निर्मला सीतारमण

गांवों के साथ-साथ शहरों में भी खुशहाली लाएगी किसान रेल

भारतीय रेलवे ने देश में एक छोर से दूसरे छोर तक ताजा सब्‍जी, फल, फूल और मछली पहुंचाने के लिए किसान रेल सेवा शुरू की है। पहली किसान रेल चल भी चुकी है।

आर्थिक सुधारों को गति देने में जुटी सरकार

सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उठाये गये नीतिगत कदमों से वित्तीय बाजार की स्थिति में कुछ सुधार आया है और बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को नकदी की किल्लत का ज्यादा सामना नहीं करना पड़ रहा है, जिससे उधारी की लागत में भी कमी आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार कोरोना महामारी

अविवेकपूर्ण निर्णयों से समस्या पैदा कर अब किस मुंह से केंद्र से मदद मांग रहे केजरीवाल ?

केजरीवाल कब क्‍या देखकर निर्णय लेते हैं, यह समझ से परे होता है। उनके बयान भी कम चौंकाने वाले नहीं होते। उन्‍होंने पिछले दिनों बड़ी अटपटी बात कही कि दिल्‍ली सरकार यहां के अस्‍पतालों में बाहरी राज्‍यों के मरीजों का इलाज नहीं करेगी।

नए क्रांतिकारी आर्थिक सुधार कार्यक्रम से कृषि क्षेत्र को लगेंगे पंख

अभी हाल ही में केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कृषि क्षेत्र के विकास हेतु जिस 11 सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की गई है वह कृषि क्षेत्र के लिए एक विशाल परिवर्तक के तौर पर सिद्ध होने जा रहा है एवं इसके कारण कृषि क्षेत्र में निजी निवेशक अपने निवेश को बहुत भारी मात्रा में बढ़ा सकेंगे

‘सरकार आमजन व अर्थव्यवस्था को बचाने में जुटी है और विपक्षी दल अपनी राजनीति चमकाने में’

कोरोना महामारी के संक्रमण के बढ़ते दायरे के साथ सरकार के प्रयासों और योजनाओं का भी दायरा बढ़ा है। मौजूदा आर्थिक, औद्योगिक और स्‍वास्‍थ्‍यगत संकट को देखते हुए केंद्र सहित राज्‍य सरकारें भी अपने स्‍तर पर अधिक से अधिक काम करने का प्रयास कर रही हैं।

आर्थिक पैकेज : आम आदमी और अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

कोरोना महामारी से उत्पन्न संकट से निपटने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा 12 मई को की जिसके बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण लगातार दो दिन से इस पैकेज के प्रावधानों और आवंटनों की जानकारी दे रही है।

एमएसएमई क्षेत्र की मजबूती से निकलेगा आत्मनिर्भर भारत का रास्ता

कृषि क्षेत्र के बाद, एमएसएमई क्षेत्र में रोज़गार के सबसे अधिक अवसर निर्मित होते हैं। 73वें राष्ट्रीय सैम्पल सर्वेक्षण के अनुसार, देश में  एमएसएमई क्षेत्र में 6.34 करोड़ इकाईयाँ कार्यरत थीं, ज़िनके माध्यम से 11.1 करोड़ व्यक्तियों (4.98 करोड़ ग्रामीण क्षेत्रों में एवं 6.12 करोड़ शहरी क्षेत्रों में) को रोज़गार उपलब्ध कराया जा रहा था।

‘संकट की इस घड़ी में हर तरह से देश के नागरिकों के साथ खड़ी है मोदी सरकार’

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप से आम जनता को बचाने के लिए केंद्र एवं राज्‍य सरकारें हर संभव प्रयास कर रही हैं। राजधानी दिल्‍ली एवं इससे सटे नोएडा में गत दो-तीन दिनों से बड़ी संख्‍या में मजदूरों का पलायन जारी था। इनमें से अधिकांश लोग किसी अफवाह के चलते बाहर निकल आए थे। अधिकांश का कहना था कि उनके मकान मालिक उनके किराये को लेकर परेशान कर

कोरोना राहत पैकेज : लॉकडाउन में गरीबों और अर्थव्यवस्था के हितों को सुरक्षित रखने की पहल

कोरोना वायरस मानव अस्तित्व के लिये आज एक बड़ा खतरा बन गया है, जिससे बचने के उपाय फिलहाल बहुत ही कम दिख रहे हैं। सुधारात्मक उपायों को देर से अमलीजामा पहनाने वाले देशों को धीरे-धीरे यह अपनी चपेट में ले रहा है। सुधारात्मक उपाय नहीं करने पर इसका प्रकोप क्रमिक रूप से आगे बढ़ता है। पहले चरण में यह लोगों को गंभीर नहीं लगता है, लेकिन दूसरे चरण

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को संसद के पटल पर बजट-2020-21 प्रस्तुत किया। इस बजट में समाज के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुँचने की नीतिगत मंशा दिखाई देती है। यूँ तो यह बजट सबके लिए कुछ न कुछ लेकर आया है, फिर भी इसे मुख्यतः किसान केन्द्रित कहा जा सकता है।