दिल्ली

हेमचन्द्र विक्रमादित्य : जिन्होंने बर्बर मध्यकाल में 22 लड़ाइयाँ जीतीं और दिल्ली के सम्राट भी बने

आज के दिल्ली का कुतुब मीनार क्षेत्र तुग़लकाबाद – 7 अक्टूबर 1556 को हेम चंद्र विक्रमादित्य के नाम से प्रसिद्ध हेमू विक्रमादित्य और तार्दी बेग खान के नेतृत्व में मुगल सम्राट अकबर की सेनाओं के बीच लड़ी गई एक उल्लेखनीय लड़ाई का मेजबान बन गया।

क्यों दिल्ली से मुंबई तक पलायन के नामपर जुटी भीड़ के पीछे साज़िश प्रतीत होती है?

पहले दिल्ली, अब मुंबई, फिर सूरत, उसके बाद ठाणे, इन सभी जगहों पर लगभग एक जैसे पैटर्न, एक जैसे प्रयोग; एक जैसी बातें, एक जैसी तस्वीरें देखने को मिली हैं। सवाल यह भी कि क्या भूख, बेरोजगारी या लाचारी का हौव्वा खड़ा कर रातों-रात ऐसी भीड़ एकत्रित की जा सकती है? स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी भीड़ के पीछे कुछ संगठनों और चेहरों की भूमिका की संभावनाओं को निराधार और निर्मूल नहीं सिद्ध किया जा सकता

मोदी सरकार ने किया दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों के विकास का रास्ता साफ़

यदि हम बीते दो दशकों का दौर देखें तो दिल्ली में डेढ़ दशक तक कांग्रेस का शासन रहा, उसके बाद गत 5 वर्षों से आम आदमी पार्टी सत्‍ता में है। इसके बावजूद दोनों दलों ने अनाधिकृत कॉलोनियों की दिशा में ना कुछ सोचा, ना किया। अब जब मोदी सरकार ने यह बीड़ा उठाया है तो केजरीवाल इसका श्रेय लेने की कोशिश में जुट गए हैं।

सिर्फ दिल्ली के पानी का सैम्पल ही फेल नहीं हुआ, दिल्ली की सरकार भी फेल हो चुकी है

राजधानी नई दिल्‍ली में इन दिनों पानी को लेकर खासा घमासान मचा है।  असल में, पिछले दिनों केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्‍ता मंत्रालय ने देश भर के 20 राज्‍यों को लेकर एक रैंकिंग जारी की थी। इसमें केवल राजधानियों के पानी की गुणवत्‍ता की जांच का हवाला था। दिल्‍ली का पानी इसमें सर्वाधिक प्रदूषित पाया गया। दिल्‍ली से जो 11 सैंपल लिए गए थे, वे सारे सैंपल 19 तय मापदंडों

गठबंधन के लिए कांग्रेस के आगे घुटने क्यों टेक दिए हैं केजरीवाल?

राजनीति बदलने का दावा कर सत्ता तक का सफर तय करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजनीति को तो नहीं बदल पाए, लेकिन खुद जरूर बदल गए हैं। आज केजरीवाल अपनी कही हर बात से पलटते हुए नज़र आ रहें है। हैरत इस बात की भी है कि जो केजरीवाल कभी किसी दल से  गठबंधन नहीं करने की कसमें खाते थे, आज कांग्रेस के समक्ष घुटने टेक दिए हैं

वैचारिक प्रतिबद्धताओं को छोड़ किसी भी तरह सत्ता बचाने की जुगत में जुटे केजरीवाल

भारत और पाकिस्‍तान के बीच जारी तनाव को देखते हुए भले ही दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने अनशन कार्यक्रम को स्‍थगित कर दिया हो, लेकिन उन्होंने अपनी सिकुड़ती राजनीतिक जमीन को संभालने के लिए कांग्रेस से गठबंधन की आस नहीं छोड़ी है।

‘2014 के चुनाव के समय उभरी आप 2019 के चुनाव में पूर्ण पतन की कगार पर है’

जिस कांग्रेस को केजरीवाल कोसते नहीं थकते थे, आज गठबंधन के लिए उसकी खुशामद करने में लगे हैं। इससे उनके अवसरवादी और दोमुंहे चरित्र का भी पता चलता है।

‘आप’ सरकार के दो साल : नहीं पूरे हुए वादे, ठप्प पड़ा दिल्ली का विकास

दिल्ली में आम आदमी पार्टी को सत्ता में आए दो वर्ष हो चुके हैं। इन दो वर्षों के कार्यकाल के दौरान दिल्ली की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। दो साल के कार्यकाल के आधार पर यदि केजरीवाल सरकार का मूल्यांकन करें तो बेहद निराश करने वाली स्थिति नज़र आती है। यह बात तो जगजाहिर है कि केजरीवाल के अभी तक के कार्यकाल का अधिकाधिक समय केंद्र सरकार और दिल्ली के पूर्व

दो सालों के शासन में पूरी तरह से नाकाम रही है केजरीवाल सरकार, बिगड़ी दिल्ली की हालत

विकास के नारे के साथ एक दिल्ली के मुख्यमंत्री बनाने वाले केजरीवाल की आप सरकार को दो साल का समय पूरा हो चुका है। दिल्ली के मतदाताओं को स्वच्छ राजनीति, लुभावने वादों और विकास का सब्जबाग दिखाकर केजरीवाल सत्ता तक तो पहुंच गए, लेकिन उनके कार्यकाल में विकास के नाम पर एक पत्ता भी नहीं हिला है। दो साल का समय बीता तो सिर्फ दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग और केंद्र

दिल्ली भाजपा को और मजबूती देंगे मनोज तिवारी

बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने अपने दिल्ली संगठन में एक बड़ा बदलाव करते हुए भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता, मशहूर गायक और उत्तरी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी को पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। मनोज को मौजूदा पार्टी अध्यक्ष सतीश उपाध्याय की जगह यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। मनोज तिवारी सिर्फ पूर्वांचल के लोगों में ही लोकप्रिय नहीं हैं, चूंकि वे फिल्मी दुनिया से जुड़े हुए हैं, इसीलिए हर क्षेत्र के