फिर एकबार कारोबारी सुगमता रैंकिंग में भारत की ऊंची छलांग!

विश्व बैंक के अनुसार आईबीसी की वजह से डूबे कर्ज की वसूली में तेजी आई है। वसूली दर प्रति डॉलर 27 से बढ़कर 72 सेंट पहुंच गई है। कारोबारी इकाई के निर्माण की अनुमति देने के मामले में भी भारत 27वें स्थान पर आ गया है। सरकार ने पिछले 12 महीनों में 35 से भी ज्यादा सुधार किये हैं। इन सुधारों से कारोबार शुरू करने में लगने वाले समय, लागत, प्रक्रिया व दस्तावेजीकरण में कमी आई है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया आसान होने,छोटे कारोबारियों के लिये इनकॉर्पोरेशन शुल्क माफ करने,सीमा शुल्क संबंधी मंजूरी में लगने वाले समय में कमी लाने आदि में भारत सफल रहा है।

विश्व बैंक हर साल “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” या कारोबारी सुगमता के संबंध में वैश्विक रैकिंग जारी करता है। “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस 2020”की रैकिंग में भारत 190 देशों की सूची में 14 स्थानों की छलांग लगाते हुए 77वें स्थान से 63वें स्थान पर पहुँच गया है। इतना ही नहीं भारत को देश में कारोबार का माहौल बेहतर करने के लिये सर्वश्रेष्ठ देश के रूप में चुना गया है।

विश्व बैंक ने भारत को उन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया है, जिन्होंने लगातार तीसरे साल अपनी रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार किया है। कारोबारी सुगमता के मामले में दो साल पहले भारत 30 स्थानों की ऊँची छलांग लगाते हुए 130वें स्थान से 100वें स्थान पर पहुँचा था। 

मोदी राज में भारत की कारोबारी सुगमता रैंकिंग में निरंतर सुधार (साभार : News on Air)

कारोबारी सुगमता रैकिंग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बड़े आकार को देखते हुए कारोबारी सुगमता रैकिंग में सुधार लाने के लिये भारत के प्रयासों की सराहना करनी चाहिये। विश्व बैंक इस रैंकिंग के लिये दस मानदंडों, जैसे, कारोबार शुरू करना, निर्माण की अनुमति हासिल करना, बिजली कनेक्‍शन देने की प्रक्रिया और उसमें लगनेवाला समय, संपत्ति का पंजीकरण, कर्ज मिलने में लगने वाला समय,अल्‍पसंख्‍यक निवेशकों की सुरक्षा, कर का भुगतान, दूसरे देशों के साथ व्‍यापार करने में सहजता का प्रतिशत, समझौते को लागू कराने और दिवालियापन का समाधान करने में तेजी आदि का इस्तेमाल करता है।

इस साल भारत ने कारोबार शुरू करने, निर्माण परमिट, बिजली की सुविधा प्राप्त करने,करों का भुगतान, सीमापार व्यापार, अनुबंधों को लागू करने,कर्ज प्राप्त करने आदि में उल्लेखनीय सुधार किया है। पिछले साल भारत ने छह उप श्रेणियों में अपने प्रदर्शन में सुधार किया था। भारत ने दिवालिया समाधान के मामले में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। इस मामले में भारत 56वें स्थान से 52वें स्थान पर आ गया है, जिसका कारण ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) को कुशल और सफल तरीके से लागू करना है।

विश्व बैंक के अनुसार आईबीसी की वजह से डूबे कर्ज की वसूली में तेजी आई है। वसूली दर प्रति डॉलर 27 से बढ़कर 72 सेंट पहुंच गई है। कारोबारी इकाई के निर्माण की अनुमति देने के मामले में भी भारत 27वें स्थान पर आ गया है। सरकार ने पिछले 12 महीनों में 35 से भी ज्यादा सुधार किये हैं। इन सुधारों से कारोबार शुरू करने में लगने वाले समय, लागत, प्रक्रिया व दस्तावेजीकरण में कमी आई है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया आसान होने,छोटे कारोबारियों के लिये इनकॉर्पोरेशन शुल्क माफ करने,सीमा शुल्क संबंधी मंजूरी में लगने वाले समय में कमी लाने आदि में भारत सफल रहा है।

