कोरोना वायरस

दवा उद्योग के क्षेत्र में विकसित देश भी अब भारत पर निर्भर

विश्व के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी एवं भारतीय जनता का अभी हाल ही में आभार प्रकट किया है क्योंकि भारत ने अमेरिका को कोरोना वायरस को नियन्त्रित करने हेतु हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन नामक दवा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कराई हैं। यह दवा ब्राज़ील एवं श्रीलंका के साथ ही विश्व के कई अन्य देशों को भी उपलब्ध कराये जाने पर इन देशों के राष्ट्रपतियों ने भी भारत का आभार जताया है।

विज्ञान ही नहीं, अध्यात्म के जरिये भी कोरोना से लड़ रहा भारत

शक्ति कोई भी हो दिशाहीन हो जाए तो विनाशकारी ही होती है लेकिन यदि उसे सही दिशा दी जाए तो सृजनकारी सिद्ध होती है। शायद इसीलिए प्रधानमंत्री ने 5 अप्रैल को सभी देशवासियों से एकसाथ दीपक जलाने का आह्वान किया जिसे पूरे देशवासियों का भरपूर समर्थन भी मिला। जो लोग कोरोना से भारत की लड़ाई में प्रधानमंत्री के इस कदम का वैज्ञानिक उत्तर खोजने में लगे हैं वे

‘संकट की इस घड़ी में हर तरह से देश के नागरिकों के साथ खड़ी है मोदी सरकार’

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप से आम जनता को बचाने के लिए केंद्र एवं राज्‍य सरकारें हर संभव प्रयास कर रही हैं। राजधानी दिल्‍ली एवं इससे सटे नोएडा में गत दो-तीन दिनों से बड़ी संख्‍या में मजदूरों का पलायन जारी था। इनमें से अधिकांश लोग किसी अफवाह के चलते बाहर निकल आए थे। अधिकांश का कहना था कि उनके मकान मालिक उनके किराये को लेकर परेशान कर

कोरोना संकट की रोकथाम के लिए सभी मोर्चों पर तत्परतापूर्वक कदम उठा रही सरकार

पूरे विश्‍व में कोरोना संक्रमण के मामले लगातर बढ़ रहे हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि चिकित्‍सा सुविधाओं के मामले में दुनिया भर में मानक स्‍थापित करने वाले इटली, स्‍पेन, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे विकसित देशों पर कोरोना कहर बरपा रहा है। दरअसल ये देश कोरोना संक्रमण के दूसरे व तीसरे चरण की भयावहता का अनुमान लगाने में विफल रहे। गौरतलब है कि जिन

कोरोना राहत पैकेज : लॉकडाउन में गरीबों और अर्थव्यवस्था के हितों को सुरक्षित रखने की पहल

कोरोना वायरस मानव अस्तित्व के लिये आज एक बड़ा खतरा बन गया है, जिससे बचने के उपाय फिलहाल बहुत ही कम दिख रहे हैं। सुधारात्मक उपायों को देर से अमलीजामा पहनाने वाले देशों को धीरे-धीरे यह अपनी चपेट में ले रहा है। सुधारात्मक उपाय नहीं करने पर इसका प्रकोप क्रमिक रूप से आगे बढ़ता है। पहले चरण में यह लोगों को गंभीर नहीं लगता है, लेकिन दूसरे चरण

जनता कर्फ्यू : यह कोरोना से बचाव ही नहीं, आपदा में देश की एकजुटता का प्रमाण भी है

कोरोना वायरस के रूप में आज मानवता के समक्ष एक वैश्विक संकट आन खड़ा हुआ है। जहां दुनिया भर के देश इससे जूझ रहे हैं, वहीं भारत में इस वायरस के संक्रमितों की संख्‍या बढ़ती जा रही है। इस महामारी के खतरे से बचाव के लिए आज 22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता कर्फ्यू का आह्वान किया है। मोदी ने दो दिन पहले राष्‍ट्र के नाम दिए संदेश में पूरे देश से यह अपील

तीन मोर्चों पर कोरोना से लड़ रही मोदी सरकार, नागरिकों की भी है बड़ी जिम्मेदारी

कोरोना विश्वव्यापी संकट है। इससे प्रभावित देश अपने अपने तरीके से बचाव का प्रयास कर रहे हैं। अमेरिका सहित कई देशों ने स्वास्थ्य आपात काल लागू किया है। इधर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साथ तीन मोर्चो पर कार्य कर रहे हैं। उंन्होने विश्व समुदाय को साझा रणनीति बनाने का सुझाव दिया। यह वादा किया कि भारत इसमें अपनी भूमिका का निर्वाह करेगा। दूसरा

कोरोना वायरस के प्रतिकूल प्रभाव से बची रहेगी भारतीय अर्थव्यवस्था

देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पर चर्चा के दौरान कहा था कि अर्थव्यवस्था के बुरे दिन अब ख़त्म होने वाले हैं और सुधार के संकेत अब साफ़ दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने उस समय सुधरती वैश्विक परिस्थितियों का हवाला दिया था। जनवरी 2020 में क्रय विनिर्माण सूचकांक (PMI) में जो उछाल आया है वैसा पिछले 8 सालों में देखने में नहीं आया है।