पुस्तक चर्चा

‘मन की बात’ कार्यक्रम पर आधारित एक उपयोगी पुस्तक

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पदभार सँभालने के बाद से ही जनमानस से जुड़ाव की कई सकारात्मक कोशिशें की हैं। मन की बात कार्यक्रम में आमजन से संवाद करना, ऐसा ही एक प्रभावी कदम रहा। प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम न केवल लोकप्रिय बना बल्कि आमजन को जागरूक करने में भी अहम् भूमिका निभाई। इस मासिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने वाकई मन की बात की जिसका सीधा प्रसारण रेडियो, दूरदर्शन और

चन्द्रगुप्त : पंडित दीनदयाल उपाध्याय कृत एक नाटक जो राष्ट्रवाद को परिभाषित करता है

भारत के राजनीतिक इतिहास के पितृ पुरुष पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक राजनेता के साथ-साथ कुशल संगठक तथा मूर्धन्य साहित्यकार भी थे। साहित्य की हर विधा पर उनकी समान पकड़ थी। कहानी, नाटक, रिपोर्ताज, कविता और यात्रा वृतांत में उनको महारत हासिल था। ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल जाएंगे जो उक्त बातों की पुष्टि करते हैं। उनके साहित्य-सृजन की कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण स्थान ‘चंद्रगुप्त’ का

भारतीय राजनीति का महत्वपूर्ण दस्तावेज है अरुण जेटली की पुस्तक ‘अँधेरे से उजाले की ओर’

‘अँधेरे से उजाले की ओर’ पुस्तक, श्री अरुण जेटली जी के अंग्रेजी में लिखित लेखों का हिंदी अनुवाद है। ये अनुवाद श्री प्रणव सिरोही जी ने किया है। इस पुस्तक का लोकार्पण हाल ही में 21 अक्टूम्बर 2016 को, भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह के कर-कमलों से हुआ। यह पुस्तक प्रभात प्रकाशन, दिल्ली से प्रकाशित हुयी है। यह पुस्तक “श्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में नेता

दीनदयाल उपाध्याय के विराट व्यक्तित्व का साक्षात्कार कराती पुस्तक

लगभग तीन सौ पृष्ठ वाली इस दीनदयाल वांग्मय नामक पुस्तक में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के जीवन से जुड़े तमाम पहलुओं को शामिल किया गया है। पुस्तक में वस्तुतः पंडित जी के बाल्यकाल से लेकर उनकी हत्या तक की सारी घटनाओं को समाहित किया गया है। चार खंडो में विभाजित इस पुस्तक में 36 अध्याय है। प्रथम खंड ‘जीवनकाल’ में बाल्यकाल से लेकर उनके प्राणोत्सर्ग तक की घटनाओं पर प्रकाश डाला

श्रीमद्भगवद गीता के अनुवाद का अद्वितीय रचनाकर्म

किसी रचना अथवा कृति का एक भाषा से दुसरी भाषा में अनुवाद तो साहित्य-सृजन की एक आम प्रक्रिया है,मगर भाषा के साथ-साथ बिना भावार्थ बदले किसी कृति की मूल विधा को अन्य विधा में अनुवादित करना एक अद्दभुत किस्म का रचनाकर्म है। वेद-व्यास कृत श्रीमदभगवद गीता भारतीय संस्कृति की एक ऐसी पुस्तक है जो महज पुस्तक नहीं बल्कि घर-घर एवं व्यक्ति-व्यक्ति के आस्था का केंद्र-बिंदु भी है।

भारतीयता के विरूद्ध जारी षड्यंत्रों का रहस्योद्घाटन करती पुस्तकः ‘अखंड भारत संस्कृति ने जोड़ा राजनीति ने तोड़ा’

वर्तमान इंटरनेट, कप्यूटर और स्मार्ट फोन आदि के दौर में पुस्तकों का बचा रह जाना हैरान कर सकता है। वह भी जब ये गैजेट्स मनुष्य के दैनन्दिन जीवन का अनिवार्य हिस्सा हो चले हों। आजकल इंटरनेट पर ‘सबकुछ’ मिलता है। इस ‘सबकुछ’ का आकर्षण हमें बरबस ही अपनी ओर खींच लेता है। इसमें रचनाओं का अंबार है, जिसे एक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इसमें एक बहुत बड़ा भ्रम भी है जिससे हमें खबरदार होने की जरूररत है।

पत्रकारिता की सरोकारी चिंताओं को रेखांकित करती पुस्तक

पत्रकार उमेश चतुर्वेदी की यह पुस्तक मीडिया के बदलते स्वरूप पर जहां एक ओर चिंता जाहिर करती है, वहीं दूसरी ओर सकारात्मक बदलाव के प्रति उम्मीद भी जगाती है। लेखक का मानना है कि उदारीकरण व नई आर्थिक नीतियों ने समाज व व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। मीडिया भी इस बदलाव से अछूता नहीं रहा है। प्रिंट हो चाहे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, उनके काम करने की शैली में आमूलचूल परिवर्तन आया है। पहले पत्रकारिता

पुस्तक-समीक्षा: रोम-रोम में बसे हैं श्रीराम

रामकथा आदर्श जीवन की संपूर्ण गाइड है। राम भारतवर्ष के प्राण हैं। वे भारत के रोम-रोम में बसे हैं। यही कारण है कि उनका अनादर देश बर्दाश्त नहीं कर सकता। मेरे राम मेरी रामकथा लिखने से पूर्व प्रख्यात लेखक नरेन्द्र कोहली राम चरित्र पर एक वृह्द उपन्यास लिख चुके हैं, जिसे खूब सराहा गया। यह दो भागों में था अभ्युदय-१ (दीक्षा, अवसर, संघर्ष की ओर) और अभ्युदय-२ (युद्ध-१ व युद्ध-२)। पहला खंड दीक्षा का लेखन उन्होंने १९७३ में शुरू किया था