दलित

अंबेडकर के विचारों को सही मायने और संदर्भों में आत्मसात करना ज़रूरी

बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर अपने अधिकांश समकालीन राजनीतिज्ञों की तुलना में राजनीति के खुरदुरे यथार्थ की ठोस एवं बेहतर  समझ रखते थे।

एक दलित नेता से ज्यादा राष्ट्र निर्माता हैं डॉ अंबेडकर

आज के दिन 14 अप्रैल 1891 को बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर का जन्म हुआ।  बाबा साहब ने अपने उच्च आदर्शों के सामने कभी भी अपनी विशिष्ट छवि की चिंता नहीं की।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के वंचितों को मोदी सरकार से मिला न्याय

अब जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के अनुसूचित जातियों और जनजातियों को केन्द्रीय कानून के आधार पर आरक्षण का लाभ मिल सकेगा जिससे उन्हें काफी राहत मिलने वाली है और उनके सशक्तिकरण में यह मील का पत्थर साबित होने वाला है।

दलितों के उत्थान की आड़ में धर्मान्तरण का खुला खेल, वामपंथी भी हैं शामिल!

यदि हम भारत में धर्मान्तरण के मुद्दे को लेकर गम्भीर हैं तो हमें सुनील सरदार और जोसेफ डिसूजा का नाम जानना चाहिए। सुनील सरदार महाराष्ट्र से हैं और ट्रूथसिकर्स इंटरनेशनल के नाम से एक गैर सरकारी संस्था चलाते हैं। यह धर्मान्तरण का भारत में बड़ा खिलाड़ी है। सुनील सरदार घोषित तौर पर धर्मान्तरण के माध्यम से भारत में जिसस का किंगडम स्थापित करना चाहता है।

दलित-मुस्लिम गठजोड़ की सियासी चाल को समझना होगा!

कुछ मुस्लिम राजनेताओं ने आजकल दलितों को मुसलमानों के साथ आने का न्योता दिया है। उनका दावा है कि वे जब मुसलमानों के साथ आ जाएंगे तो हिंदुओं की हिम्मत नहीं है कि उनका बाल भी बांका कर सकें। पर जो मुस्लिम नेता इतनी बहबूदी हांकते हुए दलितों को अपने साथ आने के लिए मनुहार कर रहे हैं, उनके अपने समाज में दलितों की क्या कद्र है, इसका नमूना भी वे जान लें तो बेहतर रहे।