काउंटर फैक्ट

कोरोना वैक्सीन पर अखिलेश यादव का बयान दुर्भाग्यपूर्ण तो है ही, आपत्तिजनक भी है

कोरोना महामारी से लेकर उसकी वैक्सीन तक भारतीय राजनीति में विपक्षी दलों ने विरोध के लिए विरोध की जो राजनीति की है, वो शर्मनाक और निंदनीय है।

कृषि कानून की प्रतियां फाड़कर किसान आंदोलन को भुनाने की व्‍यर्थ कोशिश करते केजरीवाल

केजरीवाल को यदि वास्‍तव में अवाम की चिंता होती तो वे सबसे पहले इस कथित आंदोलन को खत्‍म कराने की पहल करते ना कि यहां अपनी नफरत की राजनीति का अवसर तलाशते।

कृषि सुधार कानूनों को लेकर किसानों में भ्रम फैलाने का राजनीतिक कुचक्र

ये आंदोलन सीमित क्षेत्र में है, जबकि देशभर के बहुसंख्यक किसान कृषि सुधारों के पक्ष में हैं। अतः जो राजनीति करने पर तुले हुए लोग हैं, जो किसानों के कंधों पर बंदूकें रखकर राजनीति कर रहे हैं, देश के सारे जागरुक किसान उनको भी परास्त करके रहेंगे।

किसान आंदोलन के नामपर अराजकता का प्रदर्शन

इन दिनों देश में तथाकथित किसान आंदोलन चल रहा है। तथाकथित इसलिए क्‍योंकि इसे किसान आंदोलन तो कहा जा रहा है लेकिन यह हंगामा कहीं से आंदोलन नहीं प्रतीत होता है।

किसानों की आड़ में बिचौलियों को बचाने का आंदोलन

नए कानूनों के खिलाफ तथाकथित किसान नेताओं को मुद्दे नहीं मिल रहे हैं तो इसका कारण यह है कि ये आंदोलन किसानों के लिए नहीं बल्‍कि आढ़तियों-बिचौलियों की तगड़ी लॉबी को बचाने के लिए चलाया जा रहा है।

लव जिहाद के खिलाफ राज्य सरकारों के कानून लाने से बिलबिलाया सेक्युलर गिरोह

उम्मीद कर सकते हैं कि अब लव जिहाद चलाने वाले अपराधी सींखचों के पीछे नज़र आएंगे और इस बुराई का इसी तरह क्रमिक रूप से उन्‍मूलन हो जाएगा।

कश्‍मीर की शांति बिगाड़ने के लिए सक्रिय हुआ गुपकार गिरोह, अमित शाह ने लिया आड़े हाथ

जम्मू-कश्‍मीर में हुई सुधारात्‍मक पहलों को अपनी निजी क्षति मानकर बैर पाल रहे नेता अब प्रदेश में दोबारा अराजकता लाना चाहते हैं। इसलिए ये गुपकार गठबंधन के रूप में सक्रिय हो रहे हैं।

विदेशी चंदे के चक्रव्यूह को तोड़ने में कामयाब रही मोदी सरकार

अब विदेशी चंदा लेने वाले एनजीओ के सभी सदस्‍यों, पदाधिकारियों को यह घोषित करना होगा कि वे कभी किसी व्‍यक्‍ति के धर्मांतरण में शामिल नहीं रहे हैं।

बिहार चुनाव : पराजितों का ईवीएम राग शुरू

ईवीएम राग के गायन का एक लाभ यह है कि पराजित दल व नेतृत्व आत्मचिंतन से साफ बच निकलता है। पराजय का पूरा ठीकरा ईवीएम पर फोड़ कर वह निश्चिंत हो जाता है।

बिहार चुनाव : राजग के पास विकास का मुद्दा है, जबकि राजद अपने शासन का नाम भी नहीं ले रहा

भाजपा व जेडीयू दोनों सुशासन को महत्व देने वाले दल हैं, जबकि राजद व कांग्रेस के काम करने का अलग तरीका है। इन दोनों दलों को विकास से कोई मतलब नहीं।