्टियां केवल अपने परिवार का भला कर सकती हैं।

कुल मिलाकर एक बात स्पष्ट है कि भाजपा के संगठन और सरकार दोनों ही पूरी मेहनत से सक्रिय हैं। सरकार जहां अपने पहले दिन से ही जनकल्याण के निर्णय लेने में लगी है, वहीं संगठन उपचुनाव में सफलता के साथ-साथ सदस्यता बढ़ाने की कवायदों में जुट गया है। ऐसे परिश्रम और सक्रियता को देखते हुए भाजपा को लगातर चुनावी सफलता मिलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है।

(लेखक हिन्दू पीजी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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