किसान

जवानों और किसानों को मजबूती देते हुए आत्मनिर्भर भारत की राह पर बढ़ रही मोदी सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू से ही लाल बहादुर शास्त्री जी के ‘जय जवान जय किसान’ के नारे को चरितार्थ करने का संकल्प लिया हुआ है।

केंद्र सरकार की नीतियों का हो रहा सकारात्‍मक असर, देश की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा प्रभाव

लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को गति देने और आम लोगों को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए जो प्रयास किए गए थे, अब उनका असर दिखने लगा है।

मोदी सरकार के हालिया सुधारों से होगा कृषि क्षेत्र में नए युग का सूत्रपात

मोदी सरकार ने नवीन कृषि सुधारों को लागू करने के लिए ‘कृषक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्द्धन एवं सुविधा) अध्‍यादेश 2020’ को अधिसूचित किया है। इसके तहत अब किसान बिचौलियों के बिना सीधे अपनी उपज बेच सकेंगे।

नए क्रांतिकारी आर्थिक सुधार कार्यक्रम से कृषि क्षेत्र को लगेंगे पंख

अभी हाल ही में केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कृषि क्षेत्र के विकास हेतु जिस 11 सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की गई है वह कृषि क्षेत्र के लिए एक विशाल परिवर्तक के तौर पर सिद्ध होने जा रहा है एवं इसके कारण कृषि क्षेत्र में निजी निवेशक अपने निवेश को बहुत भारी मात्रा में बढ़ा सकेंगे

कोरोना से जंग में योगी सरकार के कार्य अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक हैं

लॉक डाउन की शुरुआत के समय से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपदा राहत अभियान शुरू कर दिया था। उन्होंने गरीबों को राशन, भरण पोषण भत्ता, कम्युनिटी किचेन, प्रवासी श्रमिकों व विद्यर्थियो की वापसी, आश्रय स्थलों के निर्माण, कोरोना जांच व इलाज के लिए अस्पतालों में विशेष व्यवस्था आदि की दिशा अनेक कारगर कदम उठाये हैं।

आधुनिक कृषि बाजार के विकास की दिशा में प्रयासरत है मोदी सरकार

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने एक बार कहा था कि “सब कुछ इंतजार कर सकता है, लेकिन खेती नहीं”। दुर्भाग्‍यवश खेती की दुर्दशा उन्‍हीं के कार्यकाल में शुरू हो गई लेकिन उसकी मूल वजहों की ओर ध्‍यान नहीं दिया गया। इसके बाद हरित क्रांति, श्‍वेत क्रांति, पीली क्रांति जैसे फुटकल उपाय किए गए।

कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण में जुटी मोदी सरकार

केंद्र सरकार इस समय किसानों की आय को वर्ष 2022 तक दुगना करने के उद्देश्य से मिशन मोड में कार्य कर रही है। हाल ही में संसद में प्रस्तुत किए गए केंद्रीय बजट में भारतीय कृषि के आधुनिकीकरण हेतु कई उपायों की घोषणा की गई है। केंद्रीय बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 16-सूत्रीय  कार्ययोजना पर बल दिया है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को संसद के पटल पर बजट-2020-21 प्रस्तुत किया। इस बजट में समाज के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुँचने की नीतिगत मंशा दिखाई देती है। यूँ तो यह बजट सबके लिए कुछ न कुछ लेकर आया है, फिर भी इसे मुख्यतः किसान केन्द्रित कहा जा सकता है।

मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में जुटी मोदी सरकार

इस साल स्‍वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण अनुकूल खेती पर जोर देते हुए रासायनिक उर्वरकों-कीटनाशकों के उपयोग को धीरे-धीरे कम करने और अंतत: इनका इस्‍तेमाल बंद करने का आह्वान किया। उन्‍होंने कहा कि एक किसान के रूप में हमें धरती को बीमार बनाने का हक नहीं है। 

शून्य बजट प्राकृतिक कृषि से आत्मनिर्भर होंगे किसान

इस तकनीक से खेती-किसानी करने की लागत लगभग शून्य होती है। वित्त वर्ष 2018-19 की आर्थिक समीक्षा में इसे छोटे किसानों के लिए आजीविका का एक आकर्षक विकल्प बताया गया है। अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह कृषि पद्धति नवोन्मेषी है, जिसके जरिये वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी की जा सकती है।