चीन

कांग्रेस सरकारों की उपेक्षा का नतीजा है भारत-चीन सीमा विवाद

देखा जाए तो आज जो स्‍थिति बनी है वह कांग्रेसी सरकारों की लंबे अरसे की उपेक्षा का नतीजा है। इसी को देखते हुए 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही नरेंद्र मोदी ने चीन सीमा से लगते इलाकों में सड़क और दूसरी आधारभूत परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी

भारत सहित विश्व व्यापार पर कैसा होगा कोरोना संकट का प्रभाव ?

भारत में परिस्थितियाँ, अन्य विकासशील देशों की तुलना में, थोड़ी अलग हैं।  भारत में एक बहुत बड़ा बाज़ार उपलब्ध है। स्थानीय स्तर पर निर्मित किए जाने वाले विभिन्न उत्पादों को आसानी से भारत में ही खपाया जा सकता है। भारत को आर्थिक विकास के सम्बंध में बहुत अधिक चिंता करने की शायद आवश्यकता नहीं है।

कोरोना संकट के इस कठिन काल से और मजबूत होकर निकलेगा भारत!

एक तरफ जहां पड़ोसी चीन इस आपदा का व्यापारिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु अनुचित इस्तेमाल करने से नहीं चूक रहा, दूसरी तरफ भारत ने कोरोना से लड़ाई में केवल अपनी रक्षा ही नहीं की है, अपितु विश्व के अन्य देशों को भी सहयोग दिया है।

एफडीआई नियमों में ताजा बदलाव से होगी भारतीय हितधारकों की रक्षा

उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के अनुसार कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों में 18 अप्रैल से बदलाव किया गया है। नए प्रावधानों से भारत के साथ सीमा साझा करने वाले किसी भी पड़ोसी देश को भारत में निवेश करने के लिए भारतीय सरकार से अनुमति लेनी होगी।

कोरोना से लड़ाई में फ़ेक न्यूज़ फैलाने में जुटे वैचारिक गिरोह से सावधान रहने की जरूरत

पूरी दुनिया के साथ हमारा देश भी वर्तमान समय में एक मुश्किल दौर से गुज़र रहा है। ऐसे मुश्किल दौर में हम सभी को एक ज़िम्मेदार नागरिक होने का परिचय देते हुए देश के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। सरकार द्वारा ज़ारी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए हम अपने ज़िम्मेदार होने का सबूत दे सकते हैं।

कोरोना संकट से निपटने के लिए मोदी के नेतृत्व में विश्व को राह दिखाता भारत

संपूर्ण विश्व इस समय वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से जूझ रहा है। कोरोना वायरस संपूर्ण मानवता के लिए एक बड़े संकट के तौर पर उभर कर आया है जिससे सफलतापूर्वक निपटने का कोई ठोस समाधान अभी तक सामने नहीं आ पाया है । कोरोना वायरस ने न केवल जनसामान्य के लिए स्वास्थ्य का संकट खड़ा किया है

कोरोना से लड़ाई में विश्व के सबसे बेहतर नेता सिद्ध हो रहे मोदी

पूरी दुनिया पहली बार विषाणुजनित महामारी के बहुत बड़े संकट से जूझ रही है। अमेरिका और चीन जैसे देश पस्त हो चुके हैं। लेकिन पूरी दुनिया की नजर एक ही शख्स पर है। लोग उम्मीद लगाये बैठे थे कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस महामारी से कैसे निपटते हैं। संतोषजनक है कि मोदी अबतक इस विषय में एकदम सजग और तत्परतापूर्वक निर्णय लेने वाले प्रधानमंत्री सिद्ध हुए हैं।

कोरोना वायरस के प्रतिकूल प्रभाव से बची रहेगी भारतीय अर्थव्यवस्था

देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पर चर्चा के दौरान कहा था कि अर्थव्यवस्था के बुरे दिन अब ख़त्म होने वाले हैं और सुधार के संकेत अब साफ़ दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने उस समय सुधरती वैश्विक परिस्थितियों का हवाला दिया था। जनवरी 2020 में क्रय विनिर्माण सूचकांक (PMI) में जो उछाल आया है वैसा पिछले 8 सालों में देखने में नहीं आया है।

‘चार महीने में नहीं सुधरा तो ब्लैकलिस्ट होगा पाकिस्तान’

सरहद पर भारतीय जवानों द्वारा जहां पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा है, वहीं वैश्विक मंचों पर भारतीय कूटनीति ने उसकी हालत खराब कर रखी है। गौरतलब है कि जून, 2018 में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) द्वारा पाकिस्तान को आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए ग्रे सूची में डाला गया था। इसके बाद से अक्टूबर 2018 और फरवरी 2019 में हुए रिव्यू में भी पाक को राहत नहीं मिली थी।

मोदी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाने वालों पर तमाचा है अजहर पर वैश्विक प्रतिबंध

यह देश के हर नागरिक के लिए गर्व की बात है कि चार बार खारिज हो चुके प्रस्‍ताव को आखिर अब जाकर मंजूरी मिली। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्य देशों (स्थायी-अस्थायी) का समर्थन जुटाना बहुत बड़ी उपलब्धि है जो कि भारत की कूटनीतिक क्षमता को दर्शाती है।