इजरायल

स्वामी विवेकानंद की दृष्टि में ‘आत्मनिर्भर भारत’

पश्चिम के अपने प्रथम प्रवास (1893-97) के दौरान स्वामीजी ने पश्चिम का भारत की तरफ देखने का  नजरिया ही बदल दिया। भारत को उस समय सपेरों का, दासों का और अंधविश्वासियो का देश माना जाता था जो सालो से विदेशियों द्वारा गुलाम रहा हो।

इजरायल के चुनाव में भी चर्चित और कामयाब रहा ‘चौकीदार’ अभियान

यह संयोग था कि इजरायल के आम चुनाव में भी चौकीदार पर खूब चर्चा हुई। इतना ही नहीं, यह मुद्दा कारगर भी हुआ। इसे उठाने वाले नेतन्याहू की सत्ता में वापसी सुनिश्चित हो गयी है। सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी ने प्रधानमंत्री वेन्जामीन नेतन्याहू को ‘मिस्टर सिक्यूरिटी’ यानी चौकीदार के रूप में पेश किया था। देखते ही देखते यह चुनाव का सर्वाधिक चर्चित मुद्दा बन गया।  विपक्षी

संतुलित विदेशनीति का बेहतरीन उदाहरण पेश करते मोदी !

याद्दाश्त को जरा पीछे ले जाएं तो अभी कुछ समय पहले की बात है, जब अमेरिका द्वारा येरुशलम को इजरायल की राजधानी बनाने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र में पेश किया गया था, लेकिन उस समय भारत ने लगभग अप्रत्याशित ढंग से उस प्रस्ताव के विरोध में अपना मत दिया था। तत्कालीन दौर में इस निर्णय को देखते हुए मोदी सरकार की विदेशनीति को लेकर कई प्रश्न उठाए गए थे और कहा गया था कि इस सरकार की विदेशनीति

कूटनीतिक दृष्टि से नैसर्गिक साझीदार हैं भारत और इजरायल

14 जनवरी को भारत दौरे पर आये इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर दिल्‍ली एयरपोर्ट पर गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। दरअसल इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू का यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल की यात्रा करने के महज छह महीने बाद हुआ है एवं इससे दोनों देशों के बीच 25 साल के कूटनीतिक संबंध को मजबूती मिली है।

भारत-इजरायल संबंधों में मजबूत स्थिति में भारत ही रहेगा !

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच नौ क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति कायम हुई है। कई अनुबंधों पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं। इन नौ क्षेत्रों में कृषि, तेल और गैस; सुरक्षा और साइबर तकनीक; पेट्रोलियम, फिल्म निर्माण, उड्डयन, नवीन ऊर्जा, अन्तरिक्ष और पारंपरिक चिकित्सा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा आतंकवाद के मोर्चे पर भी दोनों देश पीड़ित हैं। इजरायल जहां

मोदी विरोध के चक्कर में राष्ट्रहित से खिलवाड़ कर रही कांग्रेस !

कांग्रेस समय-समय पर अपनी फजीहत खुद ही करवा लेती है। इस बार तो हद ही हो गयी, कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से एक ऐसा वीडियो शेयर किया जिसके बाद सोशल मीडिया पर कांग्रेस की खूब आलोचना हुई। कांग्रेस द्वारा पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू के साथ गले मिलते हुए वीडियो को लेकर एक बेहद छिछले स्तर का वीडियो बनाकर शेयर किया

इजरायल से हुए कृषि विकास समझौते से भारतीय कृषि बनेगी मुनाफे का सौदा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान इजरायल से अन्य क्षेत्रों के साथ जल प्रबंधन और कृषि विकास सहयोग समझौता किया गया है। इस समझौते के बाद यह उम्मीद बंधी है कि अब इजरायल की कृषि तकनीक का भारत को भी लाभ मिल सकेगा, जिससे भारतीय कृषि के भी फायदे का सौदा बनने के रास्ते खुलेंगे।

नेहरूवादी मुस्लिपरस्ती के कारण कांग्रेस ने इजरायल से रखी दूरी, राष्ट्रीय हितों को किया अनदेखा

नेहरू-गांधी खानदान ने मुस्‍लिम वोटों के लिए हिंदू हितों की बलि ही नहीं चढ़ाई बल्‍कि ऐसी विदेश नीति भी अपनाई जिससे राष्‍ट्रीय हित तार-तार होते गए। इसे भारत की मध्‍य-पूर्व नीति से समझा जा सकता है। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के रूप में नेहरू ने पश्‍चिम एशिया के संबंध में भारतीय विदेश नीति में तय कर दिया था कि फिलीस्‍तीन से दोस्‍ती इजरायल से दूरी के रूप में दिखनी चाहिए। नेहरू की इस आत्‍मघाती नीति को

जानिये, प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे का क्या है हासिल ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुप्रतीक्षित इजरायल यात्रा आखिरकार सफलतापूर्वक संपन्‍न हो गई। यह वास्‍तविक अर्थों में बहुप्रतीक्षित और महत्‍वपूर्ण थी। मोदी ने दिलों को भी जीता और कूटनीति को भी बनाए रखा। आजादी के बाद से आज तक एक भी भारतीय प्रधानमंत्री इजरायल नहीं गया था, पीएम मोदी यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। उनकी यात्रा के लिए इजरायल पूरी तरह से तैयार था

भारत-इजरायल की इस जुगलबंदी से भारतीय विदेशनीति को मिलेगा नया आयाम

इजरायल में जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया गया, वह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भारत के बढ़ते वर्चस्व को दिखाता है, क्योंकि इजरायल के प्रधानमंत्री ने हिंदी में बोलकर उनका अभिवादन किया साथ ही वह अपने कैबिनेट के 11 मंत्रियो और सारे उच्च अधिकारियो को लेकर उनके स्वागत के लिए खड़े थे। अमेरिकी राष्ट्रपति के बाद मोदी पहले ऐसे राजनेता हैं, जिनका स्वागत करने के