जयप्रकाश नारायण

‘आपातकाल के विरोध में उठा हर स्वर वंदन का अधिकारी है’

आपातकाल के दौरान मैं बक्सर व आरा की जेल में बंद रहा था। वो संघर्ष और यातना का दौर था। उस समय मेरे जैसे लाखों युवा देश की विभिन्न जेलों में बंद थे।

इंदिरा गांधी ने अचानक नहीं लगाया था आपातकाल, ये उनकी सोची-समझी चाल थी!

आपातकाल लगाने की योजना एक सोची समझी चाल थी, इसका खुलासा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे के पत्र में आपातकाल लगाने से छह महीने पहले ही हो गया था। यह चिट्ठी तभी के कानून मंत्री ए. आर. गोखले और कांग्रेस के कई नेताओं के देखरेख में ड्राफ्ट की गई थी। इंदिरा गाँधी ने अपने एक साक्षात्कार में ज़िक्र भी किया था कि इस देश को ‘शॉक ट्रीटमेंट’ की ज़रुरत है।

इक्कीसवीं सदी के सबसे बड़े नेता के तौर पर प्रतिष्ठित होते नरेंद्र मोदी

महात्मा गांधी जननेता के रूप में एक ऐसा आदर्श रहे हैं, जिसके नज़दीक पहुँचना भी उनके बाद के किसी नेता के लिए सम्भव न हो सका। अब नरेंद्र मोदी ‘गांधी के बाद कौन’ वाले सवाल का जवाब बनने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर और फिर देश के प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने अपना व्यक्तित्व नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया है।

जेपी ने कहा था कि अगर संघ फासीवादी है तो जेपी भी फासीवादी हैं!

लोकनायक जय प्रकाश नारायण के बारे में आम तौर पर कहा जाता है कि वे शुरूआती दौर में रूस की क्रान्ति से प्रभावित थे। फिर गांधीवाद से प्रभावित होते हुए समाजवाद का रुख किये। जेपी के तीन हिस्से तो पहले ही कहे जा चुके है, जिसमे जेपी का रूसी क्रान्ति से प्रभावित होना एवं फिर गाँधी के सानिध्य में आकर सत्य और अहिंसा की प्रवृति में घुल मिल जाना फिर समाजवाद का रुख करना, इत्यादि कई तथ्य हैं !