काउंटर फैक्ट

ओलम्पिक विवाद: क्योंकि शर्म तो आपको आती नहीं है ‘शोभा डे’!

रियो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे खिलाडिय़ों के संबंध में विवादित लेखिका….

अगर यही राष्ट्रवाद के उभार का दौर है तो सोचिये राष्ट्रवाद के बुरे दिन कैसे रहे होंगे!

यह बात दुनिया भर के विद्वान कह रहे हैं कि यह भारत के अंदर राष्ट्रवाद के उभार का समय है। लेकिन, इसी समय में जेएनयू की एक छात्रा देवी सरस्वती का अपमान करने के लिए भारत भूषण अग्रवाल सम्मान से सम्मानित की जाती है। इस बात पर यकिन नहीं किया जा सकता है कि पुरस्कार के निर्णायक को कवयित्री के अश्लील रचना का ज्ञान ना हो।

इस्लामिक कट्टरपंथ : आज इन्हें राष्ट्रगान से दिक्कत है, कल राष्ट्र से भी हो जाय तो आश्चर्य नहीं होगा!

हाल के दिनों में देश में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने इस्लाम के कट्टरपंथी चेहरे से अमन और मोहब्बत…..

प्रधानमंत्री मोदी का फर्जी गौरक्षकों को कड़ा सन्देश, तथाकथित सेकुलरों की भी बोलती हुई बंद!

प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को टाउनहॉल में जनता से रूबरू होते हुए सवालों का…

इस्लामिक कट्टरपंथ को उजागर करते दो मामले, मौन क्यों हैं तथाकथित सेक्युलर ?

सांप्रदायिक और कट्टर सोच को उजागर करती दो घटनाएं हमारे सामने हैं। एक, मायानगरी मुम्बई की घटना है। दूसरी घटना मध्यप्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन की है। घर-घर ‘आराध्या’ नाम से पहचानी जाने वाली सना अमीन शेख टीवी कलाकार हैं। धारावाहिक ‘कृष्णदासी’ में सना का नाम आराध्या है। धारावाहिक में वह एक विवाहित मराठी महिला का किरदार कर रही हैं। भूमिका के अनुसार उन्हें माँग में सिंदूर भरना होता है और गले में मंगलसूत्र पहनना होता है।

वामपंथियों का चर्च प्रेम: झूठी रिपोर्ट्स दिखाकर बदलते हैं ‘पब्लिक परसेप्शन’

जून 2016 में आल इंडिया पीपुल्स फोरम की 8 सदस्यीय टीम ने छत्तीसगढ़ के चार जिलों बस्तर ,दंतेवाड़ा ,सुकमा ,बीजापुर का एक दौरा कर एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट तैयार की। ईसाई मिशनरी फंडेड इस वामपंथी संगठन की अगुवाई अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन की सचिव कविता कृष्णन कर रही थीं।

अराजकता का ध्वस्त होता अधिकारवाद, केजरीवाल को कोर्ट का तमाचा

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को संवैधानिक मर्यादाओं के विधिक विवेचन और स्थापन के बीच अधिकारों की ‘जंग’ में दिल्ली हाईकोर्ट से वाजिब सबक मिलने के साथ ही बड़ा सियासी झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने आज केजरीवाल सरकार की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट रूप से कहा है कि उपराज्यपाल ही दिल्ली के संवैधानिक प्रमुख हैं और वह कैबिनेट की सलाह मानने को बाध्य नहीं हैं। दरअसल आज दिल्ली हाईकोर्ट के सामने प्रश्न था कि दिल्ली पर किसका कितना अधिकार है यानी दिल्ली सरकार का या फिर उपराज्यपाल का।

तथाकथित सेक्युलर मीडिया को पत्रकार रोहित सरदाना का करारा जवाब

किले दरक रहे हैं। तनाव बढ़ रहा है। पहले तनाव टीवी की रिपोर्टों तक सीमित रहता था। फिर एंकरिंग में संपादकीय घोल देने तक आ पहुंचा। जब उतने में भी बात नहीं बनी तो ट्विटर, फेसबुक, ब्लॉग, अखबार, हैंगआउट – जिसकी जहां तक पहुंच है, वो वहां तक जा कर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करने लगा।जब मठाधीशी टूटती है, तो वही होता है जो आज भारतीय टेलीविज़न में हो रहा है। कभी सेंसरशिप के खिलाफ़ नारा लगाने वाले कथित पत्रकार – एक दूसरे के खिलाफ़ तलवारें निकाल के तभी खड़े हुए हैं जब अपने अपने गढ़ बिखरते दिखने लगे हैं। क्यों कि उन्हें लगता था कि ये देश केवल वही और उतना ही सोचेगा और सोच सकता है – जितना वो चाहते और तय कर देते हैं। लेकिन ये क्या ? लोग तो किसी और की कही बातों पर भी ध्यान देने लगे।

बसपा के गुनाहगारों की कब होगी गिरफ्तारी?

किसी पार्टी को यह गलत फहमी नहीं होनी चाहिए उसके यहां विवादित बयानबाजों का अभाव है। ऐसे जोखिम सभी दलों के सामने आ सकते है। आज भारतीय जनता पार्टी अपने एक नेता के धृणित बयान से आलोचना का सामना कर रही है। अब बसपा भी अपने कुछ लोगों की नारेबाजी से असहज हो रही है।

मोदी और बीजेपी पर आरोप की राजनीति के अलावे अब किसी काम के नहीं रहे केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जनता ने सत्ता विकास के कार्यों और दिल्ली के भले के लिए सौंपी थी। लेकिन शायद दिल्ली की केजरीवाल सरकार काम करने के मूड में नहीं है। बल्कि केजरीवाल सरकार का पूरा ध्यान अपने काम पर कम और मोदी सरकार पर ज्यादा रहता है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को सत्ता संभाले लगभग डेढ़ वर्ष हो चुके हैं। लेकिन जनता के हितों के कार्यों को छोड़कर केजरीवाल