असम

बोडोलैंड विवाद के समाधान से असम में खुलेगी शांति, स्थिरता और विकास की नयी राह

मोदी सरकार का नारा रहा है – सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास। इस मूलमंत्र पर आगे बढ़ते हुए, दशकों पुराने इस विवाद का अंत करते हुए सभी पक्षों ने एक साथ बैठाकर वार्ता की और समझौते की रूपरेखा तय होने के बाद इस विवाद का भी अंत हो गया। दरअसल सरकार की सख्ती के बाद अलग राज्य की मांग करने वालों को यह आभास

‘CAB-2019 के विरोध ने विपक्ष की संवेदनहीनता और स्वार्थी राजनीति को ही दिखाया है’

राज्यसभा से नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) पास होने के बाद से ही लगातार असम में इसका विरोध हो रहा है। इस बिल में यह प्रावधान किया गया है कि अब पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले “अल्पसंख्यक समुदाय” जैसे हिन्दू, सिख, बौद्ध, पारसी, जैन और ईसाई समुदाय अगर भारत में शरण लेते हैं तो उनके लिए भारत की नागरिकता हासिल करना आसान होगा। यह विधेयक उन पर लागू होगा जिन्हें इन तीन देशों में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित किए जाने के कारण भारत में

सामान्य आवागमन के साथ-साथ रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है बोगीबील सेतु

दशकों से लंबित अनेक परियोजनाओं को नरेंद्र मोदी ने अपने एक कार्यकाल में ही अंजाम तक पहुँचाया है। इस फेहरिस्त में एक नया नाम जुड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बना भारत का सबसे बड़ा रेल व सड़क सेतु राष्ट्र को समर्पित किया। यह परियोजना दो दशक से लंबित थी।

एनआरसी पर बौखलाने वाले वही लोग हैं, जिन्हें देशहित से अधिक अपना वोट बैंक प्यारा है!

एनआरसी का ड्राफ्ट आज संसद से सड़क तक चर्चा का केंद्रबिंदु बना हुआ है। सभी विपक्षी दल इस मुद्दे पर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहें हैं, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा का स्पष्ट कहना है कि घुसपैठियों के मसले पर सभी दलों को अपना मत स्पष्ट करना चाहिए। देश की सुरक्षा के साथ भाजपा कोई समझौता नहीं करेगी, लेकिन इसे देश का दुर्भाग्य ही कहेंगे कि भाजपा को

एनआरसी प्रकरण : वोट बैंक के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करने पर तुले हैं विपक्षी दल

असम के राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर प्रसंग पर संसद में हंगामा हतप्रभ करने वाला है। आंतरिक सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर तो राष्ट्रीय सहमति दिखनी चाहिए थी, जबकि इसमें सभी छुटे भारतीयों का नाम दर्ज होने तय है। लेकिन कुछ लोगों के लिए यह आंतरिक सुरक्षा की जगह  सियासत का मुद्दा है। जनगणना रजिस्टर पर भारत के नागरिकों के लिए कोई कठिनाई ही नहीं है।