दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य की नहीं, केवल विज्ञापन की क्रांति हुई है – कपिल मिश्रा

दिल्ली में कोरोना संक्रमण की तेज रफ़्तार ने केजरीवाल सरकार के सभी दावों की हवा निकाल दी है। बिगड़ते हालातों के मद्देनजर पिछले दिनों प्रदेश की कमान गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हाथों में ले ली जिसके बाद से हालात में धीरे-धीरे सुधार आ रहा है। दिल्ली की इस वर्तमान स्थिति पर नेशनलिस्ट ऑनलाइन के लिए आदर्श तिवारी द्वारा युवा भाजपा नेता कपिल मिश्रा से बातचीत की गयी जिसमें कपिल मिश्रा ने न केवल केजरीवाल सरकार की नाकामियों को तथ्यात्मक रूप से उजागर किया बल्कि अमित शाह के मॉडल को  दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण भी बताया। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश :

दिल्ली में कोरोना वायरस को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नीतिगत दुर्व्यवस्थाओं को लेकर पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए कपिल मिश्रा ने बताया कि पूरी दिल्ली में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। दिल्ली में कोरोना से लड़ने के लिए केजरीवाल सरकार की कोई भी ठोस रणनीति नहीं रही है। दुनिया के 107 देशों से ज्यादा केस अकेले दिल्ली में हैं। स्थिति और भी भयावह होती, लेकिन जब से गृहमंत्री अमित शाह ने व्यवस्था को अपने हाथ में लेना शुरू किया है, स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है और दिल्ली में विश्वास जगा है।

कपिल मिश्रा ने कहा कि जब दिल्ली से गरीब मजदूरों को बस से आनंद विहार भेजा गया, तो राशन की समस्या हुई। अस्पतालों का हाल किसी से छिपा नहीं था। दरअसल दिल्ली की केजरीवाल सरकार के पास न तो कोई रणनीति थी और न नीयत ही थी। केजरीवाल सिर्फ विज्ञापन और मीडिया मैनेजमेंट कर रहे थे।

गौरतलब है कि दिल्ली में मौत के आंकड़ों में हेरफेर को लेकर केजरीवाल सरकार सवालों के घेरे में है। ऐसा लगता है कि जैसे सरकार आंकड़े छुपा रही हो। इस विषय में कपिल मिश्रा का कहना है कि एमसीडी और दिल्ली सरकार के आंकड़े अलग-अलग आ रहे हैं। हम लोगों ने एक मई से यह बोलना शुरू किया कि दिल्ली में कोरोना के आंकड़ों को लेकर झूठ बोला जा रहा है। श्मशान घाट के आंकड़े और अस्पतालों के आंकड़े केजरीवाल सरकार के दिए हुए आंकड़ों से ज्यादा हैं। हमसे खुद एम्स के डायरेक्टर ने कहा कि मौतें ज्यादा हो रही हैं।

एलएनजेपी के हेड का यह बयान है कि सरकार आंकड़ों को छिपा रही है। एलएनजेपी हॉस्पिटल के सामने से कोरोना से मृत व्यक्ति के परिजन उसे हाथ से खीचने वाले ठेले पर लेकर जा रहे थे। हमने श्मशान घाट के वीडियो देखे, जिसमें बताया गया कि चार-चार दिन की वेटिंग लिस्ट है। कब्रिस्तान की पूरी जमीन भर गई और 10 एकड़ की जमीन भी मांगी गई।

कपिल का कहना है कि जिस दिन केजरीवाल सरकार ने एक दिन में 480 मौतें दिखाईं, उनमें से सिर्फ 90 मौतें उस एक दिन की थीं, बाकी 350 से ज्यादा मौतें वही थीं, जिन्हें केजरीवाल सरकार ने छिपा लिया था। आप सोच सकते हैं कि केजरीवाल ने कितना बड़ा झूठ बोला। केजरीवाल सरकार ने एक दिन में 25 करोड़ का विज्ञापन दिया था। अगर उन पैसों से लोगों को मास्क दिया जाता, दवा दी जाती, तो आज यह भयावह दृश्य देखने को न मिलता।

