नवोदित सक्तावत

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को पूरे हुए पांच साल, करोड़ों किसानों को मिला लाभ

फसल बीमा योजना ने देश में किसानों के हितों को सुरक्षित किया है। इस योजना के कारण किसान विभिन्न कारणों से फसल के खराब होने के बाद की संकटपूर्ण स्थिति से मुक्त हुआ है।

कोरोना वैक्सीन पर अखिलेश यादव का बयान दुर्भाग्यपूर्ण तो है ही, आपत्तिजनक भी है

कोरोना महामारी से लेकर उसकी वैक्सीन तक भारतीय राजनीति में विपक्षी दलों ने विरोध के लिए विरोध की जो राजनीति की है, वो शर्मनाक और निंदनीय है।

किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है मोदी सरकार

देश के 9 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में करीब 18 हजार करोड़ रुपए सीधे जमा किए गए। यह काम हर बार की तरह, इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।

कृषि कानून की प्रतियां फाड़कर किसान आंदोलन को भुनाने की व्‍यर्थ कोशिश करते केजरीवाल

केजरीवाल को यदि वास्‍तव में अवाम की चिंता होती तो वे सबसे पहले इस कथित आंदोलन को खत्‍म कराने की पहल करते ना कि यहां अपनी नफरत की राजनीति का अवसर तलाशते।

किसान आंदोलन के नामपर अराजकता का प्रदर्शन

इन दिनों देश में तथाकथित किसान आंदोलन चल रहा है। तथाकथित इसलिए क्‍योंकि इसे किसान आंदोलन तो कहा जा रहा है लेकिन यह हंगामा कहीं से आंदोलन नहीं प्रतीत होता है।

लव जिहाद के खिलाफ राज्य सरकारों के कानून लाने से बिलबिलाया सेक्युलर गिरोह

उम्मीद कर सकते हैं कि अब लव जिहाद चलाने वाले अपराधी सींखचों के पीछे नज़र आएंगे और इस बुराई का इसी तरह क्रमिक रूप से उन्‍मूलन हो जाएगा।

कश्‍मीर की शांति बिगाड़ने के लिए सक्रिय हुआ गुपकार गिरोह, अमित शाह ने लिया आड़े हाथ

जम्मू-कश्‍मीर में हुई सुधारात्‍मक पहलों को अपनी निजी क्षति मानकर बैर पाल रहे नेता अब प्रदेश में दोबारा अराजकता लाना चाहते हैं। इसलिए ये गुपकार गठबंधन के रूप में सक्रिय हो रहे हैं।

भारत-अमेरिका के बीच हुआ ऐतिहासिक बेका समझौता, चीन-पाक की बढ़ेंगी मुश्किलें

BECA समझौते का सीधा संबंध देश की सामरिक शक्ति से जुड़ा है। इस समझौते के बाद देश अमेरिका की क्रूज मिसाइलों-बैलिस्टिक मिसाइलों की तकनीक हासिल कर सकेगा।

‘बिहार अब लालू के लालटेन युग के अंधेरे से निकलकर एनडीए के विकास की रोशनी में चल रहा है’

बिहार अब लालू प्रसाद यादव एवं जनता दल के लालटेन युग वाले अंधेरे से बाहर निकल चुका है और नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की रोशनी में चल रहा है।

हाथरस मामले में हंगामा मचाने वाले राहुल-प्रियंका करौली की घटना पर मुंह में दही क्यों जमाए हैं ?

यदि राहुल और प्रियंका आम आदमी के इतने ही हिमायती हैं तो वे बलरामपुर और करौली क्‍यों नहीं गए। इस पर उन्‍होंने कोई ट्वीट क्‍यों नहीं किया।