कांग्रेस

कमलनाथ ने नया कुछ नहीं कहा, महिलाओं के प्रति कांग्रेस की सोच ही यही है

कांग्रेस पार्टी महिलाओं के नाम पर सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम करती है। कांग्रेस के तमाम बड़े नेता समय-समय पर महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करते रहे हैं

हाथरस मामले में हंगामा मचाने वाले राहुल-प्रियंका करौली की घटना पर मुंह में दही क्यों जमाए हैं ?

यदि राहुल और प्रियंका आम आदमी के इतने ही हिमायती हैं तो वे बलरामपुर और करौली क्‍यों नहीं गए। इस पर उन्‍होंने कोई ट्वीट क्‍यों नहीं किया।

चीन को खदेड़ने के लिए पंद्रह मिनट मांगने वाले राहुल की कांग्रेस साठ सालों तक क्या कर रही थी ?

चीन को खदेड़ने के लिए 15 मिनट मांगने वाले राहुल गांधी को पहले पिछले साठ सालों में कांग्रेसी सरकारों द्वारा की गई भूलों पर देश से माफी मांगनी चाहिए।

राहुल गांधी की बचकानी हरकतों के कारण सिमट रही है कांग्रेस

कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी जिस प्रकार की बचकानी हरकतें करते रहे हैं उससे वे हर तरफ हास्‍य का पात्र बन जाते हैं।

किसानों के हितों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है मोदी सरकार

वर्तमान सरकार ने अपने प्रथम कार्यकाल से ही 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है और सरकार इस दिशा में लगातार काम भी कर रही है।

मुद्दाहीन विपक्ष की बौखलाहट का परिणाम है कृषि कानूनों का विरोध

कोरोना जैसी आपदा के समय में भी जिस तरह सरकार ने व्यवस्था को यथासंभव संभाले रखा है और जनता में विश्वास बना रहा है, उससे विपक्ष बुरी तरह से बौखलाया हुआ है।

विपक्ष द्वारा कृषि सुधार विधेयकों के विरोध की क्या है असली वजह ?

कृषि सुधार संबंधी कानून लागू होने के बाद भी सरकारी मंडी व्‍यवस्‍था और न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य जारी रहेंगे फिर भी विपक्ष वोट बैंक की राजनीति में डूबा विपक्ष भ्रम फैलाने से बाज नहीं आ रहा है। 

‘उपसभापति हरिवंश का आचरण प्रशंसनीय ही नहीं, अनुकरणीय और वरेण्य भी है’

त्वरित प्रतिक्रिया एवं तल्ख़ टीका-टिप्पणियों वाले इस दौर में उपसभापति हरिवंश का यह आचरण न केवल प्रशंसनीय है, अपितु अनुकरणीय एवं वरेण्य भी है।

पारित हुए कृषि सुधार विधेयक, किसानों के जीवन में आएगा नया सवेरा

कुल मिलाकर घोषणा के स्तर पर ये विधेयक निःसंदेह आश्वस्तकारी हैं, उम्मीद है धरातल पर भी ये परिणामदायी साबित होंगें और किसानों के जीवन में नया सवेरा लाएंगे।

सरकार का अंधविरोध करते-करते विपक्ष अब संसदीय मर्यादाओं के विरोध पर उतर गया है

हां तक बिल की बात है, यह पूरी संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक ढंग से पारित किया गया है। लेकिन विपक्ष ने तो इस तरह हंगामा मचाया मानो इसे पिछले दरवाजे से बिना प्रक्रिया पूरी किए पास कर दिया गया हो।