आतंकवादी

क्या सुलझने की ओर बढ़ रही है कश्मीर की गुत्थी?

अमित शाह के कश्मीर दौरे के दौरान यह साफ़ हो गया था कि कश्मीर में सही वक़्त पर चुनाव भी होंगे लेकिन उससे पूर्व आतंकियों की नकेल भी कसी जाएगी। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान सेना को आतंकियों से निबटने में खुली छूट दी गई थी, जिसका नतीजा यह हुआ कि स्थानीय आतंकियों की एक पूरी की पूरी जमात का सफाया हो गया,

प्रधानमंत्री का अपमान और आतंकियों को सम्मान, कांग्रेस की ये कौन-सी पॉलिटिक्स है?

राहुल गाँधी किसी आतंकी सरगना को ‘जी’ लगाकर संबोधित करने वाले पहले कांग्रेस नेता नहीं हैं, कांग्रेस के लोगों को इसकी पुरानी आदत है। कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के दो बार के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह तो “ओसामा जी” और “हाफिज सईद साहब” का उच्चारण कर चुके हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को किसी

एयर स्ट्राइक के सबूत मांगने की शर्मनाक राजनीति से बाज आए विपक्ष

पुलवामा हमले के बाद भारतीय सेना ने नियंत्रण पार कर आतंकी ट्रेनिंग कैम्पों पर हमला कर खलबली मचा दी। 26 फरवरी की सुबह भारतीय वायु सेना ने अपने मिराज़ 2000 लड़ाकू विमानों की मदद से नियंत्रण रेखा को पार किया। अगले 19 मिनट तक भारतीय सेना आतंकी ठिकानों पर बम बरसाती रही।

अलगाववादियों पर हो रही कार्रवाई का घाटी में क्या होगा असर ?

इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान से फंडिंग का खुलासा होने के बाद देश में अशांति फ़ैलाने से लेकर कई संगीन अपराधों के लिए अब अलगाववादी नेताओं के कई करीबियों को हिरासत में लिया गया है। देश की सुरक्षा के लिहाज से यह एक बेहद जरूरी कदम था। ईडी ने आतंकी फंडिंग केस में शब्बीर शाह के एक करीबी कथित हवाला डीलर असलम वानी को श्रीनगर से गिरफ्तार किया। साथ ही शब्बीर शाह को भी

उचित है कश्मीरी पत्थरबाजों के प्रति सेना और सरकार का कठोर रुख

कश्मीर में आतंकियों पर कारवाई या मुठभेड़ के दौरान कश्मीर के स्थानीय लोगों द्वारा सेना पर पत्थरबाजी का सिलसिला जो कुछ समय से बंद था, अब फिर शुरू होता दिख रहा है। अभी हाल ही में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान सेना के जवानों पर पत्थरबाजों ने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। परिणाम यह हुआ कि एक आतंकी तो मारा गया, मगर पत्थरबाजी में सेना के काफी जवान घायल हो गए। इस घटना के बाद

आतंकवाद के खिलाफ पूर्णतः असहिष्णु होने का समय

हाल में जब उड़ी पर हमले हुए तो मीडिया ब्रेकिंग न्यूज़ और प्राइम टाइम इसीसे भरे दिखने लगे। हर और एक ही शोर था, सख्त से सख्त कदम उठाये जाएँ ! पाकिस्तानी सेना को करारा जवाब दो ! कोई युद्ध छेड़ने की बात कर रहा था, किसी को आर्थिक पाबंदियां लगानी थी, तो कोई पाकिस्तानी कलाकारों को भी भारत में प्रतिबंधित कर देने की वकालत कर रहा था। आख़िरकार, मैंने सोचा ! हालांकि कलाकारों पर