जंगलराज

लालू-राबड़ी शासनकाल के किन-किन गुनाहों के लिए माफी मांगेंगे तेजस्‍वी यादव!

इन दिनों बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और लालू-राबड़ी यादव के पुत्र तेजस्‍वी यादव सूबे में घूम घूम कर जनता से माफी मांग रहे हैं। दरअसल तेजस्‍वी यादव यह माफीनामा लालू-राबड़ी के कुशासन के अपराधबोध से ग्रस्‍त होकर नहीं मांग रहे हैं।

भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुके हैं लालू यादव

लालू कोई गरीबों और मजलूमों की सामाजिक और आर्थिक तरक्की का धर्मयुद्ध नहीं लड़ रहे हैं। लालू का मकसद सिर्फ इतना है कि गैर कानूनी तौर पर इकठ्ठा किये हुए धन को कानून की नज़रों से कैसे छुपा लिया जाए। इस कारण जब से लालू यादव के परिवार के खिलाफ सीबीआई ने सख्ती बरती है, तो ध्यान भटकाने के उद्देश्य से लालू इसे सियासी रंजिश का नाम देकर बड़ा सियासी वितंडा

क्या बिहार में अब क़ानून का राज नहीं, राजद कार्यकर्ताओं का जंगलराज चलेगा ?

विगत दिनों सीबीआई ने लालू यादव के कई ठिकानों पर छापेमारी की, जिसके बाद बौखलाए राजद कार्यकर्ताओं ने इसे भाजपा सरकार की बदले की कार्रवाई बताते हुए भाजपा के पटना कार्यालय पर हमला कर दिया। यह लोकतंत्र के लिए बेहद शर्मनाक है। किसी भी बड़े राजनेता के घर पर छापा पड़ना कोई नई बात नहीं है। कोर्ट (न्यायपालिका) ने न जाने कितनी बार नेताओं को झटका दिया है।

सत्ता के लोभ में लालू के जंगलराज को शह दे रहे नीतीश

जेल के अन्दर की दुनिया उतनी अँधेरी और मनहूस नहीं होती बशर्ते कि आपके पास पैसा हो, रसूख हो और बाहर आपका गॉडफादर बैठा हो। सियासत और अपराध का ऐसा घालमेल हमें बिहार से अच्छा सिर्फ फिल्मों में ही देखने को मिल सकता है, जहाँ जेल का बड़ा अधिकारी, पुलिस अफसर, माफिया डॉन और नेता मिलकर अपना एकछत्र साम्राज्य चलाते हैं।

काटजू के बयान से ज्यादा ‘जंगलराज’ से शर्मिंदा होता है बिहार, नीतीश जी!

नेताओं के लिए बड़ा आसान होता है कि कोई भावनात्मक मुद्दा पकड़ लो और तुरंत अपने को राज्य और लोगों का हितैषी साबित कर दो। वो भी बिना कुछ किए धरे। यह सियासत का वह शॉर्टकट है, जिसे अपनाकर ज़मीन से कटे और जनता की नज़रों से गिरे हुए नेता भी चमक जाते हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस शॉर्टकट के पुराने खिलाड़ी हैं। जब-जब उनकी छवि पर ग्रहण लगता है और उनके अस्तित्व पर

सत्ता के लोभ में ‘जंगलराज’ के सामने हथियार डाल दिए हैं नीतीश!

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल तक ‘सुशासन बाबू’ के तौर पर पहचाने जाते थे, लेकिन अब उनकी यह छवि पीछे छूटने लगी है। बिहार में अब सुशासन की चर्चा नहीं, अपराध की बहार है। शहाबुद्दीन की वापसी ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि बिहार में अपराध पर लगाम लगाने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नाकामयाब साबित हो रहे हैं। बिहार सरकार में शामिल राजद के विधायकों/मंत्रियों ने जिस तरह

‘सुशासन’ के मुंह पर ‘जंगलराज’ का झन्नाटेदार तमाचा

यह लेखक जिस वक्त और जहां बैठकर यह बातें टाइप कर रहा है, उसके ठीक एक दिन पहले इस जगह से केवल दो किमी दूर, राजधानी पटना में सरेशाम एक प्रेस फोटोग्राफर के बेटे को गोली मार दी गयी है। उसी दिन दो और हत्याएं महज पांच किलोमीटर के दायरे में हुई हैं। इसी ख़बर

फिर जंगलराज के साये में बिहार

उमेश चतुर्वेदी यह संयोग ही है कि छह मई को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दावा किया कि उनकी बहुचर्चित शराबबंदी योजना से राय में अपराध की घटनाओं में 27 फीसद की कमी आ गई, इसके ठीक दो दिन बाद उनके ही एक एमएलसी के बेटे ने महज रास्ता ना देने के चलते एक