दिग्विजय सिंह

हिंदू धर्म को बदनाम करने वाले बयानों के लिए दिग्विजय पर कार्रवाई क्यों नहीं करती कांग्रेस?

अपने बड़बोले बयानों से अक्सर नकारात्मक चर्चा में रहने वाले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को भारतीय राजनीति के उस धड़े के मुखिया के तौर पर देखा जाना चाहिए, जिन्हें बगैर कोई विवादित टिप्पणी किये चैन की नींद नहीं आती। यह सर्वविदित है कि अपने बयानों से दिग्विजय सिंह प्राय: अपनी और पार्टी की फजीहत कराते रहते हैं, किन्तु ताज्जुब इस बात का है कि कांग्रेस घोर विवादित बयानों के बाद भी उनपर कोई कार्यवाही नहीं करती है।

पाकिस्तान परस्त भाषा बोल रहे कांग्रेसियों पर राहुल गांधी के मौन का मतलब क्या है?

कांग्रेस के नेताओं द्वारा एयर स्ट्राइक पर जिस तरह से पाकिस्तान के प्रवक्ता जैसी भूमिका निभाई जा रही, उसपर कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व मौन है। कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई तो दूर इन नेताओं को एक चेतावनी तक नहीं दी गयी है। फिर यह सवाल उठाना जायज है कि क्या इन बयानों को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौन स्वीकृति मिली हुई है?

एयर स्ट्राइक : जो भाषा पाकिस्तान बोल रहा, वही हमारे विपक्षी नेता भी बोल रहे हैं!

भारत की एयर स्ट्राइक की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी। पाकिस्तान में भी हड़कंप मचा। शीर्ष कमांडरों की लगातार बैठक चली। प्रधानमंत्री इमरान  पर भारी दबाब पड़ रहा था। यही कारण था कि पाकिस्तान ने भारत पर हमले के लिए एफ-16 लड़ाकू विमान भेजा था। पाकिस्तान के कई आतंकी सरगना भी  हमले का रोना रो रहे थे।

अपने नेताओं की भाषाई अभद्रता पर कांग्रेस आलाकमान के मौन का मतलब क्या है ?

इस हफ्ते कॉलम की शुरुआत एक सच्ची कहानी से करता हूँ। स्वामी विवेकानंद एक बार सत्संग में भगवान के नाम का महात्म्य बता रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने कहा “शब्दों में क्या रखा है, आप बार बार उन्हें रटने को क्यों कहते हैं? इसका भला क्या फायदा?’’ स्वामी जी ने उस व्यक्ति की बात सुनी और अचानक ही उसे मूर्ख, गधा जैसे अपशब्द कहने लगे. सामने वाला व्यक्ति आगबबूला हो गया और

राजनीतिक जमीन के साथ-साथ बोलने की तमीज भी खोती जा रही है कांग्रेस !

कांग्रेस के उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने महिला पत्रकार गौरी लंकेश हत्‍याकांड के मामले पर बयानबाजी करने में जिस प्रकार की जल्‍दबाजी दिखाई व बड़बोलापन प्रकट किया उससे उनकी राजनीतिक नासमझी पर मुहर ही लगी है। उन्‍होंने इस मामले का पूरी तरह राजनीतिकरण करते हुए भाजपा व आरएसएस पर आधारहीन होकर आरोप लगाए। उन्‍होंने कहा कि भाजपा व आरएसएस के खिलाफ जो भी बोलता है, उस पर हमला

पस्त संगठन और मस्त नेताओं के बीच बदहाल कांग्रेस

2014 के बाद से जब भी कोई चुनाव होता है और उसमें कांग्रेस को हार मिलती है तो राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े होने लगते हैं । राजनीतिक विश्लेषकों के अलावा कांग्रेस के नेता भी उनके नेतृत्व को लेकर प्रत्यक्ष तौर पर तो नहीं, लेकिन संगठन की चूलें आदि कसने के नाम पर सवाल उठाने लगते हैं । इसमें कोई दो राय नहीं है कि राहुल गांधी में एक सौ तीस साल पुरानी पार्टी की अगुवाई को लेकर कोई स्पार्क

गोवा में भाजपा के सरकार गठन पर सवाल उठाने से पहले अपने अतीत में झांक ले कांग्रेस !

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद यूपी, उत्तराखण्ड और पंजाब इन तीन राज्यों में तो जनता ने पूर्ण बहुमत का जनादेश दिया; मगर, गोवा और मणिपुर में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति पैदा हो गयी। कांग्रेस इन दोनों ही राज्यों में नंबर एक दल है, लेकिन पूर्ण बहुमत के जादुई आंकड़े को नहीं छू सकी है। इन राज्यों के अन्य दल व निर्दलीय विधायक भी कांग्रेस के साथ आने के संकेत नहीं दे रहे।

भोपाल मुठभेड़ पर दिग्विजय सिंह के बड़बोले बयानों से सवालों के घेरे में कांग्रेस

एक कहावत है कि सत्य की अनदेखी वही करता है जिसे असत्य से लाभ हो। ऐसे ही एक सत्य की अनदेखी फिर देश के कतिपय सियासतदानों द्वारा की जा रही है जो जांच से पहले ही इस नतीजे पर पहुंच गए हैं कि भोपाल के केंद्रीय जेल से फरार प्रतिबंधित संगठन सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मुवमेंट ऑफ इंडिया) के आठ आतंकियों से पुलिस की हुई मुठभेड़ फर्जी है। हो सकता है कि मुठभेड़ के बाद का परिदृश्य