तमाम कोशिशों के बावजूद क़ानून के चंगुल से नहीं छूट सके चिदंबरम, भेजे गए तिहाड़

आईएनएक्‍स मीडिया केस में सीबीआई द्वारा आरोपी बनाकर हिरासत में लिए गए चिदंबरम को अदालत ने 19 सितंबर तक की अवधि के लिए दिल्‍ली की तिहाड़ जेल भेज दिया है। उनके साथ यहां पर किसी आम कैदी की तरह ही सुलूक किया जाएगा। वैसे तो उन्‍हें कोई विशेष सुविधाएं नहीं दी जाएंगी, ना ही कोई वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जाएगा, लेकिन जेल मैन्‍युअल के हिसाब से उनकी आयु को देखते हुए उन्‍हें सामान्‍य कैदियों से कुछ अलग रियायत अवश्‍य मिल जाएगी।

आखिरकार पी. चिदंबरम जेल की सींखचों के पीछे पहुँच ही गए। गुरुवार शाम को चिदंबरम को 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया। चिदंबरम वित्‍त मंत्री के साथ ही देश के गृहमंत्री भी रहे हैं। गृहमंत्री होने के नाते वे देश की केन्द्रीय जेल व्‍यवस्‍था के एक तरह से मुखिया रह चुके हैं और अब इस शक्तिशाली ओहदे से इतर वे इन्‍हीं जेलों में एक कैदी के तौर पर रहेंगे। जब वे गृहमंत्री थे तब उन्‍होंने तो निश्चित ही ऐसा कुछ कभी नहीं सोचा होगा, लेकिन पुरानी कहावत है कि सच कल्‍पना से भी विचित्र होता है। 

आईएनएक्‍स मीडिया केस में सीबीआई द्वारा आरोपी बनाकर हिरासत में लिए गए चिदंबरम को अदालत ने 19 सितंबर तक की अवधि के लिए दिल्‍ली की तिहाड़ जेल भेज दिया है। उनके साथ यहां पर किसी आम कैदी की तरह ही सुलूक किया जाएगा। वैसे तो उन्‍हें कोई विशेष सुविधाएं नहीं दी जाएंगी, ना ही कोई वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जाएगा, लेकिन जेल मैन्‍युअल के हिसाब से उनकी आयु को देखते हुए उन्‍हें सामान्‍य कैदियों से कुछ अलग रियायत अवश्‍य मिल जाएगी।

सांकेतिक चित्र (साभार: Dailyhunt)

उनकी आयु 60 साल से अधिक है, इस नाते उन्‍हें जमीन पर ना सोने की बजाय लकड़ी के तख्‍त पर सोने की सुविधा मिलेगी। हालांकि चिदंबरम के लिए तो लकड़ी का यह तख्‍त भी कांटों भरी सेज की तरह ही प्रतीत हो रहा होगा। उन्‍हें अलसुबह 6 से 7 बजे के बीच उठकर दिनचर्या का आरंभ करना होगा। आम कैदियों की तरह ही उन्‍हें चाय, नाश्‍ता एवं भोजन दिया जाएगा। यह सब तब है जब वे अभी केवल न्‍यायिक हिरासत में हैं, उन्‍हें कैद घोषित नहीं हुई है। 

असल में, कारागार बनाए ही इसलिए गए थे कि यहां का असुविधानजक और कठोर जीवन जीने से कैदी को अपने किए का पश्‍चाताप हो और उसे हर पल इस बात का आभास भी हो कि उसने भी किसी का सुख-चैन छीना है। करोड़ों की अनियमितता जिसका चिदंबरम पर आरोप है, करते समय जब उनके हाथ नहीं कांपे, ना अंतरात्‍मा में कंपन हुआ, तब भी वह निर्णायक घड़ी थी। तब वे संभल जाते तो शायद आज यह दुर्दिन नहीं देखना पड़ता। 

कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनके वकील कपिल सिब्‍बल ने उन्‍हें जेल जाने से बचाने के लिए भरसक प्रयास किए लेकिन न्याय-व्यवस्था में देर होती है अंधेर नहीं, न्याय होकर ही रहता है। सिब्‍बल का चिदंबरम को ईडी के सामने सरेंडर करवाए जाने का दांव विफल हो गया और जेड श्रेणी की सुरक्षा दिलवाने की भी जुगत एक ना चली। आखिर चिदंबरम को जेल भेजे जाने का आदेश हुआ। 

तिहाड़ में उन्‍हें जिस 7 नंबर की जेल में रखे जाने का आदेश हुआ है, वहां उनके पुत्र कार्ति को भी रखा गया था। असल में, यहां आर्थिक अनियमितताओं के आरोपियों को रखा जाता है। चिदंबरम की पत्‍नी नलिनी का नाम भी सारधा घोटाले में सामने आ चुका है। सारधा चिटफंड घोटाले में बहुत से निर्धन और लाचार लोगों की मेहनत का पैसा फंसा हुआ था जिसे हजम कर लिया गया। कहा जाता है कि अपराध करते समय एक बार अपराधी की अंतरात्‍मा उसे पुकारती है और ऐसा करने से रोकती है लेकिन उस समय जिसने अंतरात्‍मा की आवाज को अनसुना कर दिया, उससे संवेदनशीलता  की उम्‍मीद करना बेमानी है। चिदंबरम परिवार के साथ यही बात लागू होती है। 

पद का घमंड और सत्‍ता पक्ष में शक्तिशाली ओहदों पर रहने से उपजा अहंकार जो न करवाए वो कम। इसके बाद शुरू हुआ चिदंबरम का कानून को चकमा देने का सिलसिला जो कि नाटकीय रूप से समाप्‍त हुआ। किसी शातिर अपराधी की तरह घंटों गायब रहने के बाद वे अचानक कांग्रेस मुख्‍यालय में प्रकट हुए और बेसिर पैर की सफाई देने लगे। लेकिन कानून से खिलवाड़ का अंजाम आखिर सामने आ ही गया। गत 21 अगस्‍त की रात सीबीआई ने मशक्‍कत के बाद उन्‍हें हिरासत में ले लिया था। इसके बाद से वे 15 दिनों की रिमांड पर थे और अब उन्‍हें न्‍यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वे 19 सितंबर तक जेल में रहेंगे, इतना तो तय है। 

आलीशान जीवन जीने के बाद कैदियों जैसा जीवन जीने का प्रसंग निश्चित ही किसी परी कथा से कम नहीं लगता। यदि कर सकें तो ये 15 दिन चिदंबरम के लिए आत्मावलोकन के हो सकते हैं। भ्रष्‍टाचार में आकंठ डूबकर वे सींखचों के पीछे तो आ ही चुके हैं, अब उनके पास कौन सी गरिमा शेष है, जिसे बचाने के लिए वे जांच एजेंसियों को सहयोग करने से बच रहे थे। कहीं ऐसा तो नहीं कि चिदंबरम भी सिर्फ एक मोहरा ही हों और पर्दे के पीछे और भी बड़े नाम छिपे हों। जो भी हो, सच अब अधिक समय तक छिप नहीं सकता।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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