समाज-संस्कृति

देश के अनेक इतिहासों की साक्षी है दिल्ली की रिज

हाल में ही केन्द्रीय सूचना आयोग के दिल्ली के रिज क्षेत्र के सीमांकन में देरी के कारण अंधाधुंध अतिक्रमण और अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। इतना ही नहीं, आयोग ने रिज क्षेत्र की सीमा चिन्हित करने में देरी से अतिक्रमण और मानचित्र सहित जानकारी मांगी है। इस तरह, एक बार फिर दिल्ली की रिज चर्चा में है।

सनातन मूल्यों और राष्ट्रवादी विचारों के समर्थक रचनाकार थे निराला!

भारतीय साहित्य में जब भी निराला की चर्चा होती है तब उनकी छवि एक ऐसे लेखक और कवि की बनती है जो पूरे समाज से विद्रोह करने पर आतुर है, वह व्यवस्था के खिलाफ है, लोकतंत्र के विरुद्ध है और वह सबके साथ एक बार युद्ध छेड़ने का प्रयास करता है, लेकिन निराला की वास्तविकता इससे परे है।

वर्तमान पीढ़ी समेत आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्र-सेवा की प्रेरणा के महान स्रोत हैं सोहन सिंह!

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्वर्गीय श्री सोहन सिंह जी एक ऐसे दीपक थे…

दिल्ली का इतिहास: पांडवों की राजधानी से लेकर भारत की राजधानी तक

देश की राजधानी दिल्ली का इतिहास का सिरा भारतीय महाकाव्य महाभारत के समय…

जीवन के हर क्षेत्र में सारथी की भूमिका निभाते हैं कृष्ण के विचार!

कृष्ण का जीवन जितना रोचक है, उतना ही मानवीय और मर्यादित भी। इसीलिए आम इंसान को बहुत कुछ सिखाता-समझाता है। नंदगांव के कन्हैया से लेकर अर्जुन के पार्थ तक उनका चरित्र जीवन जीने के अर्थपूर्ण संदेश संजोये हुए है, जो हर तरह से मानव कल्याण और जन सरोकार के भाव लिए हैं।

मनुष्य को मनुष्य की तरह जीने की शिक्षा देने वाले महामानव थे कृष्ण!

जीवन के साथ ही मृत्यु घेरने लगती है और अनवरत हमले करने शुरू करती है। कुछ इस हमले से उबर जाते हैं और कुछ पहले ही झपट्टे में ध्वस्त। यह तय बात है कि जिस किसी ने भी जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है। मगर कुछ लोग काल को टाल देते हैं और ऐसे ही लोग कालजयी या कालातीत कहलाते हैं।

मानव-कल्याण और राष्ट्र उत्थान के लक्ष्य को समर्पित व्यक्तित्व थे दत्तोपंत ठेंगड़ी

भारत वर्ष में महापुरुषों के अवतरण की एक पौराणिक परंपरा रही है। हर युग में माँ भारती का गोद महापुरुषों की दिव्य कीर्ति से आलोकित होता रहा है। और इन महापुरुषों ने अपने तपश्चर्य और साधना की परंपरा में एक ही ध्येय को शामिल किया, वो था माँ भारती को परम वैभव तक पहुंचाने का लक्ष्य।

भाई-बहन के बीच स्नेह, सुरक्षा और सहयोग का प्रतीक पर्व है रक्षाबंधन

यह स्थापित तथ्य है कि भारतीय समाज एक उत्सवधर्मी समाज है। यहाँ हर रिश्ते-नाते..

संघ दर्शन: समाज में व्याप्त जातिवाद के अंत का मार्ग है हिंदुत्व

साधारणतया मैं हिंदू समाज में व्याप्त जातिगत भेद-भाव या छुआ-छूत की भावनाओं पर कोई टिप्पणी नहीं करता।क्योंकि इस प्रकार की चर्चाओं की परिणति प्रायः “तू-तू,मैं मैं” में ही होती है।भारतीय समाज में जातिगत ग्रन्थियाँ इतने गहरे तक पैठी हैं कि इस पर सार्थक और तार्किक विमर्श की संभावना न्यूनतम होती है। इस प्रकार की चर्चाओं में प्रायः पढ़ा-लिखा समाज भी जातीय पूर्वाग्रहों और पारंपरिक धारणाओं से मुक्त नहीं रह पाता।

किस हिन्दू राजा का बसाया नगर है दिल्ली, जानिए क्या है इतिहास ?

दिल्ली शहर का इतिहास महाभारत के जितना ही पुराना है। इस शहर को इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था, जहां कभी पांडव रहे थे। समय के साथ-साथ इंद्रप्रस्थ के आसपास आठ शहर लाल कोट, दीनपनाह, किला राय पिथौरा, फिरोजाबाद, जहांपनाह, तुगलकाबाद और शाहजहांनाबाद बसते रहे। ऐतिहासिक दृष्टि से दिल्ली का इतिहास हिंदू तोमर राजा अनंगपाल के इस क्षेत्र पर अधिकार करने से शुरू होता है। उसने गुड़गांव जिले में अरावली की पहाडि़यों पर सूरजकुंड के समीप अपनी राजधानी अनंगपुर बनायी।