देशभक्ति

बिना राष्ट्रीयता का भाव उत्पन्न किए देश का उद्धार दुष्कर है : पं मदन मोहन मालवीय

राष्ट्रीयता की भावना को एक बेहद जरुरी बात मानते हुए पं मदन मोहन मालवीय ‘भारतवासी और देशभक्ति’ शीर्षक की अपनी टिप्पणी में लिखते हैं कि ‘देशभक्ति उस भक्ति को कहते है कि जिसके आगे हम अपने को भूल जायँ, देश की उन्नति ही में अपनी उन्नति समझें, देश ही के यश में अपना यश समझें, देश ही के जीवन में अपना जीवन समझें और देश ही की मृत्यु में अपनी मृत्यु समझें। भारत का उद्धार करने वाली

सदैव प्रासंगिक रहेंगे राष्ट्रवाद पर पं मदन मोहन मालवीय के विचार

भारतवर्ष का इतिहास अनगिनत घटनाओं का इतिहास है, जो इसके विविध कालखंडों की उन तमाम गाथाओं को समेटे हुए है, जिनमें जय है, पराजय है, वैभवकाल है तो कही संक्रमणकाल का लंबा दौर। भारत के इतिहास के संबंध में तमाम बातें कही जाती है लेकिन एक बात जो बेहद महत्वपूर्ण है, वह है कि जहाँ दुनिया की कई सभ्यताएं विलुप्त हो गई, भारत का अस्तित्व बरकरार रहा। तमाम मुसीबतों के बावजूद वह