अनुच्छेद-370 हटने से सिर्फ पाकिस्तान में ही मातम नहीं है, भारत में भी ‘कुछ लोग’ सदमे में हैं

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने का मकसद यही था कि दशकों से वहां चल रहे खून खराबे को ख़त्म कर शांति की स्थापना की जाए।  कश्मीर के लोग भी धीरे-धीरे नयी व्यवस्था को अपनाने लगे हैं और शांतिपूर्ण ढंग से राज्य की गतिविधियाँ चल रही हैं। अतः मोदी या भाजपा के विरोध मात्र के लिए कश्मीर को लेकर गलत जानकारियां फैलाना और सरकार का विरोध करना अनुचित और अस्वीकार्य है। ऐसा करने वालों को समझना चाहिए कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर और अनुच्छेद-370 पर उनके बयानों का अपने हक़ में इस्तेमाल कर रहा है। मोदी विरोध में वे पाकिस्तान की मदद कर रहे हैं।

इन दिनों कश्मीर को लेकर एक छद्म युद्ध चल रहा है, एक सरहद पार पकिस्तान में और दूसरा भारतीय सीमा के अन्दर भी। दोनों से भारत को सचेत रहने की जरूरत है। पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 ख़त्म होने के बाद पकिस्तान में तो मातम है ही, साथ ही बहुत से ऐसे लोग भारतीय जमीन पर भी हैं जो सदमे में हैं और बेमतलब का चाय के प्याले में तूफ़ान खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। 

कश्मीर में अनुच्छेद 370 को ख़त्म किये हुए एक महीने से ज्यादा समय हो गया है, इसके बाद पाकिस्तान सहित चीन के लिए तो यह झटके जैसा ही है कि वहां अब तक बगावत क्यों न हुई, सड़कों पर पत्थरबाज़ी और आगजनी के दृश्य क्यों नहीं दिखाई दिए, लेकिन साथ ही भारत के अन्दर भी कई लोगों को कश्मीर की यह शांति हजम नहीं हो रही है। उनकी बेचैनी साफ़ देखी जा सकती है।    

यह सच है कि इस वक़्त एलओसी पर तनाव है, भारतीय सेना हर हमले का माकूल जवाब दे रही है। भारत को अपनी सीमा सुरक्षित रखने का अधिकार है। भारतीय सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने कहा है कि सेना हर वक़्त प्रतिकार की तैयारी में रहती है।अमेरिका में पिछले जुलाई को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख जेनरल कमर जावेद बाजवा को साफ़ कह दिया गया था कि सीमा पार से आतंकी भेजना बंद करें। 

पाकिस्तान पर इस समय एफएटीएफ की सख्त नज़र है और वह ग्रे लिस्ट से ब्लैक  लिस्ट में जाने का खतरा मोल नहीं लेगा। इसलिए पूरी दुनिया को दिखाने के लिए उसने जमात- उद-दावा पर  बंदिशें लगा दीं, खुद जमात के मुखिया हाफिज सईद को जेल भेजा लेकिन सच तो ये है कि यह सब पाकिस्तान का ढकोसला है। भारत यह बात समझता है और लगातार वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को बेनकाब कर रहा है।

पाकिस्तान ने अस्तित्व में आने के बाद आतंकियों को पालने-पोसने में अरबों डॉलर खर्च किये, इस बात की पुष्टि पिछले दिनों खुद इमरान खान ने किया जब उन्होंने यह माना कि पाकिस्तान की सीमा के अन्दर कम से 40,000 आतंकी कश्मीर और अफ़ग़ानिस्तान में लड़ने के लिए तैयार बैठे हैं।

खबर यह है कि यूनाइटेड नेशन में साधारण सभा की बैठक से पहले जमात-उद-दावा और लश्कर के आतंकी बड़ी घटनाओं को अंजाम देने के फिराक में हैं। भारतीय सेना को इस बात की खबर है कि पाकिस्तान ने एक बार फिर से सीमा पार में अपने आतंकी ट्रेनिंग कैंप खोल दिए हैं लेकिन उनके हर हमले का जवाब देने में भारत सक्षम भी है। ऐसे में देश के भीतर बैठे कश्मीर में उत्पात की उम्मीद कर रहे लोगों को अपनी राजनीति छोड़ देश और सरकार के साथ होना चाहिए।  

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने का मकसद यही था कि दशकों से वहां चल रहे खून खराबे को ख़त्म कर शांति की स्थापना की जाए।  कश्मीर के लोग भी धीरे-धीरे नयी व्यवस्था को अपनाने लगे हैं और शांतिपूर्ण ढंग से राज्य की गतिविधियाँ चल रही हैं। अतः मोदी या भाजपा के विरोध मात्र के लिए कश्मीर को लेकर गलत जानकारियां फैलाना और सरकार का विरोध करना अनुचित और अस्वीकार्य है। ऐसा करने वालों को देखना चाहिए कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर और अनुच्छेद-370 पर उनक्व बयानों का अपने हक़ में इस्तेमाल कर रहा है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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