साक्षात्कार

आगामी विधानसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत प्राप्त कर इतिहास रचेगी भाजपा – अरुण सिंह

उत्तर प्रदेश को अगर देश की राजनीतिक धड़कन कहा जाये तो यह गलत नहीं होगा। ऐसे में, जबकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने को हैं, जाहिर सी बात है कि देश का सियासी पारा गर्म तो होगा ही। उत्तर प्रदेश की तमाम राजनीतिक उठापटक के बीच केंद्र में सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी की क्या स्थिति है, क्या योजनाएं हैं।

पाठ्यक्रमों पर गहराया लाल रंग न तो हिंदी के विद्यार्थियों के लिए अच्छा है, न ही समाज के लिए – प्रो चन्दन कुमार

साहित्य यूँ तो समाज का दर्पण कहा जाता है, लेकिन क्या हो जब यह दर्पण किसी ख़ास विचारधारा का मुखपत्र भर बन कर रह जाये ? क्या हो जब साहित्य के नाम पर विचारधारा का प्रचार किया जाने लगे। साहित्य की दुनिया में एक खास विचारधारा की तानाशाहियों पर खुलकर बातचीत की हिंदी-विभाग के प्रोफ़ेसर चन्दन कुमार से

भारत जैसे कहेगा हम चलेंगे, हमारी आवाम आपके साथ है : मज़दक दिलशाद बलूच

मजदक दिलशाद बलूच, बलूच आन्दोलन से जुड़े हुए बलूच नेता हैं एवम् वर्तमान में कनाडा मे निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे हैं। बचपन में ही पाकिस्तान के अत्यचार के कारण इनका परिवार बलूचिस्तान छोड़ने को मजबूर हो गया था। आपकी माता नीला क़ादिरि बलुच “विश्व बलूच वुमन फ़ोरम्” की अध्यक्षा हैं एवम् आपके पिता मीर

कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, जबकि बलूचिस्तान को पाकिस्तान ने जबरन कब्जा रखा है : मज़दक दिलशाद बलूच

मजदक दिलशाद बलूच, बलूच आन्दोलन से जुड़े हुए बलूच नेता हैं एवम् वर्तमान में कनाडा मे निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे हैं। बचपन में ही पाकिस्तान के अत्यचार के कारण इनका परिवार बलूचिस्तान छोड़ने को मजबूर हो गया था। आपकी माता नीला क़ादिरि बलुच “विश्व बलूच वुमन फ़ोरम्” की अध्यक्षा हैं एवम् आपके पिता मीर

हिंदी साहित्य के प्रथम और अंतिम आलोचक नहीं हैं नामवर सिंह : रामदेव शुक्ल

प्रख्यात कथाकार,आलोचक एवं दीनदयाल उपाध्याय विश्विद्द्यालय गोरखपुर के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रामदेव शुक्ल से हुई बात-चीत का कुछ अंश: सवाल : नमस्कार। एक प्रसिद्ध कथाकार एवं उपन्यासकार के तौर पर साहित्य जगत में आपकी ख्याति रही है। गद्य लेखन की उपन्यास विधा को लेकर जब साहित्यकारों के बीच मतैक्य नहीं है ऐसे में लेखन की

टैक्स की प्रक्रिया सरल और व्यापार की गति तेज, यही है जीएसटी का मूल: भूपेन्द्र यादव

संसद का मानसून सत्र चल रहा है। केंद्र की मोदी सरकार के लिहाज से यह सत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सत्र में कई लम्बित विधेयकों पर न सिर्फ चर्चा हुई है, बल्कि…

बौद्धिक एवं सामाजिक आंदोलन से भारत बनेगा विश्वगुरु: देवेन्द्र स्वरूप

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक, पांचजन्य के पूर्व संपादक तथा वरिष्ठ इतिहासकार देवेन्द्र स्वरूप जी भारतीय इतिहास तथा संस्कृति के गहन अध्येता है। जीवन के नौ दशक पार कर चुके देवेन्द्र स्वरूप जी के स्तम्भों को पांचजन्य में नियमित पढ़ा जा सकता है। वे राष्ट्रवादी पत्रकारिता के आधारस्तम्भ है। जीवन में सादगी, विचारधारा से

भारत की अर्थनीति ग्रामाधारित है, जिसकी रीढ़ है कृषि: डॉ. महेश चन्द्र शर्मा

कोई चीज़ स्वदेशी है इतने मात्र से ही वह ग्राहीय नही होती हैं। विदेशी होने मात्र से त्याज्य और स्वदेशी होने मात्र से ग्राहीय ऐसा दीनदयाल जी नहीं मानते हैं।छुआछूत भी स्वदेशी है, लेकिन वह ग्राहीय तो नहीं है। इसलिए जो स्वदेशी है उसे युगानुकूल यानी युग के तर्क के अनुकूल बनाना और जो विदेशी

लोक-संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं लोकगीत: मालिनी अवस्थी

मालिनी अवस्थी भोजपुरी एवं अवधी लोकगीतों में एक बड़ा नाम है। बचपन से गीत-संगीत का शौक रखने वाली मालिनी अवस्थी सबसे पहले तब चर्चा में आईं जब लोगों ने इनको एनडीटीवी के एक शो में देखा। हालांकि मालिनी अवस्थी पूर्वांचल के संगीत-प्रेमियों के बीच बहुत पहले से काफी चर्चित रहीं हैं। मालिनी अवस्थी भोजपुरी संगीत