अपनी खामियों को छिपाने के लिए केजरीवाल द्वारा कोरोना वारियर्स पर ऊल-जुलूल आरोप लगाने पर कपिल मिश्रा ने केजरीवाल को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कोरोना वारियर्स हमारी पुलिस है, जिसने लॉकडाउन पालन की मुकम्मल व्यवस्था बनाई। हमारे सफाई कर्मचारी कोरोना वारियर्स हैं, जिन्होंने दिल्ली को साफ़-सुथरा रखने का काम किया।

अपने परिवार की जिंदगी दांव पर लगाकर हमारे डॉक्टरों ने अस्पतालों में आकर, मरीजों का इलाज कर अपनी जिम्मेदारी निभाई। ऐसे लोगों की तनख्वाह केजरीवाल ने रोक दी। अस्पतालों को धमकी दे रहे हैं और उनपर केस कर रहे हैं। यानी दिल्ली के सारे डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी गलत हैं, सिर्फ केजरीवाल सही हैं।

कपिल ने बताया कि हमने जीटीबी नगर के हॉस्पिटल का वीडियो देखा जिसमें नर्सों का कहना था कि उन्हें खाना भी नहीं दिया जा रहा है। ऐसी स्थिति में जब अपने परिजनों की जिन्दगी दांव पर लगाकर हमारे स्वास्थ्यकर्मी अपनी अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं तो केजरीवाल सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए था। जाहिर है, केजरीवाल बस कोरोना को लेकर टाइमपास कर रहे थे।

तबलीगी जमात के मसले पर कपिल मिश्रा ने स्पष्ट रूप से कहा कि देश में कोरोना तबलीगी जमात की वजह से ही फैला। तबलीगी जमात के लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंच गए जिससे कोरोना फैला। 1500 जमाती जो अवैध रूप से भारत में आए थे, उनपर एफआईआर भी कराई गई है। ये लोग डॉक्टरों के ऊपर पत्थर फेंक रहे थे, पुलिस को पत्थरों से मार रहे थे।

वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ़ करते हुए कपिल मिश्रा का कहना था कि हमें देखना चाहिए कि 23 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में कैसे कोरोना को लेकर सार्थक कदम उठाए गए। गोवा जहां विदेशी लोग आते हैं, वहां भी स्थिति अच्छी है।

जब कपिल मिश्रा से यह पूछा गया कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोरोना की मौत के आंकड़ें छिपाए, इसके पीछे उनका मकसद क्या था? कपिल मिश्रा का जवाब था कि दरअसल दो नहीं बल्कि तीन ऐसे राज्य हैं जहां कोरोना को लेकर लापरवाही बरती गई। उद्धव ठाकरे, ममता बैनर्जी और दिल्ली में केजरीवाल सरकार।

इन राज्यों की सरकारों ने शुरू में केंद्र सरकार की गाइडलाइन को नहीं माना। इन्होने तबलीगी जमात को भी ढील दी। इन राज्यों की सरकारें अपने यहां के प्रवासी मजदूरों का पलायन भी नहीं रोक पाईं।  जब केंद्र सरकार ने मजदूरों के हित में ट्रेन चलाने की घोषणा की तो ममता दीदी ने ट्रेन लेने से इनकार कर दिया। उलटे केंद्र सरकार पर इन तीनों राज्यों ने आरोप लगाया और सोचा कि अपनी जिम्मेदारी से बच जाएंगे, लेकिन इन्हें नहीं पता कि आज यही केंद्र सरकार और केन्द्रीय जवान हैं जिन्होंने कोरोना के खिलाफ लड़ाई को अपने हाथ में लेकर संभाला है।

