प्रणय कुमार

हिंसा, दमन और तानाशाही है वामपंथी विचारधारा का असल चेहरा

वामपंथी विचारधारा की एक पाखण्ड यह भी है कि इसके नीति-नियंता निजी जीवन में तो आकंठ भोग-विलास में डूबे रहते हैं और सार्वजनिक जीवन में शुचिता और त्याग की लफ़्फ़ाज़ी करते नज़र आते हैं। पंचसितारा सुविधाओं से लैस वातानुकूलित कक्षों में बर्फ और सोडे के साथ रंगीन पेय से गला तर करते हुए देश-विदेश का तख्ता-पलट करने का दंभ भरने वाले इन नकली क्रांतिकारियों की वास्तविकता सुई चुभे गुब्बारे जैसी है।

वामपंथ: लाल-आतंक के राष्ट्र-विरोधी आचरण से लोकतंत्र को खतरा

वामपंथ जिहादी मानसिकता और विचारधारा से भी अधिक घातक है। ये कुतर्क और अनर्गल प्रलाप के स्वयंभू ठेकेदार हैं! रक्तरंजित क्रांति के नाम पर इसने जितना खून बहाया है, मानवता का जितना गला घोंटा है, उतना शायद ही किसी अन्य विचारधारा ने किया हो। जिन-जिन देशों में वामपंथी शासन है, वहाँ गरीबों-मज़लूमों, सत्यान्वेषियों-विरोधियों आदि की आवाज़ को किस क़दर दबाया-कुचला गया है, उसके स्मरण मात्र से ही सिहरन पैदा होती है।