प्रधानमंत्री

जिनकी सरकारों ने कभी सीमा पर ध्यान नहीं दिया, वे सीमा सुरक्षा को लेकर पीएम पर किस मुंह से सवाल उठा रहे हैं?

यह देश का सौभाग्य ही है कि उसने ऐसे कुचक्रों एवं भ्रामक प्रचारों को अस्वीकृत कर निर्वाचित नेतृत्व को और अधिक सशक्त बनाकर अपनी प्रगति का पथ प्रशस्त किया।

मैं भी चौकीदार: मोदी की सकारात्मक राजनीति का एक और उदाहरण

इस अभियान के बाद ‘चौकीदार चोर है’ का नारा उछालने वाले विपक्षियों को सांप सूंघ गया है। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा कि इसका क्या जवाब दिया जाए। चौकीदार को चोर कहने पर अब एकसाथ असंख्य चौकीदार जवाब में उतर पड़ रहे हैं। दरअसल ये मोदी की राजनीति है, जो जितनी सकारात्मक भावना से ओतप्रोत है, विपक्ष को जवाब देने में उतनी ही प्रभावी भी है।

प्रधानमंत्री का अपमान और आतंकियों को सम्मान, कांग्रेस की ये कौन-सी पॉलिटिक्स है?

राहुल गाँधी किसी आतंकी सरगना को ‘जी’ लगाकर संबोधित करने वाले पहले कांग्रेस नेता नहीं हैं, कांग्रेस के लोगों को इसकी पुरानी आदत है। कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के दो बार के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह तो “ओसामा जी” और “हाफिज सईद साहब” का उच्चारण कर चुके हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को किसी

महागठबंधन: हर हप्ते बदल रहा विपक्ष का प्रधानमंत्री उम्मीदवार

चुनाव से पहले देश की राजनीति बहुत हो रोचक दौर में प्रवेश कर गई है। विपक्षी गठबंधन का आलम यह है कि विपक्ष की तरफ से हर हफ्ते प्रधानमंत्री पद के नए दावेदार सामने आ रहे हैं। आज उन्हीं नामों की चर्चा जो प्रधानमंत्री पद की रेस में बने हुए हैं।कांग्रेस देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी है (संसद में वैसे कांग्रेस को विपक्षी दल का स्टेटस हासिल नहीं है), जिसके अध्यक्ष राहुल गाँधी पिछले कई सालों से प्रधानमंत्री पद की दौड़ में लगातार बने हुए हैं।

मोदी को पीएम पद की गरिमा का ज्ञान देने से पहले अपना इतिहास देखें, मनमोहन सिंह!

देश में चुनाव का मौसम है और नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप चरम पर हैं। संप्रग सरकार में बतौर प्रधानमंत्री बड़े-बड़े घोटालों पर मौन धारण किए रहने वाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी बीच-बीच में बोलने लगे हैं। हाल में ही कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को भाषा और पद की गरिमा का ध्यान रखने की नसीहत दी।

राष्ट्र-गौरव की भावना, भारतीय संस्कृति और युवाओं के दम पर विश्व शक्ति बनेगा भारत !

भारत आज़ादी के 71वें वर्ष का जश्न मना रहा है। मेहनत, हिम्मत, संकल्प, जिद और लाखों लोगों के बलिदान के बाद हमारे शहीदों ने एक स्वतंत्र हिंदुस्तान का सपना साकार किया, लेकिन आज़ादी के साथ ही हमें देश के विभाजन का भी दंश झेलना पड़ा। विभाजन के समय 20 लाख से ज्यादा लोग मारे गए। विभाजन के दौरान और बाद में 72 लाख हिन्दुओं और सिखों को पाकिस्तान छोड़ना पड़ा वहीं इतनी ही मुसलमानों की

इन तथ्यों से साबित होता है कि आज देश में फौलादी इरादों वाली निर्णायक सरकार है !

केंद्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद एक बात साफ़ हुई है कि विपक्ष की सोच के विपरीत भाजपा ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर एक सख्त और सर्वमान्य नीतियों को लेकर जनता ने भी सरकार का समर्थन किया है। मुद्दा चाहे राजनीतिक हो, सुरक्षा का हो या आर्थिक, नरेन्द्र मोदी सरकार ने स्टैंड लिया है। इसका नतीजा न सिर्फ चुनावी सफलता के तौर पर परिलक्षित हुआ है, बल्कि आम

जानिये, प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे का क्या है हासिल ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुप्रतीक्षित इजरायल यात्रा आखिरकार सफलतापूर्वक संपन्‍न हो गई। यह वास्‍तविक अर्थों में बहुप्रतीक्षित और महत्‍वपूर्ण थी। मोदी ने दिलों को भी जीता और कूटनीति को भी बनाए रखा। आजादी के बाद से आज तक एक भी भारतीय प्रधानमंत्री इजरायल नहीं गया था, पीएम मोदी यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। उनकी यात्रा के लिए इजरायल पूरी तरह से तैयार था

‘मन की बात’ कार्यक्रम पर आधारित एक उपयोगी पुस्तक

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पदभार सँभालने के बाद से ही जनमानस से जुड़ाव की कई सकारात्मक कोशिशें की हैं। मन की बात कार्यक्रम में आमजन से संवाद करना, ऐसा ही एक प्रभावी कदम रहा। प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम न केवल लोकप्रिय बना बल्कि आमजन को जागरूक करने में भी अहम् भूमिका निभाई। इस मासिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने वाकई मन की बात की जिसका सीधा प्रसारण रेडियो, दूरदर्शन और

मोदी ऐसे नेता बन चुके हैं, जिनका विपक्ष के पास कोई जवाब नहीं है!

पूरे विपक्षी खेमे में कोई एक नेता ऐसा नहीं दिखता जो मोदी के जवाब में खड़ा हो सके। ऐसे में, ये कहना गलत नहीं होगा कि मोदी के आगे विपक्ष एकदम लाजवाब हो गया है। उसके पास न तो कोई नेता है और न ही कोई एजेंडा। दरअसल विपक्ष की इस दुर्गति के लिए काफी हद तक विपक्ष की नकारात्मक राजनीति ही जिम्मेदार है, जिससे जनता का उसके प्रति