भ्रष्टाचार रोकने में सफल साबित हो रही मोदी सरकार

ग्लोबल वाचडॉग ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के वार्षिक सूचकांक के अनुसार भारत 41 अंकों के साथ 78वें नंबर पर है। भारत ने तीन अंकों का सुधार किया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के जबर्दस्त भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के बावजूद चीन भ्रष्टाचार की रैंकिंग में ऊपर है। भारत ने भ्रष्टाचार की रोकथाम के मामले में पड़ोसी देशों से बेहतर प्रदर्शन किया है।

मोदी सरकार की भ्रष्टाचार रोकने की मुहिम सफल होती दिख रही है, इस बात का खुलासा हाल में आई कुछ रिपोर्टों से हुआ है। वित्त वर्ष 2019 में देश के 20 राज्यों में भ्रष्टाचार 10 प्रतिशत कम हुआ है। इंडिया भ्रष्टाचार सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी कामकाज में रिश्वतखोरी पर पिछले कुछ वर्षों में थोड़ी लगाम लगी है।

भ्रष्टाचार सर्वे में 248 जिलों के 1,90,000 लोगों से भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से संबंधित सवाल पूछे गये थे। इस सर्वे में शामिल 51 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने पिछले 12 महीने में एक बार रिश्वत दी है। यह सर्वे ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया ने किया था, जो एक गैर राजनीतिक, स्वतंत्र और गैर सरकारी भ्रष्टाचाररोधी संगठन है। 

ग्लोबल वाचडॉग ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के वार्षिक सूचकांक के अनुसार भारत 41 अंकों के साथ 78वें नंबर पर है। भारत ने मामले में तीन अंकों का सुधार किया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के जबर्दस्त भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के बावजूद चीन भ्रष्टाचार की रैंकिंग में ऊपर है। जानकारों के मुताबिक भारत ने भ्रष्टाचार की रोकथाम के मामले में पड़ोसी देशों से बेहतर प्रदर्शन किया है। 

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने वर्ष 2018 की भ्रष्टाचार सूचकांक रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के मामले में भारत की स्थिति अर्जेंटीना, आइवरी कोस्ट और गुयाना जैसे देशों की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। पिछले साल भारत इस रिपोर्ट में 40 अंकों के साथ 81वें स्थान पर था। दुनिया भर के 180 देशों की सूची में भारत 3 स्थानों के सुधार के साथ 78वें पायदान पर पहुंच गया है। भ्रष्टाचार सूचकांक में चीन 87वें और पाकिस्तान 117वें स्थान पर है। 

विगत 10 वर्षों में यह पहला मौका है, जब भारत इस स्थान पर पहुंचा है। वर्ष 2008 के बाद से भ्रष्टाचार के मामले में भारत का प्रदर्शन धीरे-धीरे सुधरता रहा है। चीन भ्रष्टाचार सूचकांक में वर्ष 2017 में भारत से ऊपर था, लेकिन वर्ष 2018 में यह फिसलकर 87वें स्थान पर पहुंच गया है। जिन देशों को सबसे कम भ्रष्ट माना जाता है, उनके अंक भी इस रिपोर्ट में गिरावट दर्ज की गई है।  

संयुक्त राष्ट्र की चिंता 

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतेरेस ने अपने बयान में कहा कि भष्ट्राचार के कारण वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को हर साल 2600 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है, जो कुल जीडीपी का पांच प्रतिशत है। गुतेरेस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से धनशोधन या मनी लॉन्ड्रिंग, कर चोरी एवं अवैध पूंजी प्रवाह से बचने और उसके खिलाफ लड़ने के लिये आग्रह किया है।

गुतेरेस ने कहा कि कंपनी और व्यक्ति मिलकर हर साल 1000 अरब से ज्यादा रिश्वत दे रहे हैं। गुतेरेस के मुताबिक भ्रष्टाचार कम या ज्यादा सभी देशों में मौजूद है। हालाँकि, लोग देश के भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ समय-समय पर आक्रोश व्यक्त करते हैं, लेकिन समाज में भ्रष्टाचार इस कदर पेवस्त है कि इसका इलाज नहीं हो पा रहा है। 

केंद्रीय सतर्कता आयोग के आंकड़े 

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा वर्ष 2008 से वर्ष 2016 तक किये गये कार्यों की कुल संख्या से पता चलता है कि पिछले दो सालों में सीवीसी द्वारा की गई आंतरिक स्तर पर प्राप्त  शिकायतों की संख्या में काफी वृद्धि हुई, लेकिन गंभीर प्रकृति के शिकायतों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है।

वर्ष 2016 में कुल शिकायतों में से बाहरी शिकायत केवल 0.17% ही प्राप्त हुए थे, जो इस बात का संकेत है कि पहले की तुलना में प्रशासन ज्यादा साफ-सुथरे हुए हैं। इसी वजह से बाहर से प्राप्त होने वाली शिकायतों में कमी आ रही है। ई-निविदा, ई-खरीद, रिवर्स नीलामी आदि नवीन प्रौद्योगिकी के जरिये होने से शासन एवं उसके कार्यविधियों में पारदर्शिता आई है। 

भ्रष्टाचार की धारणा सूचकांक

पारदर्शिता इंटरनेशनल द्वारा प्रकाशित भ्रष्टाचार की धारणा सूचकांक  में वर्ष 2011 से वर्ष 2016 के दौरान भारत, ब्रिटेन, पुर्तगाल एवं इटली जैसे देश समग्र रूप से श्रेणी उन्नयन करने में सफल रहे हैं। भारत वर्ष 2011 के 95 वें श्रेणी में सुधार करते हुए वर्ष 2016 में 79 वें स्थान पर आ गया, जबकि सिंगापुर, हांगकांग, मॉरीशस, तुर्की और दक्षिण कोरिया जैसे देश भ्रष्टाचार के स्तर को कम करने में सफल नहीं रहे और उनकी समग्र श्रेणी और विकास दर दोनों में गिरावट दर्ज की गई।

निष्कर्ष

भ्रष्टाचार विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। बढ़ते वैश्वीकरण, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, वित्तीय लेनदेन के दौर में भ्रष्टाचार की गूँज साफ तौर पर सुनाई देती है। आज कोई भी ऐसा देश नहीं है, जो अपने यहाँ इसकी उपस्थिति से मना कर सके। देखा जाये तो लेनदेन की लागत में इजाफा, निवेश में कमी या बढ़ोतरी या संसाधनों के दुरुपयोग में भ्रष्टाचार की सक्रियता बढ़ जाती है।

भ्रष्टाचार का प्रतिकूल प्रभाव निर्णय लेने की क्षमता और प्राथमिकताओं के चयन पर भी पड़ता है। ऐसे में यदि भारत में भ्रष्टाचार में कमी आ रही तो यह संतोष की बात है, लेकिन अभी सरकार को इस दिशा में और बहुत काम करने की जरूरत है जिससे इस व्याधि का समूल अंत किया जा सके।

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