श्रमिकों की बात

देश याद रखेगा कि संकटकाल में जब सरकार श्रमिकों के साथ खड़ी थी, विपक्ष संकीर्ण सियासत में लगा था

जब पूरा देश कोरोना संकट से उपजी चिंताओं एवं चुनौतियों में घिरा था तब कुछ राज्य सरकारें अपनी राजनीति में व्यस्त थीं, उन्हें न तो भूखे पेट सो रहे श्रमिकों की चिंता थी न ही बिना दूध के रोते बच्चों को। इन राज्यों को पैदल चल रहे श्रमिकों के पैरों के छाले नहीं दिखे लेकिन

श्रमिक हितों के लिए ‘आपदा काल’ में भी मोदी सरकार का कामकाज ‘आदर्श’ रहा है

सिर्फ विपक्ष ही नहीं, मीडिया के ख़ास धड़े ने भी पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों की कब्र खोदते हुए श्रमिक पलायन के मसले पर बेहद गैरजिम्मेदाराना रुख दिखाया।

कोरोना जैसी महामारी में भी श्रमिकों के हितों को सुरक्षित रखने में सफल रही मोदी सरकार

विपक्ष के आरोपों की सच्चाई धीरे-धीरे देश के सामने आ गयी जब विभिन्न समाचार माध्यमों के जरिये श्रमिकों ने सरकार के सुप्रबंधन की सराहना की।

कोरोना से लड़ाई में लॉकडाउन का महत्व विपक्ष भले न समझे, मगर आम लोगों ने बखूबी समझ लिया है

इस वीडियो का यह सन्देश विपक्ष को भी समझ लेना चाहिए कि कोरोना से लड़ाई में आम लोग सरकार और उसके लॉकडाउन आदि निर्णयों के साथ है, विपक्षी दल चाहें जो कहते रहें।

मजदूरों के बहाने सरकार को घेरने वाले विपक्ष की मजदूर ही खोल रहे पोल

मजदूरों के बहाने विपक्ष ने सरकार पर खूब निशाना साधा और तरह-तरह के आरोप लगाए। रेलवे पर भी मजदूरों को ले जाने में बहुत अव्यवस्था बरतने के आरोप लगाए गए। लेकिन सच इन सबसे अलग था और वो समय के साथ सामने भी आ रहा है।

लॉकडाउन में श्रमिकों के नामपर राजनीति करने वाले विपक्ष को आईना दिखाती हैं ये कहानियाँ

न जाने ऐसे कितने ही श्रमिकों की कहानियाँ हैं जो एक संवेदनशील सरकार व उसके उत्तरदायित्वों की चर्चा करती हैं। सर्वाधिक श्रमिक उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों से थे।

कुछ ऐसी घटनाएँ जो इस आपदा काल में पुलिस का मानवीय पक्ष तो दिखाती ही हैं, उम्मीद भी जगाती हैं

अपने कंधे पर समाज की सुरक्षा का भार ढोने वाली पुलिस ने अब कोरोना को भी हराने की जिम्मेदारी ले ली है। इसके कारण आज सैंकड़ों पुलिस कर्मियों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है लेकिन इसके बावजूद भी ये खाकी वर्दी धारी योद्धाओं ने अपने आप को कोरोना के खिलाफ जंग में सबसे अग्रिम पंक्ति में अब तक रखा है।

रेलवे के बहाने आपदा काल में राजनीति कर रहे विपक्ष के दावों की श्रमिकों ने खोली पोल

जिस विपक्ष को आपदा की इस घड़ी में सरकार का साथ देना चाहिए था वह विपक्ष विस्‍थापितों की तकलीफों को बढ़ाने में जुटा था ताकि मोदी सरकार को बदनाम किया जा सके। इसे रेलवे के उदाहरण से समझा जा सकता है।

उत्तर प्रदेश लौटकर आए मजदूरों ने उतार दिया कई चैनलों के चेहरे से निष्पक्षता का मुखौटा

माय गव इंडिया के यूट्यूब चैनल  पर पलायन कर रहे लगभग आधा दर्जन मजदूरों का अनुभव सुनने को मिला। इस वक्त जब तन्हाई और अवसाद की काली छाया चारों तरफ कोविड 19 के इस दौर में पसरी है, ऐसे समय में यह अनुभव नई ऊर्जा से भर देने वाला है।

‘जब से लॉक डाउन में परमिशन मिली है तब से भट्टा चल रहा है’

वीडियो के दौरान एक माँग जो निकल के आई वो ये थी कि सरकार भट्टा मालिकों को लगभग एक वर्ष तक का कर्ज प्रदान करे क्योंकि उत्पाद के माँग में बड़ी गिरावट आयी है, इस माँग को केंद्र सरकार ने MSME सेक्टर के अंतर्गत स्वीकार कर लिया है।