मोदी सरकार लाने जा रही कारोबारी सुगमता के लिए नयी नीति, बढ़ेगी विकास की रफ़्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि भारत आसानी से कारोबार करने वाले देशों की विश्व रैंकिंग में शीर्ष 50 में जल्द से जल्द शामिल हो। कारोबारी नियमों को सरल बनाने से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में भी और तेजी आने का अनुमान है और दूसरे देशों के साथ कारोबारी संबंध बनने से वैश्विक स्तर पर भी भारत की साख में इजाफा होगा।

रकार देश में कारोबार को आसान बनाने के लिये एक व्यापक नीति जल्द ही लाने वाली है, जिसके जरिये कारोबार करने के लिये लाइसेंस लेने की अनिवार्यता को समाप्त किया जायेगा साथ ही साथ कारोबार की राह में रुकावट बन रहे मौजूदा नियमों में भी बदलाव लाया जायेगा। माना जा रहा है कि भारत में लाइसेंस लेने की प्रथा की वजह से नये कारोबारी बाजार में नहीं आ रहे हैं और मौजूदा कारोबारी भी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि भारत आसानी से कारोबार करने वाले देशों की विश्व रैंकिंग में शीर्ष 50 में जल्द से जल्द शामिल हो। कारोबारी नियमों को सरल बनाने से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में भी और तेजी आने का अनुमान है और दूसरे देशों के साथ कारोबारी संबंध बनने से वैश्विक स्तर पर भी भारत की साख में इजाफा होगा। 

कारोबार को सरल बनाने वाली नीति को अमलीजामा पहनाने के लिये उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने कैबिनेट नोट का मसौदा विभिन्न मंत्रालयों को भेजा है, ताकि सभी विभागों को साथ में लेकर प्रस्तावित नीति को अमलीजामा जाये।    

प्रस्तावित नीति में लाइसेंस लेने की जरूरत को खत्म करने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित नीति के लागू होने के बाद कारोबारियों को कारोबार शुरू करने के लिये केवल पंजीकरण कराना होगा। जिन उद्योगों में लाइसेंस रखना जरूरी होगा, उनके लिये भी नवीनीकरण की प्रक्रिया समाप्त  की जायेगी। स्टार्टअप कंपनियों की विकास प्रक्रिया को तेज करने के लिये उनपर अनुपालन का बोझ हर महीने एक घंटे से ज्यादा नहीं होगा का भी प्रस्ताव प्रस्तावित नीति में है। इससे स्टार्टअप कंपनियों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।  

गौरतलब है कि विश्व बैंक हर साल विगत 15 सालों से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की सूची जारी करता है। विश्व की ताजा रिपोर्ट में सभी 190 देशों के कारोबार नियमन के 10 क्षेत्रों, जैसे, कारोबार शुरू करना, निर्माण की अनुमति हासिल करना, बिजली कनेक्‍शन देने की प्रक्रिया और उसमें लगनेवाला समय, संपत्ति का पंजीकरण, कर्ज मिलने में लगने वाला समय, अल्‍पसंख्‍यक निवेशकों की सुरक्षा, कर का भुगतान, दूसरे देशों के साथ व्‍यापार करने में सहजता का प्रतिशत, समझौते को लागू कराने और दिवालियापन का समाधान करने में तेजी आदि के आधार पर रैंकिंग का निर्धारण किया जाता है। 

भारत हाल ही में आसान कारोबार करने वाले देशों की विश्व रैंकिंग में 23 स्थानों की छलांग लगाते हुए 77वें स्थान पर पहुंचा है और अब वह शीर्ष 50 देशों में आने के लिए कोशिश कर रहा है। कारोबारी माहौल में सुधार को आंकने के लिए विश्व बैंक ने जो 10 मानदंड रखे हैं, उनमें से 6 मानदंडों में भारत ने सुधार किया है। इन मानदंडों में कारोबार शुरू करना, निर्माण परमिट, बिजली की सुविधा प्राप्त करना, कर्ज प्राप्त करना, करों का भुगतान, सीमा पार व्यापार, अनुबंधों को लागू करना और दिवाला प्रक्रिया से निपटना शामिल है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत नये कारोबार को शुरू करने में लगने वाला समय, खरीद-फरोख्त वाले उत्पादों के लिये वेयर हाउस बनाने में लगने वाला समय, उसकी लागत व प्रक्रिया, किसी कंपनी के लिये बिजली कनेक्शन में लगने वाला समय, व्यवसायिक संपत्तियों के निबंधन में लगने वाला समय, निवेशकों के पैसों की सुरक्षा गारंटी, कर संरचना का स्तर, कर के प्रकार व संख्या, कर जमा करने में लगने वाला समय, निर्यात में लगने वाला समय एवं उसके लिये आवश्यक दस्तावेज़, दो कंपनियों के बीच होने वाले अनुबंधों की प्रक्रिया और उसमें लगने वाले खर्च आदि को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत रैंकिंग तय करने में आधार बनाया जाता है।

कहा जा सकता है कि विश्व बैंक की यह रिपोर्ट कई मायनों में अहम है, क्योंकि इस रिपोर्ट से किसी भी देश के प्रति निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और वैश्विक स्तर पर उक्त देश की साख में भी इजाफा होता है। कहा जा रहा है कि प्रस्तावित नीति को मूर्त रूप देने के बाद भारत विश्व रैंकिंग में 50वीं रैंकिंग को हासिल कर सकता है। ऐसा होने से वैश्विक स्तर की नामचीन रेटिंग एजेंसियां भारत को वर्तमान के मुकाबले बेहतर रेटिंग दे सकती हैं, जिससे निवेशकों का भारत पर भरोसा बढ़ेगा और देश में कारोबारी माहौल और भी बेहतर होगा।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसंधान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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