हाल ही में संपन्न दिल्ली विधानसभा चुनावों में केजरीवाल की पार्टी ने स्वास्थ्य को बड़ा मुद्दा बनाया था। अपने मोहल्ला क्लिनिक के नाम अंतर्राष्ट्रीय ख्याति बटोरने की जुगत की थी। फिर आज इस कोरोना के संक्रमण काल में क्यों दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था दम तोड़ रही है? इस सवाल पर कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली में न तो शिक्षा की क्रांति हुई, न स्वास्थ्य की, यहां केवल विज्ञापन की क्रान्ति हुई है। आप देखिए कि कैसे दिल्ली सरकार के मंत्री कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद मैक्स हॉस्पिटल चले जाते हैं। इससे यही साबित होता है कि सरकारी व्यवस्था चरमरा गयी है। दिल्ली सरकार के मंत्री को भरोसा नहीं है कि सरकारी अस्पताल उनका इलाज करने में सक्षम हैं।

आखिर स्वास्थ्य के नाम पर करोड़ों के बजट का गान करने वाली दिल्ली सरकार इन प्रश्नों का जवाब देना क्यों नहीं चाहती? बाबरपुर और मौजपुर में मोहल्ला क्लिनिक के चलते कोरोना फैला। दिल्ली में जनता से केवल झूठ बोला गया था। यह अब सामने से नजर आ रहा है। आज स्थिति यह है कि व्हाट्सएप पर जोक आ रहे हैं कि फ्री के वाईफाई के चक्कर में न पड़ते तो 20-25 साल और जिन्दा रह लेते।

कपिल मिश्रा से हमने अगला प्रश्न किया कि जब कोरोना के मामले बढ़ने लगे और अमित शाह ने स्थिति को लेकर बैठक करना शुरू किया और वेंटीलेटर से लेकर जांच से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने लगे, तब केजरीवाल सामने आकर श्रेय लेने की राजनीति करने में जुट गए। संकट काल में भी इस श्रेय की राजनीति का क्या मतलब है?

इसपर कपिल मिश्रा का कहना था कि हमें यह समझना चाहिए कि गृहमंत्री अमित शाह ने कमान अपने हाथों में कब ली। तब जब उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में 5.5 लाख से ज्यादा केस हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों के लोगों का इलाज नहीं करेंगे। विज्ञापन देकर बोला जाने लगा कि यदि आप बीमार पड़ जाओ तो अपने घर पर रहकर इलाज करो। दरअसल वे इंतजार कर रहे थे कि जिसको मरना है मरे, हमें तो बस विज्ञापन ही देना है।

क्या केजरीवाल दिल्ली के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक नहीं करनी चाहिए थी? एलएनजेपी में गृहमंत्री अमित शाह पहुंचे, उनसे पहले न तो केजरीवाल न सिसोदिया और न ही दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ही वहां पहुंचे थे। केजरीवाल सरकार ने कोरोना काल में न तो खाने का इंतजाम किया न दवाई का।

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में ‘केजरीवाल मॉडल’ का शिगूफा उछाला था, जिसकी विफलता समय के सात ही स्पष्ट हो गयी और फिर बिगड़ते हालातों के मद्देनजर केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह को दिल्ली की कमान अपने हाथों में लेनी पड़ी। अब एक चर्चा ‘अमित शाह मॉडल’ की चल पड़ी है। इन दोनों को कपिल मिश्रा कैसे देखते हैं?

इस प्रश्न पर उनका कहना है कि केजरीवाल का कोई मॉडल ही नहीं है। दिल्ली में लाशों को उचिर अंतिम संस्कार तक की व्यवस्था राज्य सरकार ने नहीं की, कथित ‘केजरीवाल मॉडल’ कोरोना से लड़ने का नहीं बल्कि मौत का मॉडल है। जबकि गृहमंत्री अमित शाह का मॉडल जिन्दगी देने का मॉडल है। वो कोरोना से जीतने का मॉडल है। मुझे लगता है कि केजरीवाल को बैठकर गृहमंत्री अमित शाह से सीखना चाहिए कि कैसे व्यवस्था को चलाया जाता है। अभी उन्हें बहुत कुछ सीखना चाहिए।

बातचीत के क्रम में बात प्रवासी मजदूरों के पलायन पर भी पहुंची। हमारा अगला प्रश्न था कि जब लॉकडाउन की घोषणा की गई थी, तब क्या किसी साजिश के तहत मजदूरों के बीच भ्रामक सूचना पहुंचाई गई कि बॉर्डर पर बसें खड़ी हैं?

