उपचुनाव

केजरीवाल की राष्ट्रीय नेता बनने की निरर्थक महत्वाकांक्षा ने ‘आप’ को पतन की ओर धकेल दिया है !

दिल्‍ली पर राज कर रही अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के लिए 23 अगस्‍त को होने वाला बवाना विधानसभा उप चुनाव एक इम्‍तिहान से कम नहीं है। एक के बाद एक कई चुनाव हारने के बाद अपनों की बगावत और केजरीवाल की छवि पर हो रहे चौतरफा हमले के कारण इस चुनाव का महत्‍व बहुत बढ़ गया है।

चादर के हिसाब से पाँव फैलाना कब सीखेगी आम आदमी पार्टी ?

अकबर-बीरबल से संबंधित एक मशहूर किस्सा है। अकबर हमेशा से बीरबल की तीक्ष्ण बुद्धि और प्रतिभा से प्रभावित रहते थे। लगभग हर मसले पर बीरबल से राय मशविरा करते थे। दोनों एक दूसरे पर व्यंग्य आदि भी करते थे; कहने का अर्थ यह कि दोनों में मित्रवत संबंध थे। अकबर-बीरबल के बीच के इस तरह के संबंध को देखकर अकबर के नवरत्नों समेत अन्य दरबारियों को ईर्ष्या होती थी।

आम आदमी पार्टी के ख़त्म होते जनाधार से बौखलाहट में केजरीवाल

आम आदमी पार्टी अपना जनाधार तेज़ी से खोती जा रही है। यदि इस पार्टी को अपना वजूद बचाए रखना है, तो उसे नाटकीयता और भ्रामक बातों, दावों, नारों से ऊपर उठना होगा। याद कीजिये 2014 में दिल्‍ली का मुख्‍यमंत्री बनने के बाद सत्‍ता छोड़कर जब अगले साल केजरीवाल दोबारा सत्तारूढ़ हुए तब उनके बड़े-बड़े वादों को देखते हुए दिल्ली के मतदाताओं ने उन्हें पूर्ण बहुमत दिया।