‘क्या औरंगजेब और कुतुबुद्दीन ऐबक को अपना आदर्श मानकर चल रहे हैं इमरान खान?’

कॉरिडोर से होकर गुरुद्वारा दर्शन करने के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं से पाकिस्तान सरकार 20 डॉलर क्यों वसूल रही है? भारत के कई हलकों में इसे जज़िया टैक्स के तौर पर देखा जा रहा है। मुग़ल शासक औरंगजेब के समय में भारत में हिन्दू तीर्थयात्रियों के ऊपर जजिया कर लगाया जाता था, वहीं मुसलमानों पर ऐसे कर नहीं लगाये जा रहे थे। यह कर इस एवज में वसूला जाता था ताकि हिन्दू धर्म का पालन करने वाले अपने धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा कर सकें। औरंगजेब से पहले भी कुतुबुद्दीन ऐबक ने हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया था। सवाल है कि मौजूदा दौर में इमरान खान क्या औरंगजेब और कुतुबदीन ऐबक को ही अपना आदर्श मानकर चल रहे हैं।

आने वाले 9 नवम्बर को करतारपुर कॉरिडोर का द्वार सिख श्रद्धालुओं के लिए खोला जा रहा है। आज़ादी के बाद से पहली बार सिख अपने गुरु नानक के उस स्थान का दर्शन दीदार कर सकेंगे, जहाँ सिखों के दसवें गुरु ने अपने आखिरी पंद्रह वर्ष बिताये थे। इसके ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व को लेकर कोई संशय कतई नहीं है।

भारत सरकार पिछले कई दशकों से इसके निर्माण लिए प्रयासरत थी। इस ऐतिहासिक दिन को हिस्सा बनने के लिए भारत सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री डेरा बाबा नानक जाकर भारतीय हिस्से वाले कॉरिडोर की शुरुआत करेंगे। इसका महत्त्व इसलिए भी काफी ज्यादा है, क्योंकि बाबा नानक सिर्फ़ सिखों के बीच नहीं बल्कि लाखों हिन्दुओं के बीच भी उतने ही आदर और सत्कार से देखे जाते थे।

आज़ादी से पहले यह हिस्सा पूरी तरह से भारत का हुआ करता था, लेकिन बंटवारे के बाद न सिर्फ़ करतारपुर का गुरुद्वारा पाकिस्तान के हिस्से में चला गया अपितु गुरु नानकदेव जी का जन्मस्थान ननकाना साहब भी पाकिस्तान के पास चला गया। पंजाब में रहने वालों सिखों को यह मलाल था कि काश खुले आँखों से गुरु की धरती का दर्शन दीदार हो सके। आज लाखों लोगों को यह मौका मिल रहा है।

इसका कदम का स्वागत हर तरफ होना चाहिए लेकिन इस कॉरिडोर को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं, जिसकी चर्चा भी बहुत ज़रूरी है। मसलन, कॉरिडोर से होकर गुरुद्वारा दर्शन करने के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं से पाकिस्तान सरकार 20 डॉलर क्यों वसूल रही है? भारत के कई हलकों में इसे जज़िया टैक्स के तौर पर देखा जा रहा है। मुग़ल शासक औरंगजेब के समय में भारत में हिन्दू तीर्थयात्रियों के ऊपर जजिया कर लगाया जाता था, वहीं मुसलमानों पर ऐसे कर नहीं लगाये जा रहे थे। 

यह कर इस एवज में वसूला जाता था ताकि हिन्दू धर्म का पालन करने वाले अपने धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा कर सकें। औरंगजेब से पहले भी कुतुबुद्दीन ऐबक ने हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया था। मौजूदा दौर में इमरान खान क्या औरंगजेब और कुतुबुद्दीन ऐबक को ही अपना आदर्श मानकर चल रहे हैं।

खैर पाकिस्तान इन दिनों भयंकर आर्थिक संकट से गुजर रहा है, सो इस कॉरिडोर के ज़रिये ही पाकिस्तान की हजारों करोड़ कमाने की मंशा भी है। वैसे भारत में भी इस्लाम से जुड़े हुए बड़े-बड़े मस्जिद हैं जहाँ नमाज़ पढ़ने के लिए और दर्शन के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं, भारत के किसी भी सरकार ने इनसे कोई जजिया टैक्स नहीं वसूला। मगर पाकिस्तान का इसमें भी टैक्स वसूलना उसकी संकीर्ण सोच का ही सूचक है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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