अयोध्या

रामजन्मभूमि से प्राप्त हो रहे ऐतिहासिक अवशेषों पर छद्म-धर्मनिरपेक्षों को सांप सूंघ गया है

बार-बार प्रमाण प्रस्तुत करने के बावजूद ऐसे लोगों ने राम मंदिर के अस्तित्व को अस्वीकार करने में कोई कोर कसर बाक़ी नहीं रखी। जो अयोध्या राममय है, जिसके पग-पग परa श्रीराम के चरणों की मधुर चाप सुनाई पड़ती है, वहाँ वे बाबर की निशानदेही तलाशते रहे।

विश्वस्तरीय तीर्थाटन केंद्र के रूप में विकसित होगी अयोध्या

विश्व के अनेक देशों की अर्थव्यवस्था में पर्यटन व तीर्थाटन का विशेष योगदान रहता है। इसके लिए इन देशों ने योजनबद्ध ढंग से प्रयास किया। अपनी आध्यात्मिक, ऐतिहासिक व प्राकृतिक धरोहरों को सजाया-सँवारा, वहां विश्व स्तरीय सुविधाओं व संसाधनों का विकास किया। इसके कारण अनेक स्थानों को विश्व स्तरीय प्रतिष्ठा मिली।

राम जन्मभूमि फैसला : सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने वाला समाधान

9 नवंबर, 2019 की तारीख भारतीय इतिहास में सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने वाले एक ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज हो चुकी है। इस दिन एक तरफ माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने लम्बे समय से चले आ रहे रामजन्मभूमि विवाद पर निर्णय देकर उसका समाधान किया तो वहीं दूसरी तरफ भारत-पाकिस्तान के बीच सिख समुदाय की आस्था से जुड़े करतारपुर कॉरिडोर की शुरुआत हुई।  

कई अर्थों में ऐतिहासिक साबित हुई नौ नवम्बर की तारीख

देश के बहुचर्चित रामजन्‍मभूमि  मामले में सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला आ चुका है। यह निर्णय वास्‍तव में राष्‍ट्र के हित में आया है, राष्‍ट्र की एकता व अखंडता, सामाजिक सौहार्द्र के पक्ष में आया है। कानूनी निष्‍कर्ष की बात करें तो विवादित भूमि रामलला को दिए जाने और मस्जिद के लिए मुस्लिम पक्षकार सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को पृथक से निर्माण के लिए 5 एकड़ भूमि दिए

‘अदालत के फैसले ने बता दिया कि अब इतिहास से आगे बढ़ भविष्य के निर्माण का समय है’

भगवान श्रीराम देश के अधिसंख्य लोगों के दिलों में वास करते हैं, इसके लिए किसी प्रमाण की ज़रुरत नहीं थी, लेकिन प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या ही है, इस बात को प्रमाणित करने में 70 साल लग गए। इस फैसले की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व में बने बेंच में सभी पांच जजों ने सर्व सम्मति से फैसला लिया। सुप्रीम कोर्ट में लंबी कानूनी

अयोध्या प्रकरण : विवाद के समाधान के साथ सामाजिक सद्भाव का मार्ग प्रशस्त करने वाला निर्णय

अयोध्या में श्रीराम जन्म स्थान के प्रति करोड़ों हिंदुओं की आस्था रही है। इसके अलावा यहां मंदिर होने के पुरातात्विक प्रमाण भी उपलब्ध हैं। यह सराहनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी का संज्ञान लिया। इसके बाद निर्णय दिया कि जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण किया जा सकेगा। 

अयोध्या दीपोत्सव : फिजी तक गूँजा मंगल भवन अमंगल हारी

इसबार अयोध्या के दीपोत्सव में फिजी की डिप्टी स्पीकर व सरकार में मंत्री वीणा भटनागर मुख्य अतिथि थी। केवल इतने पर ही विचार करें तो बात सामान्य लगती है। अनेक प्रमुख समारोहों में विदेशी मेहमानों को बुलाया जाता है। लेकिन अयोध्या दीपोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में विदेशी मेहमान की भागीदारी भावनात्मक रूप से भी विशिष्ट थी। यह भावना फिजी की मंत्री वीणा और

अयोध्या में साकार हुआ त्रेतायुग का दीपोत्सव

प्रभु राम के वियोग में अयोध्या के लोग भी चौदह वर्ष तक बेचैन रहे थे। इन सभी को वनवास की समाप्ति और प्रभु की वापसी की प्रतीक्षा थी। ज्यों ज्यों यह समय निकट आ रहा था, जनमानस की व्याकुलता बढ़ती जा रही थी। भरत जी ने चित्रकूट में प्रभुराम से कहा था कि यदि वनवास के बाद निर्धारित अवधि तक आप वापस अयोध्या नहीं आये तो वह अपना जीवन ही समाप्त कर लेंगे।

इसबार और दिव्य-भव्य होगी अयोध्या की दीपावली

कुछ समय पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में भव्य दिव्य कुम्भ का सफल आयोजन किया था। अब अयोध्या में भव्य दिव्य दीपावली का आयोजन होगा। योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इसके लिए कमर कसी है। वह तीर्थाटन व पर्यटन के प्रति शुरू से गम्भीर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे विश्व में भारत की छवि बनती है, इसी के साथ स्थानीय स्तर पर परोक्ष व अपरोक्ष रोजगार का भी सृजन होता है।

मोदी और योगी के राज में अपने गौरव के अनुकूल विकसित हो रही अयोध्या

यह मानना पड़ेगा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार केंद्र के प्रयासों में सहयोगी की भूमिका का बखूबी निर्वाह कर रही है। यह सहयोग सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की गौरव-गाथा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र की विकास और कल्याणकारी योजनाओं को भी प्रदेश में बेहतर ढंग से लागू किया गया है। इतना ही नहीं कई क्षेत्रों में तो राष्ट्रीय स्तर के कीर्तिमान भी स्थापित हुए।