एमएसएमई

‘कोरोना से लड़ाई में सरकार ने जो फाइटिंग-स्पिरिट दिखाई है, वो खुद में एक मिसाल है’

केंद्र सरकार ने इस आपदा-काल में योजनाओं और नीतियों के समन्वय और जनता से मिले सहयोग से एक उदाहरण प्रस्तुत किया है कि हम कोरोना जैसी आपदा से कैसे लड़ें।

श्रमिकों के लिए भी आपदा को अवसर बनाने में जुटी सरकार

सरकार अब श्रमिकों को उनके हुनर, दक्षता और जानकारी के आधार पर स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया करा रही है। यह श्रमिकों के लिए आपदा में अवसर की तरह ही है।

एमएसएमई क्षेत्र की मजबूती से निकलेगा आत्मनिर्भर भारत का रास्ता

कृषि क्षेत्र के बाद, एमएसएमई क्षेत्र में रोज़गार के सबसे अधिक अवसर निर्मित होते हैं। 73वें राष्ट्रीय सैम्पल सर्वेक्षण के अनुसार, देश में  एमएसएमई क्षेत्र में 6.34 करोड़ इकाईयाँ कार्यरत थीं, ज़िनके माध्यम से 11.1 करोड़ व्यक्तियों (4.98 करोड़ ग्रामीण क्षेत्रों में एवं 6.12 करोड़ शहरी क्षेत्रों में) को रोज़गार उपलब्ध कराया जा रहा था।

59 मिनट लोन योजना से एमएसएमई कारोबारियों के लिये लोन लेना हुआ आसान

देश में फिलहाल 6.3 करोड़ से ज्यादा एमएसएमई यूनिट कार्य कर रही हैं, जिनमें 11.1 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। देश की जीडीपी में एमएसएमई क्षेत्र का योगदान करीब 30 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि यदि इस क्षेत्र को मजबूत किया जाये तो देश में रोजगार सृजन, आर्थिक आत्मनिर्भरता, समावेशी विकास, विनिर्माण में तेजी आदि को संभव बनाया जा सकता है।

मोदी सरकार के ठोस उपायों से बढ़ रहा है उद्यमशीलता का दायरा

1991 में शुरू हुई नई आर्थिक नीतियों की प्रक्रिया गठबंधन सरकारों के दौर में आकर ठहर गई। यही कारण था कि उदारीकरण का रथ महानगरों और राजमार्गों से आगे नहीं बढ़ पाया। इसका नतीजा यह हुआ कि खेती-किसानी घाटे का सौदा बन गई और गांवों से शहरों की ओर पलायन बढ़ा। उद्यमशीलता के महानगरों तक सिमट जाने के कारण देश भर में बेरोजगारी तेजी से बढ़ी।