कांग्रेस

कांग्रेस ने गांधी के नामपर केवल राजनीति की, मोदी उनके सपनों को पूरा कर रहे हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल से अभी तक की यात्रा को देखें तो गांधी के विचारों एवं सिद्धांतों को जन-जन से जोड़ने के लिए उनकी सरकार ने सांकेतिक से लेकर व्यावहारिक तक प्रत्येक स्तर पर ठोस काम किया है। इसका सबसे बड़ा उदारहण स्वच्छ भारत अभियान है। स्वच्छ भारत का सपना महात्मा गांधी ने देखा था, लेकिन आजादी के बाद

‘महाराष्ट्र के इस प्रकरण ने कांग्रेस और शिवसेना दोनों का असली चेहरा सामने ला दिया’

महाराष्ट्र के घटनाक्रम को समझने से पहले आपको चुनाव के पहले के घटनाक्रम को देखना होगा। विधानसभा चुनाव से पहले हुए गठबंधन के तहत बीजेपी और शिव सेना ने मिलकर चुनाव लड़ा, जिसमें बीजेपी को 105 सीटें और शिव सेना को 54 सीटें हासिल हुईं।

राफेल पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय राहुल ही नहीं, एक पूरे गिरोह के मुंह पर तमाचा है!

राहुल के साथ-साथ वामपंथी गिरोह के कुछ पत्रकारों और तथाकथित बुद्धिजीवियों ने भी राहुल द्वारा झूठ की बुनियाद पर उठाए गए इस मामले में तरह-तरह के दुष्प्रचारों को हवा देने का काम किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अब एकबार पुनः उन सभी के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने राफेल को लेकर राहुल गांधी को डांट पिलाई थी

कांग्रेस के वास्तविक राजनीतिक चरित्र को ही दिखाता है चौरासी का सिख विरोधी दंगा!

यही नवम्बर महीने के शुरूआती दिन थे और साल था 1984, जब राजधानी दिल्ली की सड़कों पर मौत का तांडव मचा कर करीब 3 हजार सिखों का कत्लेआम कर दिया गया। कुछ दिनों बाद इंदिरा के बेटे राजीव गांधी ने जैसे इस नरसंहार को जायज ठहराते हुए कहा कि जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।

कांग्रेस आलाकमान के लिए शुभ संकेत नहीं हैं हरियाणा-महाराष्ट्र के चुनावी नतीजे

2014 के लोक सभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से ही कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ आवाज उठनी शुरू हो गईं थी लेकिन चाटुकार संस्‍कृति के हावी होने के कारण विरोध की आवाज दब गई। जिन नेताओं ने बागी तेवर दिखाया उन्‍हें बाहर का रास्‍ता दिखा दिया गया। इसके बाद कई राज्‍यों में कांग्रेस को करारी हार का सामना पड़ा लेकिन हाईकमान संस्‍कृति के खिलाफ बोलने का दुस्साहस बहुत कम कांग्रेसियों ने दिखाया।

एग्जिट पोल में महाराष्ट्र-हरियाणा में फिर भाजपा सरकार, विपक्ष की हालत पस्त

सबसे पहले ये बता देना ज़रूरी है कि एग्जिट पोल्स नतीजे नहीं होते, नतीजों के रुझान भर होते हैं। इसी लिहाज़ से हरियाणा और महाराष्ट्र के नतीजों को भी देखा जाना चाहिए, जहाँ विधानसभा के लिए संपन्न हुए चुनाव में विपक्ष की हालत लचर ही दिख रही है। अभी तक जितने भी एग्जिट पोल्स आये हैं, उनका इशारा साफ़ है कि विपक्ष का प्रदर्शन पहले के मुकाबले और ज्यादा गिरा है।

जिम्मेदार विपक्ष की तरह व्यवहार करना कब सीखेगी कांग्रेस?

नोटबंदी 2016 में हुई थी और जीएसटी 2017 में पारित हुआ। इन दोनों निर्णयों के बाद हुए ज्यादातर राज्यों के चुनावों सहित इस वर्ष हुए लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस खासकर उसके युवराज राहुल गांधी ने इसे खूब मुद्दा बनाया। राफेल का राग भी गाया गया। लेकिन इन मुद्दों का कोई असर नहीं रहा और अधिकांश चुनावों में भाजपा को विजय प्राप्त हुई। लोकसभा चुनाव में तो पार्टी ने

सिमटते दायरे के बावजूद आत्‍ममंथन से कतराती कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी आज अपने अस्‍तित्‍व के लिए संघर्ष कर रही है। 2017 में जब राहुल गांधी कांग्रेस अध्‍यक्ष बने थे तब देश को उम्‍मीद थी कि अब कांग्रेस में एक नए युग का सूत्रपात होगा और पार्टी पुरानी सोच से आगे बढ़ेगी। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली करारी शिकस्‍त के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्‍यक्ष पद से त्‍यागपत्र दे दिया

राफेल के शस्त्र पूजन का विरोध कांग्रेस की अभारतीय वैचारिकता का ही सूचक है

भारत में विजयदशमी पर शस्त्र-पूजन की प्राचीन परम्परा रही है, अतः फ़्रांस में ही राजनाथ सिंह ने सिन्दूर से ओम बनाकर तथा नारीयल-कलावा आदि चढ़ाकर राफेल का शस्त्र-पूजन किया। साथ ही पहियों के नीचे नींबू रखा गया। ये सब भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के व्यवहार थे, जिनका अबकी पहली बार विदेशी धरती पर भी निर्वहन करके रक्षा मंत्री ने देश का सीना चौड़ा किया है।

हरियाणा-महाराष्ट्र चुनाव : नेतृत्व से लेकर संगठन तक बदहाली से जूझती कांग्रेस

हरियाणा कांग्रेस चौराहे पर खड़ी है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, पार्टी में और अधिक खामियां व अंतर्कलह सतह पर आ रही है।  हरियाणा कांग्रेस के पूर्व प्रमुख अशोक तंवर ने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी है। इस्तीफे के बाद उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर कई गंभीर सवाल उठाए। उनके इस रुख से कांग्रेस पार्टी की रही सही उम्मीदों को पलीता लग सकता है।