डॉ. आंबेडकर

डॉ. भीमराव आंबेडकर : भारत की सामाजिक समरसता के शिल्पकार

समाज को समरसता के सूत्र में पिरोकर उसे संगठित और सशक्त बनाने वाले महानायकों में एक हैं डॉ. भीमराव आंबेडकर। भारत के संविधान को बनाने, गढ़ने वाले डॉ. आंबेडकर यानि वह विभूति जो आने वाले युग की झलक भांपकर देश को उसके अनुसार बढ़ने की प्रेरणा देती रही। ऐसे प्रखर राष्ट्रभक्त, युगदृष्टा के 130वें जयंती वर्ष पर उन्हें व उनके चिंतन को,

संविधान दिवस : सिर्फ अधिकार नहीं, मौलिक कर्तव्यों के प्रति भी सजग हों नागरिक

संविधान दिवस वस्तुतः कर्तव्य बोध का अवसर होता है। देश को संविधान के अनुरूप चलाने में जन सामान्य का भी योगदान रहता है, उनकी भी इसमें भूमिका होती है। इसीलिए भारतीय संविधान की प्रस्तावना हम भारत के लोग से हुई है। संविधान सभा ने 26 नवम्बर, 1949 को संविधान पारित किया। लेकिन इसे 26 जनवरी, 1950 को विधिवत लागू किया गया। यह हमारा गणतंत्र दिवस हुआ।

बाकी दलों ने तो बस राजनीति की, बाबा साहेब का असल सम्मान भाजपा ने ही किया है !

यह मानना होगा कि देश में ऐसे कई कार्य थे, जिन्हें कई दशक पहले हो जाना चाहिए था। लेकिन, उन्हें नरेंद्र मोदी की सरकार ने पूरा किया। नई दिल्ली में डॉ. आंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक का निर्माण भी ऐसे ही कार्यो में शामिल था। इसकी कल्पना को दो दशक से ज्यादा समय बीत गया था। अटल बिहारी बाजपेयी सरकार ने इसकी व्यवस्था की थी।  लेकिन, उनके हटते ही इस पर कार्य ठप्प हो गया। उसके बाद दस वर्ष तक उनकी