नजरिया

नयी शिक्षा नीति से बदलेगी भारतीय शिक्षा जगत की तस्वीर

हम सभी छोटे-छोटे उद्देश्य तय कर उनको प्राप्त करते हैं। नई शिक्षा नीति में भी एक समयावधि के अन्दर छोटे-छोटे लक्ष्यों को प्राप्त करने की बात की गई है।  

आत्मनिर्भर भारत का अर्थ विदेशी आयात रोकना नहीं, अपनी क्षमता और सृजनात्मकता को बढ़ाना है

जहां तक आत्‍मनिर्भर होने की बात है, यह केवल कोई सरकारी अभियान नहीं बल्कि स्‍वावलंबन की वह भावना है जो स्‍वदेशी निर्माण को बढ़ावा देती है।

भारत के सामयिक उत्कर्ष को सुनिश्चित करने वाली है नयी शिक्षा नीति

नयी शिक्षा नीति सही अर्थों में शिक्षा को औपनिवेशिक चंगुल से मुक्ति की संकल्पना है तथा यह भारत के स्वत्व व स्वाभाविक सामर्थ्य को साकार करने का प्रयास भी है।

लाल किले की प्राचीर से आत्मनिर्भर भारत का संदेश

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए नई शिक्षा नीति का एक बड़ा योगदान होगा, लेकिन यह कुछ महीनों में हासिल होगा, ऐसा हमें नहीं सोचना चाहिए।

जवानों और किसानों को मजबूती देते हुए आत्मनिर्भर भारत की राह पर बढ़ रही मोदी सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू से ही लाल बहादुर शास्त्री जी के ‘जय जवान जय किसान’ के नारे को चरितार्थ करने का संकल्प लिया हुआ है।

रक्षा उत्‍पादन में आत्‍मनिर्भरता हासिल करने की कवायद

2018-19 में भारत ने 80,000 करोड़ रूपये के रक्षा उपकरणों का उत्‍पादन किया जिसमें से 10,745 करोड़ रूपये के रक्षा उपकरणों का निर्यात किया गया।

‘आत्मनिर्भर भारत का सपना रामराज्य की स्थापना की दिशा में ही एक कदम है’

रामराज्य में एक ऐसे समाज की परिकल्पना है जहाँ कोई भी अपराध न करे। प्रधानमंत्री ने भूमि-पूजन के पश्चात् अपने वक्तव्य में इसी बात को रेखांकित किया।

जम्मू-कश्मीर में बह रही बदलाव की बयार

अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक स्थितियों से लेकर वहाँ के शासन-प्रशासन और उनकी दैनिक कार्यशैली में बड़े बदलाव आए हैं।

राम मंदिर हमें भान कराता रहेगा कि सत्य को कितना भी दबाया जाए, वो असत्य को मिटा ही देता है

राम देश के राष्ट्र पुरुष हैं। जाहिर है उनका मंदिर राष्ट्र मंदिर होगा जो देश में समरसता, आस्था, मर्यादा का भाव जागृत करता रहेगा।

सनातन सांस्कृतिक मूल्यों के पुनर्स्थापन के साथ-साथ विकास की धारा को भी गति देगा मंदिर निर्माण

कहना होगा कि राम मंदिर का निर्माण भारत के सनातन सांस्कृतिक मूल्‍यों का प्रतिस्‍थापन तो है ही, इससे विकास की धारा को भी गति मिलेगी।