काउंटर फैक्ट

सेना को बदनाम करने की साजिश का सच

लोकमित्र गत 12 अप्रैल 2016 को श्रीनगर से 40 मील दूर स्थित हंदवाड़ा कस्बे में एक स्कूली लड़की वॉश रूम गई थी। जब वह वॉश रूम के बाहर निकली तो उसके साथ वहीं बाहर मौजूद दो लड़कों ने बदतमीजी करने की कोशिश की। वो वॉश रूम के बाहर उसका इंतजार कर रहे थे, जब लड़की

जेएनयू बनाम एनआईटी- अभिव्यक्ति और असहिष्णुता के मापदंड

राजीव रंजन प्रसाद  लेखकीय जमात में मॉस्को से लेकर दिल्ली तक घनघोर शांति है। समाजसेवा की दुकानों में इस समय नया माल उतरा नहीं है। वो येल-तेल टाईप की चालीस-पचास युनिवर्सिटियां जिन्होंने जेएनयू देशद्रोह प्रकरण में नाटकीय हस्तक्षेप किये थे और कठिन अंग्रेजी में कठोर बयान जारी किये थे उनके अभी एकेडेमिक सेशन चल रहे

भाजपा ने की घोषणा

जिस संघ को कांग्रेस ने अपने खिलाफ उठे जनाक्रोश को भटकाने के लिए फासीवादी कहा था उसी संघ के एक शिविर में जेपी 1959 में जा चुके थे. उन्होंने संघ को कभी अछूत नहीं माना. आपातकाल के बाद जब जेपी जेल से छूटे तो उन्होंने मुंबई में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था,

जनता से खारिज वामपंथियों का रैन-बसेरा है जेएनयू

शिवानन्द द्विवेदी  वामपंथ की राजनीति एवं उनके दलीय संगठनात्मक ढाँचे का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन करने पर यही निष्कर्ष निकलता है कि दुनिया के कमोबेश सभी लोकतांत्रिक देशों की जनता ने वामपंथी दलों एवं उनकी विचारधारा को लोकतंत्र के अनुकूल नहीं मानते हुए, सिरे से नकार दिया है। यानी दो टूक कहें तो जहाँ भी