पॉलिटिकल कमेंटरी

भ्रम से निकलिए और जानिये क्यों भारत है ‘हिन्दू राष्ट्र’ ?

दो बातों को लेकर संघ का सर्वाधिक विरोध होता है। पहला कि संघ भारत के ‘हिन्दू राष्ट्र’ होने की बात करता है जबकि दूसरा ये कि संघ के अनुसार भारत में रहने वाला और भारतीय संस्कृति को मानने वाला हर भारतीय हिन्दू है। इन दोनों मुद्दों पर संघ का दृष्टिकोण बड़ा ही स्पष्ट है। लेकिन संघ-विरोधी खेमे द्वारा इन मुद्दों पर विरोध के साथ-साथ यह आरोप भी लगाने की भरपूर कोशिश होती रही है कि संघ भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का एजेंडा चलाने की फिराक में है!

इतिहास में की गयी गलतियां हैं कांग्रेस के बौखलाहट की मूल वजह

इतिहास लिखना और इतिहास लिखवाना दोनों दो बातें हैं। पिछले 69 वर्षों से स्वाधीन भारत में कांग्रेस ने सच के समानान्तर झूठों का एक पुलिंदा तैयार करवाया और उसे बता दिया कि यही है इस देश का इतिहास। कांग्रेस निर्मित इतिहास के घड़े में अब कुछ सुराख बन गये हैं और उसमें से वही बदबूदार पानी रिस रहा है जिसे कभी उसके पोषित बुद्धिजीवियों द्वारा देश पर थोपा गया था।

कुतर्कों की बुनियाद पर टिका वामपंथी बुद्धिजीवियों का विलासी-विमर्श

हिटलर के प्रचारक गोयबेल्स ने ये उक्ति यूँ ही नहीं कही होगी कि अगर किसी झूठ को सौ बार बोला जाय तो सामने वाले को वो झूठ भी सच लगने लगता है। भारत के संदर्भ में अगर देखा जाय तो आज ये उक्ति काफी सटीक नजर आती है। भारतीय राजनीति एवं समाज के विमर्शों में दो ऐसे शब्दों का बहुतायत प्रयोग मिलता है, जिनकी बुनियाद ही कुतर्कों और झूठ की लफ्फाजियों पर टिकी हुई है। ये दो शब्द हैं दक्षिणपंथ एवं फासीवाद।

आतंकवादियों की शवयात्रा निकालने पर पूरी तरह से रोक लगाने की जरुरत

भारतीय सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में बुरहान मुजफ्फर वानी की मौत के बाद निकले जनाजे में जमकर उत्पात हुआ। करीब 30 जानें जा चुकी हैं। अभी कितनी जान जाएगी, बता पाना मुश्किल है। हिंसक प्रदर्शन की वजह से अमरनाथ यात्रा रोकनी पड़ी है। हिंदुस्तान में हर साल करीब एकाध आतंकवादी ऐसा होता है, जिसकी शवयात्रा के दौरान हंगामा होता है।

सच्चे देशभक्त की तलाश गूगल पर नहीं दस्तावेजों में पूरी होगी

29 जून से 6 जुलाई तक दिल्ली के नेहरु मेमोरियल एंड लाइब्रेरी में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लेकर एक प्रदर्शनी का आयोजन हुआ था। इस कार्यक्रम का उद्घाटन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने किया था। प्रदर्शनी का उद्देश्य डॉ मुखर्जी के जीवन के उन तमाम पक्षों पर प्रकाश डालना था जिनपर या तो बिलकुल चर्चा नहीं हुई अथवा बहुत कम हुई है।

यूपी दंगल से पहले हारे-हारे नजर आ रहे मुलायम

मुलायम सिंह यादव इन दिनों अपने कार्यकर्ताओं को लगातार चेता रहे हैं। उनके इस चेतावनी का मकसद कार्यकर्ता से ज्यादा उन नेताओं को हड़काना नजर आता है, जो सत्ता की मलाई खा रहे हैं, जो मंत्री हैं, विधायक हैं, निगमों के पदाधिकारी हैं या जिला पंचायतों-परिषदों के अध्यक्ष, सदस्य आदि हैं। उत्तर भारत की राजनीति में नेताजी के नाम से विख्यात मुलायम बार-बार अपने नेताओं को बता रहे हैं कि कौन भ्रष्टाचार कर रहा है, कौन सत्ता की ताकत से जमीनें पर कब्जा कर रहा है, सब पर उनकी निगाह है।

राष्ट्रवाद के खिलाफ बन रहा इस्लाम और वाम गठबंधन

गत दिनों काश्मीर की घाटी में हिजबुल के आतंकवादी बुरहान को भारतीय सेना के जवानों ने एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया और साथ में इस्लामिक आतंकवाद की काली रात में टिमटिमाते तारे को भी लुप्त कर दिया है। इस आतंकी की मौत के बाद भी भारत ने वही मंजर देखा है जो पिछले कई सालों से देखता आरहा है।

रामनाथ गोयनका की आत्मा रो रही होगी अपने सम्पादक की करतूतों पर!

वर्ष 2015, जुलाई महीने के अंतिम सप्ताह में दो बड़ी घटनाएँ हुईं। देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का निधन २७ जुलाई को हुआ और उसके ठीक तीन दिन बाद मुंबई हमले के दोषी आतंकी याकूब मेनन को फांसी हुई। आज एक साल बाद देश फिर उसी मुहाने पर खड़ा है। पाकिस्तान के मशहूर समाजसेवी अब्दुल ईदी सत्तार का हाल ही में निधन हुआ है और काश्मीर में हिजबुल के कमांडर बुरहान वानी को सेना ने एक मुठभेड़ में मार गिराया है।

वंदेमातरम् और मुस्लिम तुष्टिकरण की कांग्रेसी नीति

काफ़ी साल पहले कांग्रेस का एक अधिवेशन काकिनाडा में चल रहा था और मौलाना मुहम्मद अली वहां एक बैंड के बाजे-गाजे वाले जुलुस की सलामी लेते हुए शामिल हुए। जैसा कि उस दौर की कांग्रेसी रवायत थी, सत्र की शुरुआत वन्दे मातरम के गान से होनी थी। पंडित विष्णु दिगंबर पालुस्कर आगे आये और वंदेमातरम् गाने के लिए मंच की तरफ बढे।

अमर शहीद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

संजीव कुमार सिन्हा: एक देश में दो प्रधान, दो विधान, दो निशान – नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे” – यही वह नारा था, जिसकी खातिर भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपना प्राणोत्सर्ग कर दिया। भारत माता के भाल कश्मीर की रक्षा के संकल्प ने उन्हें बलिदान के पथ पर पुकारा।