डॉ दिलीप अग्निहोत्री

डिफेंस एक्सपो 2020 : रक्षा क्षेत्र में नए भारत के सामर्थ्य और समृद्धि का प्रतीक

करीब ढाई वर्षों में ही अनेक विश्व स्तरीय आयोजनों में योगी सरकार ने अपना कौशल प्रमाणित किया है। इस सूची में डिफेंस एक्सपो भी शामिल हुआ। जिस प्रकार पिछले प्रयागराज कुम्भ में सर्वाधिक श्रद्धालु आये थे, उसी प्रकार यह अब तक का सबसे बड़ा डिफेंस एक्सपो था। शामिल होने वाले प्रतिनिधियों, प्रदर्शनी,सेमिनार,समझौते आदि की दृष्टि से यह अभूतपूर्व था। इसी के

डिफेंस एक्सपो 2020 : भारत को रक्षा उपकरणों का ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने की पहल

सामरिक क्षेत्र में भारत की भागीदरी पिछले करीब पांच-छः वर्षों में बढ़ी है। अब कोई भी देश भारत को नजरअंदाज करने की स्थिति में नहीं है। भले भारत अभी संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मसलों पर उंसकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। नरेंद्र मोदी सरकार ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।

आस्था ही नहीं, विकास का भी सन्देश देने वाली है गंगा यात्रा

गंगा दुनिया की सबसे पवित्र नदी है। इस तथ्य को वैज्ञानिकों ने भी स्वीकार किया है जबकि हमारे ऋषियों ने आदि काल से ही यह शोध कर लिया था। लेकिन  परतंत्रता के लंबे कालखंड और बाद में आने वाली सरकारों ने इसकी महिमा को नहीं समझा। नरेंद्र मोदी ने पहली बार सरकार बनाने के बाद नमामि गंगे परियोजना शुरू की थी।

गणतंत्र दिवस: भारतीय संविधान में मौजूद राम-कृष्ण के चित्रों के बारे में कितना जानते हैं आप?

भारत की स्वतंत्रता और संविधान निर्माण को अलग करके नहीं देखा जा सकता। दोनों भारत के गौरवशाली अवसर हैं। इससे हम सबको प्रेरणा लेनी चाहिए। यह तो आप जानते हैं कि आज की तारीख को ही 1950 में भारतीय संविधान लागू हुआ था, लेकिन क्या आपको मालूम है कि मूल संविधान में अनेक चित्र थे। इनका निर्माण नन्दलाल बोस ने किया था। यह हमारे गौरवशाली अतीत की झलक देने वाले थे। गणतंत्र दिवस पर इनकी भी चर्चा होनी चाहिए।

लखनऊ में होने जा रहा डिफेन्स एक्सपो 2020, भारत को रक्षा विनिर्माण हब बनाने की कवायद

अगले महीने स्वतंत्र भारत के रक्षा क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ेगा। पांच फरवरी से नौ फरवरी तक लखनऊ में अभूतपूर्व डिफेंस एक्सपो का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन मेक इन इंडिया अभियान को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। योगी आदित्यनाथ सरकार ने दो वर्ष पहले इन्वेस्टर्स समिट का अभूपपूर्व आयोजन किया था। इतना ही नहीं प्रयागराज कुम्भ, प्रवासी सम्मेलन भी

भगवा पर प्रियंका गांधी के बेमतलब बोल

नागरिकता कानून की सियासत में भगवा रंग का उल्लेख अनुचित ही नहीं, अटपटा भी है। वैसे भी धर्म-संस्कृति पर सतही तौर पर बोलने से बचना चाहिए। योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं, उनका विरोध सहज है। लेकिन सियासी मंसूबे के लिए भगवा पर बोलना उतना ही अनुचित है। कांग्रेस ने कुछ वर्ष पहले भगवा आतंकवाद शब्द गढ़ा था। ऐसा कहने वाले नेताओं को फजीहत

हर तरह से देशहित में है नागरिकता संशोधन क़ानून, बेमतलब है विरोध प्रदर्शन

नागरिकता संशोधन कानून से भारत के नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं थी, न उनसे सरकार नागरिकता पूछने जाती। सब कुछ यथावत चलता रहता। धार्मिक आधार पर उत्पीड़ित कुछ लोगों को पनाह मिल जाती, अवैध घुसपैठ के प्रति सावधानी बढ़ती। हर प्रकार से यह क़ानून देशहित में है। लेकिन ऐसे क़ानून को भी अराजकता में बदल दिया गया।

विश्वस्तरीय तीर्थाटन केंद्र के रूप में विकसित होगी अयोध्या

विश्व के अनेक देशों की अर्थव्यवस्था में पर्यटन व तीर्थाटन का विशेष योगदान रहता है। इसके लिए इन देशों ने योजनबद्ध ढंग से प्रयास किया। अपनी आध्यात्मिक, ऐतिहासिक व प्राकृतिक धरोहरों को सजाया-सँवारा, वहां विश्व स्तरीय सुविधाओं व संसाधनों का विकास किया। इसके कारण अनेक स्थानों को विश्व स्तरीय प्रतिष्ठा मिली।

संविधान दिवस : सिर्फ अधिकार नहीं, मौलिक कर्तव्यों के प्रति भी सजग हों नागरिक

संविधान दिवस वस्तुतः कर्तव्य बोध का अवसर होता है। देश को संविधान के अनुरूप चलाने में जन सामान्य का भी योगदान रहता है, उनकी भी इसमें भूमिका होती है। इसीलिए भारतीय संविधान की प्रस्तावना हम भारत के लोग से हुई है। संविधान सभा ने 26 नवम्बर, 1949 को संविधान पारित किया। लेकिन इसे 26 जनवरी, 1950 को विधिवत लागू किया गया। यह हमारा गणतंत्र दिवस हुआ।

कई संदर्भों में महत्वपूर्ण रही प्रधानमंत्री मोदी की ब्राजील यात्रा

बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्राजील यात्रा कई सन्दर्भो में महत्वपूर्ण रही। यहां वह ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल हुए। इसके संयुक्त घोषणापत्र में नरेंद्र मोदी के ही प्रस्तावों को वरीयता मिली। इसके ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। जिसमें आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं के साथ आदि की वार्ता बहुत