कोरोना

बुनियादी ढांचे के एकीकृत विकास से अर्थव्यवस्था को गति देने में जुटी मोदी सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुनियादी ढांचे को मजबूत करके आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने और रोजगार पैदा करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

नरेंद्र मोदी : परिश्रम, पुरुषार्थ, त्याग और सेवा का दुर्लभ दृष्टांत प्रस्तुत करने वाले राजनेता

नरेंद्र मोदी जब कहते हैं कि राजनीति उनके लिए सत्ता व सुविधा की मंजिल नहीं, सेवा का माध्यम रही है तो उनका यह वक्तव्य अतिरेकी या अविश्वसनीय नहीं लगता। 

कंगना से बदला लेना छोड़ कोरोना से बेहाल महाराष्ट्र की चिंता करें उद्धव ठाकरे

जिस प्रकार से बीएमसी ने कंगना का ऑफिस तोड़ा है, वह सरकारी कार्यवाही कम और असामाजिक तत्‍वों की करतूत अधिक मालूम होती है।

कोरोना की आपदा को अवसर बनाने में कामयाब रही मोदी सरकार

इसके साथ-साथ उद्यमियों से सीधा संवाद स्‍थापित कर उनकी कठिनाईयां दूर की गईं।

प्रवासी मजदूरों के लिए संजीवनी सिद्ध हो रहा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान

गरीब कल्याण रोजगार का ऑनलाइन वेब पोर्टल बनाया गया है। यह वेब पोर्टल प्रवासी मजदूरों एवं कामगारों को इस अभियान की जिलावार जानकारी प्रदान करता है।

कोरोना संकट : अमित शाह के कुशल प्रबंधन से संभलने लगे दिल्ली के हालात

जून में जिस तरह से मामलों में बढ़ोत्‍तरी हो रही थी, उसे देखकर अनुमान लगाया जा रहा था कि जुलाई के अंत तक आंकड़े साढ़े 5 लाख के पार जा सकते हैं। लेकिन प्रशासन अमित शाह के हाथ में आते ही आंकड़ों का ग्राफ संभलता दिखने लगा।

श्रमिकों के लिए भी आपदा को अवसर बनाने में जुटी सरकार

सरकार अब श्रमिकों को उनके हुनर, दक्षता और जानकारी के आधार पर स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया करा रही है। यह श्रमिकों के लिए आपदा में अवसर की तरह ही है।

देश याद रखेगा कि संकटकाल में जब सरकार श्रमिकों के साथ खड़ी थी, विपक्ष संकीर्ण सियासत में लगा था

जब पूरा देश कोरोना संकट से उपजी चिंताओं एवं चुनौतियों में घिरा था तब कुछ राज्य सरकारें अपनी राजनीति में व्यस्त थीं, उन्हें न तो भूखे पेट सो रहे श्रमिकों की चिंता थी न ही बिना दूध के रोते बच्चों को। इन राज्यों को पैदल चल रहे श्रमिकों के पैरों के छाले नहीं दिखे लेकिन

स्वामी विवेकानंद की दृष्टि में ‘आत्मनिर्भर भारत’

पश्चिम के अपने प्रथम प्रवास (1893-97) के दौरान स्वामीजी ने पश्चिम का भारत की तरफ देखने का  नजरिया ही बदल दिया। भारत को उस समय सपेरों का, दासों का और अंधविश्वासियो का देश माना जाता था जो सालो से विदेशियों द्वारा गुलाम रहा हो।

दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य की नहीं, केवल विज्ञापन की क्रांति हुई है – कपिल मिश्रा

नेशनलिस्ट ऑनलाइन से बातचीत के दौरान युवा भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने केजरीवाल सरकार की विफलताओं को तथ्यों-तर्कों के साथ रेखांकित किया, वहीं अमित शाह द्वारा लिए गए निर्णयों को दिल्ली की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।