पाकिस्तान

चीनी आक्रामकता के जवाब में मोदी सरकार ने अपनाई एक्ट ईस्ट नीति!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्‍तान मामले में पाकिस्‍तान को जैसी पटखनी दी, उसकी कल्‍पना उसने सपने में भी नहीं की होगी। अब प्रधानमंत्री उसी प्रकार की पटखनी चीन को देने में जुट गए हैं। गौरतलब है कि लंबे अरसे से चीन भारत को चारों ओर से घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसके लिए वह भारत के पड़ोसी देशों को मोहरा बनाने से भी बाज नहीं आया। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण-पूर्व

मोदी सरकार की बड़ी सामरिक सफलता है लिमोआ समझौता, चीन-पाक हुए हलकान!

गत दिनों भारत और अमेरिका के बीच लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) यानी लिमोआ समझौता संपन्न हुआ। भारतीय रक्षामंत्री मनोहर पर्रीकर और अमेरिकी सुरक्षा सचिव एश्टन कार्टर ने इस समझौते पर हस्ताक्षर कर सैद्धांतिक तौर पर इसे अंतिम रूप दिया। ज्ञात हो कि बीते जून में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका गए थे, तब उसने भारत को प्रमुख रक्षा सहयोगी का दर्जा दिया था। यह

पाकिस्तान हुआ हलकान, अब सिंध मांगे सिंधुस्थान!

भारत के एक दाँव ने पाकिस्तान को चित कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गिलगित, बलूचिस्तान और पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर का मामला दुनिया के सामने लाकर न केवल पाकिस्तान को आईना दिखाया है, बल्कि पाकिस्तान के अत्याचार से पीडि़त जनमानस को साहस भी दिया है।

मोदी सरकार का आक्रामक रुख, पाकिस्तान हुआ पस्त और चीन भी हलकान!

मोदी सरकार पर सत्ता में आने के कुछ समय बाद से ही विपक्षियों द्वारा यह आरोप लगाया जाता रहा है कि इस सरकार की पाकिस्तान और चीन को लेकर कोई विदेशनीति नहीं है। हालाकि ज्यादातर ये आरोप लगाने वाली मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस शायद ये भूल जाती है कि जब वो खुद सत्ता में थी, तब देश ने पाक और चीन के प्रति उसकी भी विदेशनीति खूब देखी थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान को फटकारा और सांप देश के सेकुलरों के सीने पर लोट रहा है!

विगत दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने सर्वदलीय बैठक और उसके बाद लाल किले के…

बताइए न सोनिया मैडम, कांग्रेसी सलमान खुर्शीद पाकिस्तान के एजेंट हैं क्या ?

सलमान ख़ुर्शीद ने पिछले साल नवंबर में पाकिस्तान जाकर भारत विरोधी बयान दिया था। कहा था कि “भारत ने पाकिस्तान के अमन के पैगाम का उचित जवाब नहीं दिया। मोदी अभी नए हैं और स्टैट्समैन कैसे बना जाता है, यह उन्हें सीखना है।“ यानी मोदी से अदावत की आड़ में सलमान ख़ुर्शीद ने अपने वतन भारत को ही अमन का दुश्मन और गुनहगार बना डाला।

मोदी सरकार के कड़े रुख के आगे बेबस हुआ पाक, कहीं नहीं मिल रही शरण!

मोदी सरकार के सत्ता में आने के कुछ समय बाद से ही उसपर पाकिस्तान को लेकर नीतिहीनता का आरोप विपक्षियों द्वारा लगाया जाता रहा है। कुछेक कूटनीतिज्ञों द्वारा यह भी कहा जाता रहा है कि ये सरकार भी पिछली मनमोहन सरकार की ही तरह पाकिस्तान को लेकर भ्रमपूर्ण स्थिति में है और इसीलिए रूठने-मनाने की नीतिहीनता का शिकार है। लेकिन, पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सर्वदलीय बैठक

मोदी के बयान के बाद फिर बोला बलूचिस्तान, ‘हम लेके रहेंगे आजादी!’

एक भारतीय के नाते खबरिया चैनल पर इस तरह की बहस सुनने का यह पहला अनुभव था। जिसमें पाकिस्तान पैनलिस्ट सफकात सईद को बलूचिस्तानी पैनलिस्ट तारिक फतह कहते हैं- ‘‘तुम अपने पूर्वजो को भूल सकते हो। मैं नही भूल सकता। इस नाते मैं हिन्दूस्तानी हूं। तुम पाकिस्तानी भी हिन्दूस्तानी हो। अफगानी भी हिन्दूस्तानी हैं। बलूचिस्तानी भी हिन्दूस्तानी है।’’

अपनी हरकतों से अन्तर्राष्ट्रीय  मंच पर बेनकाब होता पाकिस्तान  

पाकिस्तान की संवैधानिक संस्थाओं ने जिस प्रकार एक आतंकी सरगना की मौत पर काला दिवस मनाया, उसके बाद उससे सकारात्मक सहयोग की आखिरी उम्मीद भी समाप्त हो गयी। पिछले दिनों भारतीय सैनिकों ने एक आतंकी सरगना को कश्मीर में मार गिराया था। इसके पहले पाकिस्तान विश्वमंच पर अपने को भी आतंकवाद से पीड़ित बताता रहा है। बात एक हद तक सही भी है। आतंकवाद उसके लिए अब भस्मासुर बन गया है। ऐसे में उससे यह उम्मीद थी कि वह आतंकी के खात्मे पर खामोश ही रह जाता। तब माना जाता कि वह भी पीड़ित है। लेकिन उसने अपने को खुद ही बेनकाब कर दिया।

भारत से भला और कितनी बार मुँह की खाएगा पाकिस्तान?

देश के बंटवारा के बाद से ही पाकिस्तान कदम दर कदम भारत से मुंह की खाता रहा लेकिन वो इससे कोई सीख नहीं ले सका,  अथवा लेने की कोशिश नहीं किया। उसके इरादे भारत और खासकर कश्मीर को लेकर कभी भी नेक नहीं रहे। वो उसी कबिलाई मानसिकता में आज भी जी रहा है, जिसकों सदियों पहले सभ्य समाज द्वारा नाकार दिया गया था। अपनी अंदरूनी मामलों से निबटने के बजाय पाकिस्तान हमेशा कश्मीर का राग अलापता रहता है, और यहां अस्थिरता पैदा करने और अलगाव को हवा देने में लगा रहता है। जबकि उस के खुद के आंतरिक मामले इतने जटिल है जो निकट भविष्य में पाकिस्तान को कई टूकड़ों में विभाजित कर सकता है।