सीमा पार कारोबार करने के मामले में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने आईसीईडीएएसएच लागू किया है, जिसके माध्यम से हर बंदरगाह पर डैशबोर्ड की मदद से प्रति दिन की मंजूरियों की निगरानी रियल टाइम आधार पर की जाती है। प्रेषित माल को मंजूरी में लगने वाले समय के अनुसार लाल, अंबर और हरे में इसका वर्गीकरण किया जाता है, जिससे सीमा अधिकारियों को प्रेषित मालों को चिह्नित करने में सहूलियत होती है।

सीमा शुल्क विभाग ने जेएनपीटी पर चौबीस घंटे सेवा देने की सुविधा की शुरुआत की है, जो प्रेषित माल को मंजूरी देने के मामले में एकल खिड़की की तरह काम करता है। हाल ही में शुरू की गई स्कैनर सेवा के मुताबिक प्रति घंटे 100 कंटेनरों की स्कैनिंग की जा सकती है, जबकि मोबाइल स्कैनर के माध्यम से प्रति घंटे 8 से 10 कंटेनर की जांच की जा सकती थी। इन उपायों के माध्यम से मंजूरी मिलने के समय को कम करने की कोशिश की जा रही है। 

सांकेतिक चित्र

जीएसटी के तहत कर भुगतान करना पहले से आसान हुआ है। अब जीएसटी कर भुगतान करने वालों को 3 की जगह 2 कर रिटर्न दाखिल करना पड़ता है। कारोबार की शुरुआत करने के मामले में कंपनी मामलों के मंत्रालय ने 15 लाख रुपये तक की अधिकृत पूंजी वाली कंपनियों के लिए इनकॉर्पोरेशन शुल्क समाप्त कर दिया है। राजस्व विभाग ने जीएसटी पंजीकरण के लिए बैंक खाते का ब्योरा देने की जरूरत खत्म कर दी है, जिसकी वजह से इस सूचकांक के तहत दो प्रक्रियाएं खत्म हो गईं हैं।

निर्माण को अनुमति देने में सुधार की वजह से दिल्ली और मुंबई में गोदाम में सामान रखने की लागत घटी है। दिल्ली में गोदाम के इस्तेमाल के लिए भवन के इस्तेमाल पर लगने वाले परमिट शुल्क को 10 रुपये प्रति वर्गमीटर से घटाकर 2 रुपये प्रति वर्गमीटर किया गया है। सरकार ने 13 सुधार और भी किये हैं, जिन्हें पिछले वर्ष विश्व बैंक ने संज्ञान में नहीं लिया था। इस साल इसका सकारात्मक प्रभाव साफ तौर पर दिख रहा है। 

कारोबारी सुगमता के तहत नये कारोबार को शुरू करने में लगने वाला समय, खरीद-फरोख्त वाले उत्पादों के लिये वेयरहाउस बनाने में लगने वाला समय, उसकी लागत व प्रक्रिया, किसी कंपनी के लिये बिजली कनेक्शन में लगने वाला समय, व्यवसायिक संपत्तियों के निबंधन में लगने वाला समय, निवेशकों के पैसों की सुरक्षा गारंटी, कर संरचना का स्तर, कर के प्रकार व संख्या, कर जमा करने में लगने वाला समय, निर्यात में लगने वाला समय एवं उसके लिये आवश्यक दस्तावेज़,दो कंपनियों के बीच होने वाले अनुबंधों की प्रक्रिया और उसमें लगने वाले खर्च आदि को रैंकिंग निर्धारित करने में आधार बनाया जाता है।

विश्व बैंक की यह रिपोर्ट कई मायनों में अहम है, क्योंकि इस रिपोर्ट से किसी भी देश के प्रति निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और वैश्विक स्तर पर उक्त देश की साख में भी इजाफा होता है। इस साल भारत ने 35 से भी ज्यादा सुधार किये हैं, जिसमें सबसे अहम जीएसटी की प्रक्रिया को सरल बनाना और आईबीसी के तहत वसूली दर में तेजी लाना है।

इसके अतिरिक्त, भारत ने इस साल ऐसे अन्य 13 सुधारों को भी अंतिम रूप दिया है, जिसे पिछले साल विश्व बैंक ने रैंकिंग बनाते समय संज्ञान में नहीं लिया था। इन ताजा सुधारों को अमलीजामा पहनाने की वजह से ही भारत विश्व बैंक की कारोबार सुगमता की ताजा रैंकिंग में 63 वां स्थान हासिल करने में सफल रहा है।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसंधान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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