कपिल मिश्रा ने कहा कि निश्चित रूप से यह एक साजिश थी, जिसकी जांच भी चल रही है। ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें माइक से अनाउंसमेंट हो रहा था कि डीटीसी की बसों में बैठकर आनंद विहार चले जाओ। पूरे शहर में बसें चलाकर लोगों को आनंद विहार छोड़ा गया। बाद में उन सभी लोगों को पता चला कि उनके लिए कोई व्यवस्था ही नहीं थी। उन्हें यहां से पैदल ही जाना होगा। यह सब कुछ एक तय साजिश के तहत किया गया था।

कोरोना संकट के इस दौर में केजरीवाल ने एक बयान दिया था कि दिल्ली में सिर्फ दिल्ली वालों का इलाज होगा, यह संघीय ढांचे पर खतरा तो था ही, मानवता के लिहाज से उचित नहीं था। केजरीवाल के इस बयान पर अपने तीखे अंजाद में सवालों की झड़ी लगाते हुए कपिल मिश्रा कहते हैं कि क्या केजरीवाल के माता-पिता बीमार पड़ेंगे तो उनका इलाज दिल्ली में नहीं होगा? केजरीवाल और उनकी वाइफ भी दिल्ली की नहीं हैं, क्या उनका इलाज दिल्ली में नहीं होगा? दरअसल यह सिर्फ अपनी असफलता छिपाने की एक कोशिश भर है जिसे दिल्ली की जनता समझ चुकी है।

चूंकि कपिल मिश्रा एक समय में केजरीवाल के साथ काम कर चुके हैं, इसलिए हमने उनसे यह जानने का प्रयास किया कि केजरीवाल जिस तरह आए दिन केंद्र और उपराज्यपाल से उलझे रहते हैं, इसके पीछे उनकी क्या राजनीति है?

इसपर कपिल मिश्रा ने कहा कि यही केजरीवाल की राजनीति है। कोई काम मत करो और बस आरोप लगाओ। दिल्ली की हवा खराब हो तो पंजाब को दोष दे दो। जब दिल्ली में लॉ और आर्डर की समस्या हो तो पुलिस को गाली दे दो। कभी पीडब्लूडी  तो  कभी केंद्र सरकार, कभी सुप्रीम कोर्ट कभी भारत की सेना, सबपर आरोप लगाते रहो। यही उनकी राजनीति है।

हमारा अंतिम प्रश्न दिल्ली के दंगे को लेकर था। दिल्ली दंगों में एक बौद्धिक तबके द्वारा अपना नाम उछाले जाने को लेकर कपिल मिश्रा का कहना था  कि ये वो लोग हैं जिन्होंने दिल्ली को जलाया है। जामिया से जेएनयू और ताहिर हुसैन को पैसे-बम भिजवाने तक यही लोग थे।

कुछ पत्रकार भी हैं जिनमें राजदीप, बरखा और अभिसार या कापड़ी जैसे लोग शामिल हैं, ये सभी बस यही चाहते हैं कि कपिल मिश्रा को फंसा दो। ये लोग सोच रहे हैं कि कैसे मैंने आंख में आँख डालकर यह बोल दिया कि रास्ते बंद नहीं होंगे। दिल्ली और देश की जनता ने यह देखा और समझा है कि अब कहीं भी शाहीन बाग़ बनाने की कोशिश की जाएगी तो एक कपिल मिश्रा जरूर खड़ा होगा।