अमेरिका

भारत के मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप की मांग कर राहुल गांधी ने बचकानेपन की सभी हदें पार कर दी हैं

भाजपा सरकार कोई बलात नहीं वरन भारी बहुमत से चुनकर आई हुई सरकार है। इस चुनी हुई सरकार के विरुद्ध राहुल का एक अन्य देश से अपील करना देश के लोकतंत्र और जनमत का अपमान तो है ही, शर्मनाक भी है।

भारत-अमेरिका के बीच हुआ ऐतिहासिक बेका समझौता, चीन-पाक की बढ़ेंगी मुश्किलें

BECA समझौते का सीधा संबंध देश की सामरिक शक्ति से जुड़ा है। इस समझौते के बाद देश अमेरिका की क्रूज मिसाइलों-बैलिस्टिक मिसाइलों की तकनीक हासिल कर सकेगा।

स्वामी विवेकानंद का विश्व बंधुत्व का संदेश

जब स्वामी विवेकानंद स्वागत का उत्तर देने के लिए खड़े होते हैं और “अमेरिकावासी बहनों तथा भाइयों” से अपना वक्तव्य शुरू करते हैं और सामने बैठे विश्वभर से आये हुए लगभग 7 हज़ार लोग दो मिनट से ज्यादा समय तक तालियाँ बजाते रहते हैं।

चीन की मनमानी हरकतों पर लगाम लगाएगा क्वाड, भारत भी है शामिल

चीन के आक्रामक रवैये के खिलाफ अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच ‘क्वैड’ (क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलाग) नाम का गठबंधन ठोस आकार लेने लगा है।

लगातार मजबूत हो रहे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंध

हाल के समय में भारत और अमेरिका के बीच आपस में व्यापार और निवेश के सम्बंध  मज़बूत होते जा रहे हैं। विशेष तौर पर विदेशी व्यापार के क्षेत्र में अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा साझीदार बन गया है।

कोरोना काल में भी वैश्विक वित्तीय संस्थानों के भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसे की वजह क्या है?

वैश्विक स्तर पर कई वित्तीय संस्थानों जैसे विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आदि ने वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर कोरोना महामारी के कारण होने वाले सम्भावित प्रभाव का आँकलन करने का प्रयास किया है।

भारत सहित विश्व व्यापार पर कैसा होगा कोरोना संकट का प्रभाव ?

भारत में परिस्थितियाँ, अन्य विकासशील देशों की तुलना में, थोड़ी अलग हैं।  भारत में एक बहुत बड़ा बाज़ार उपलब्ध है। स्थानीय स्तर पर निर्मित किए जाने वाले विभिन्न उत्पादों को आसानी से भारत में ही खपाया जा सकता है। भारत को आर्थिक विकास के सम्बंध में बहुत अधिक चिंता करने की शायद आवश्यकता नहीं है।

कोरोना संकट के इस कठिन काल से और मजबूत होकर निकलेगा भारत!

एक तरफ जहां पड़ोसी चीन इस आपदा का व्यापारिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु अनुचित इस्तेमाल करने से नहीं चूक रहा, दूसरी तरफ भारत ने कोरोना से लड़ाई में केवल अपनी रक्षा ही नहीं की है, अपितु विश्व के अन्य देशों को भी सहयोग दिया है।

जानिये कैसे कोरोना संकट से निपटने में विश्व के सर्वश्रेष्ठ नेता बने मोदी

मोदी ने इस संकटकाल में न केवल अपने देश को संभाला है बल्कि उन्‍होंने कई अन्‍य राष्‍ट्रों को भी दवाओं व संसाधनों की खेप पहुंचाकर मानवीय आधार की मिसाल गढ़ी है। एक वैश्विक राजनेता में जो गुण होना चाहिये, आज मोदी में वे सारे गुण मौजूद हैं। जीवन रक्षक व जरूरी दवाओं से निर्यात प्रतिबंध सही समय पर हटाकर

‘कोरोना महामारी से भारत की लड़ाई दुनिया के लिए विस्मय और प्रेरणा का विषय बन चुकी है’

भारत अपनी विशाल-सघन जनसंख्या एवं सीमित संसाधनों के मध्य भी जिस दृढ़ता, साहस एवं संकल्प के साथ कोरोना महामारी से लड़ रहा है, वह पूरी दुनिया के लिए विस्मय, औत्सुक्य एवं गहन शोध का विषय है। अपितु उत्सुकता एवं शोध से अधिक आज यह यूरोप और अमेरिका के लिए अनुकरण और प्रेरणा का विषय बन चुका है