कर्जमाफी

‘इस चुनाव में ना तो कोई सत्ताविरोधी लहर है, ना ही विपक्ष के पक्ष में हवा’

देश में एक बार फिर चुनाव होने जा रहे हैं और लगभग हर राजनैतिक दल मतदाताओं को “जागरूक” करने में लगा है। लेकिन इस चुनाव में खास बात यह है कि इस बार ना तो कोई सत्ताविरोधी लहर है, ना ही सरकार के खिलाफ ठोस मुद्दे और ना ही विपक्ष के पक्ष में हवा। बल्कि अगर यह कहा जाए कि समूचे विपक्ष की हवा ही निकली हुई है तो भी गलत नहीं होगा।  क्योंकि जो

कांग्रेस की वोट बैंक की राजनीति को समझने की जरूरत

जब वोट बैंक और मुफ्तखोरी की राजनीति का इतिहास लिखा जाएगा तब उसमे कांग्रेस का नाम स्‍वर्णाक्षरों से अंकित होगा। जाति-धर्म, क्षेत्र-भाषा, अगड़े-पिछड़े, दलित-आदिवासी के नाम पर राज कर चुकी कांग्रेस पार्टी अब नये मोहरों की तलाश में है। मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़ और राजस्‍थान विधान सभा चुनावों में उसे एक नया मोहरा मिल गया- किसानों की कर्जमाफी।

बहुआयामी नीतियों से किसानों की आय दोगुनी करने की ओर बढ़ रही मोदी सरकार

मोदी सरकार का मकसद किसानों की समस्या का निदान करना है, न कि लोकलुभावन योजनाओं  के माध्यम से उन्हें लुभाना। उदाहरण के तौर वर्ष 2008 में कृषि कर्ज माफी का नारा दिया गया था, लेकिन 5 से 6 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में से केवल 72,000 करोड़ रुपये का कर्ज माफ करने की घोषणा की गई और केवल 52,500 करोड़ रुपये माफ किया गया, जिसका

मध्य प्रदेश : किसानों के साथ छलावा साबित हो रही कांग्रेस की कर्जमाफी

मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस की नवगठित सरकार अपने गठन के बाद से एक के बाद एक नकारात्मक कारणों से चर्चा में है। अब कर्जमाफी को ही लीजिये। मप्र में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने किसानों को लुभाने के लिए कर्जमाफी का लुभावना वादा किया था। जब कांग्रेस जीतकर सत्‍ता में आ गई तो वादे पूरे करने की सूची में कर्जमाफी सबसे शीर्ष क्रम पर थी।

राहुल गांधी की किसान-कल्याण की सुई कर्जमाफी से आगे क्यों नहीं बढ़ रही?

कर्जमाफी के लोकलुभावन मुद्दे पर तीन राज्यों के चुनावों में जीत करने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को जैसे कर्जमाफी के अलावा और कुछ दिख ही नहीं रहा। गत दिनों उन्होंने कहा कि जबतक प्रधानमंत्री पूरे देश का कर्ज माफ़ नहीं करते, वे उन्हें सोने नहीं देंगे। इस बात से संकेत यही निकलता है कि लोकसभा चुनाव में भी राहुल गांधी कर्जमाफी को मुद्दा बनाने वाले हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि कांग्रेस की किसान कल्याण की सुई कर्जमाफी से आगे क्यों नहीं बढ़ रही?

सत्ता में आते ही उजागर होने लगा कांग्रेस का असली चेहरा

गंगा जल लेकर कर्जमाफी का वादा कर सत्‍ता में आई कांग्रेस पार्टी का असली चाल-चरित्र उजागर होने लगा है। किसानों की कर्जमाफी के लक्षण तो नहीं दिख रहे हैं, उल्‍टे उन्‍हें तीन-तीन दिन से यूरिया के लिए लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। कांग्रेस के सत्‍ता में आते ही मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, छत्‍तीसगढ़ में जमाखोर व बिचौलिए सक्रिय हो गए हैं। जो यूरिया भाजपा के शासन काल

क्यों उठ रहे हैं कमलनाथ सरकार की कर्जमाफी पर सवाल?

मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार का गठन हो चुका है। मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने पार्टी के बड़े चुनावी वादे किसान कर्जमाफ़ी का ऐलान भी कर दिया है। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस द्वारा जारी वचन-पत्र से लेकर राहुल गांधी के भाषणों तक में कर्जमाफी का वादा प्रमुखता से दिखाई दिया था। जाहिर है, कांग्रेस पर इस वादे को पूरा करने को लेकर

योगी सरकार के काम की यही रफ़्तार रही तो जल्द ही उत्तर प्रदेश होगा ‘उत्तम प्रदेश’

योगी सरकार जिस गति से काम कर रही है, यदि ऐसे ही करती रही तो वह दिन दूर नहीं जब देश के बीमारू राज्यों में से एक उत्तर प्रदेश की हालत में बड़ा सुधार आएगा। चूंकि अब योगी के रूप में एक ऐसा व्यक्ति मुख्यमंत्री है, जिस पर जनता को अटूट विश्वास है और योगी की कार्य गति तथा दृढ इच्छाशक्ति दिखाती है कि वे जनता के विश्वास पर शत-प्रतिशत खरा उतरने के

सपा-बसपा की जातिवादी राजनीति से बदहाल हुए यूपी के किसान

जहां तक उत्‍तर प्रदेश के किसानों की बदहाली का सवाल है, तो उसके लिए जातिवादी राजनीति जिम्‍मेदार है। पिछले तीन दशकों से उत्‍तर प्रदेश में जाति की राजनीति चरम पर रही। विकास पर राजनीति के भारी पड़ने का ही परिणाम है कि सिंचाई, बिजली आपूर्ति, ग्रामीण सड़क, बीज विकास, भंडारण, विपणन, सहकारिता जैसी किसान उपयोगी गतिविधियां ठप पड़ गईं। इस दौरान पूरा प्रशासनिक अमला समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की जातिवादी राजनीति के हितों को पूरा करने में लगा रहा।