कट्टरपंथ

ओवैसी के राम मंदिर विरोध के मूल में मुस्लिम लीग वाली मानसिकता ही कारण है

केंद्र में कांग्रेसी सरकारों का प्रायः समर्थन करने वाला ओवैसी का दल (एआईएमआईएम) भाजपा सरकार के प्रत्येक कार्य पर उंगली उठाता रहा है।

जो मज़हब किसीके डांस करने या चेस खेलने से खतरे में पड़ जाता हो, उसे खत्म ही हो जाना चाहिए !

इस्लाम शायद ऐसा एकमात्र मज़हब है, जो आए दिन और बात-बेबात ख़तरे में पड़ता रहता है। किसी भी मुसलमान के गाना गाने, नाचने से लेकर बनाव-श्रृंगार करने तक से इस्लाम पर खतरा आ जाता है। फिर इसके स्वघोषित झंडाबरदारों द्वारा धमकी भरे फतवों का दौर शुरू हो जाता है। इतना ही नहीं, अगर इन्हें राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ गाने को कह दो तो उससे भी अक्सर इनके इस्लाम पर संकट आ जाता है। राष्ट्रगान के कई शब्दों

बढ़ता इस्लामिक कट्टरपंथ कहीं बांग्लादेश को दूसरा पाकिस्तान न बना दे!

इसे समय की विडंबना ही कहेंगे कि जिस बांग्लादेश को आज से साढ़े चार दशक पहले भारत ने पाकिस्तान से स्वतंत्र कराकर उसपर खुद अधिकार जमाने की बजाय उसे अपना अस्तित्व कायम करने का अवसर दिया था, उसी बांग्लादेश में आज भारत की बहुसंख्यक आबादी अर्थात हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों और उपासना प्रतीकों को क्षति पहुंचाना धीरे-धीरे आम होता जा रहा है। हम बात कर रहे हैं बांग्लादेश में

मुस्लिम औरतों का हक़ छिनकर इस्लाम की कौन-सी शान बढ़ाएंगे, मिस्टर मौलाना ?

नेशनल लॉ कमीशन की प्रश्नावली पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। लॉ कमीशन ने नागरिकों के विचार के लिए सिर्फ़ एक प्रश्नावली रखी है। उसने इस प्रश्नावली में यह भी नहीं कहा है कि समान नागरिक संहिता लागू कर ही दी जाएगी, बल्कि उसने इस पर एक स्वस्थ चर्चा की बुनियाद डालने का

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को समझना होगा कि यह देश संविधान से चलता है, मज़हबी कायदों से नहीं!

संविधान से उपर अपने कानूनों को सर्वश्रेष्ठ साबित करने में लगे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मुस्लिमों में प्रचलित तीन तलाक और चार शादियों के नियम को उचित ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट से पर्सनल लॉ में दखल न देते हुए इस प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खत्म करने की मांग की है। बोर्ड का कहना है कि ये पर्सनल लॉ पवित्र कुरान और हमारी धार्मिक स्वतंत्रता पर आधारित है, जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा

इस्लामिक कट्टरपंथ को सामने लाते इन मामलों पर क्या कहेंगे सेकुलर!

बात सन 2011 की है। पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के गवर्नर थे सलमान तासीर। वो इस्लामिक देश पाकिस्तान के ईश निंदा कानूनों के खिलाफ थे और ऐसे कानूनों को इस्लाम के खिलाफ मानते थे। आम तौर पर इस्लामिक मुल्कों में ऐसे कानूनों का अहमदिया, हिन्दू, सिख या इसाई जैसे

इस्लामिक कट्टरपंथ : आज इन्हें राष्ट्रगान से दिक्कत है, कल राष्ट्र से भी हो जाय तो आश्चर्य नहीं होगा!

हाल के दिनों में देश में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने इस्लाम के कट्टरपंथी चेहरे से अमन और मोहब्बत…..