बसपा

यूपी की बदहाली का जवाब दें सपा, बसपा और कांग्रेस

चुनावी घोषणा पत्र, ये तीन शब्द अपना अर्थ लगभग खो चुके हैं और इसका इस्तेमाल उन वादों के लिए किया जाने लगा है जो या तो पूरे नहीं हो पाते थे या फिर उनके पूरे होने का ख्वाब दिखाकर राजनीतिक अपना उल्लू सीधा करते रहते थे । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले भारतीय जनता पार्टी ने लोक कल्याण संकल्प पत्र जारी किया, जिसमें चुनाव के बाद जनता के सामने उतर प्रदेश को लेकर अपने विज़न को

यूपी चुनाव : अपराधियों का हाथ, मायावती के साथ

किसी जमाने में यूपी में बहुजन समाज पार्टी का नारा गूंजता था – चढ़ गुंडों की छाती पर, बटन दबेगा हाथी पर । वहीं बीएसपी अब अपने इस नारे को भूल गई है । बीएसपी ने हाल ही में जेल में बंद माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को अपनी पार्टी में परिवार समेत शामिल कर अपने इस नारे को ना केवल भुला दिया बल्कि मायावती ने अपने शासनकाल के दौरान वर्तमान की अपेक्षा बेहतर कानून व्यवस्था की अतीतजीविता को

यूपी चुनाव : सभी दलों से अधिक मज़बूत नज़र आ रही भाजपा

यूपी चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। आगामी ग्यारह फ़रवरी से सूबे में मतदान शुरू हो रहा है, जिसमें अब गिनती के दिन शेष हैं। इसलिए सूबे की लड़ाई में ताल ठोंक रहे सभी राजनीतिक दल अपने चुनावी व्यूह को मज़बूत बनाने और समीकरणों को पक्का करने की कोशिश में लग गए हैं। प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी सपा में महीनों से मचा पारिवारिक और राजनीतिक उठापटक का नाटक भी चुनाव की

यूपी चुनाव : भाजपा की लहर से भयभीत विपक्षियों ने शुरू की एकजुट होने की कवायद

यूपी विधानसभा चुनावों की बिसात बिछ चुकी है। सभी राजनीतिक पार्टियां अपना-अपना दांव खेलने के लिए तैयार हो चुकी है। एक तरफ यूपी में मुख्य विपक्षी दल बसपा है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस अपनी खो चुकी साख को वापस पाने के लिए जद्दोजहद करने में लगी हुई है। सत्तारूढ़ सपा में मचे दंगल ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रखा है। सपा में जो दंगल मचा है, उसे लेकर लोगों में भ्रम ही घुमड़

पाँचों राज्यों के विधानसभा चुनावों में सबसे दमदार नज़र आ रही भाजपा !

चुनाव की रणभेरी बजते ही, चुनावी युद्ध के मैदान में महारथियों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। एक तरफ भाजपा का विकास का मुद्दा है तो दूसरी तरफ अन्य दलों का जातिवाद, क्षेत्रवाद, सम्प्रदायवाद का मुद्दा। परंपरागत चुनाव से इतर इस बार का चुनाव कई मायनों में अलग प्रतीत हो रहा है। माना जा रहा है कि यह चुनाव परिणाम कई राजनीतिक पार्टियों की दशा और दिशा भी तय कर सकता है।

यूपी चुनाव : भाजपा को रोकने की बेबसी का नाम ‘महागठबंधन’

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अब बमुश्किल दो-तीन महीने शेष हैं, ऐसे में सूबे के सभी राजनीतिक दलों द्वारा अपनी-अपनी राजनीतिक बिसात बिछाकर चालें चली जाने लगी हैं। सत्तारूढ़ सपा जहाँ अपने अंदरूनी कलह के बावजूद अखिलेश को विकास पुरुष के रूप में पेश करने में लगी है, वहीँ बसपा सपा शासन की खामियाँ गिनवाने और बड़े-बड़े वादे करने में मशगुल है। कांग्रेस दिल्ली से शिला दीक्षित जैसे बड़े

यूपी चुनाव : भाजपा के अलावा सभी दल राजनीतिक अस्थिरता का शिकार

उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक पार्टियॉ अपने-अपने तरीके से जोड़-तोड़ की राजनीति में लग गई है। प्रशात किशोर की रणनीति भी कांग्रेस के लिए सफल नही हो पा रही है। जिस सियासत को साधने के लिए कांग्रेस ने यूपी की बहू को दिल्ली से लेकर आई, उसी की वजह से रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन पकड़ चुकी है। जिस 27 साल के सूखे को खत्म करने के लिए प्रशांत किशोर ने

यूपी चुनाव आते ही फिर बढ़-चढ़कर हिलोरें मारने लगा मुलायम का मुस्लिम प्रेम!

यूपी चुनाव में अब बहुत अधिक समय शेष नहीं है। अगले ही साल चुनाव होने हैं। अब चुनाव की आहट पाते ही यूपी की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव का मुस्लिम प्रेम जो पहले भी बाहर आता रहा है, अब और सिर चढ़कर बोलने लगा है। अब अभी पिछले दिनों उन्होंने कार सेवकों पर गोली चलवाने वाले मामले पर कहा था कि अगर मस्जिद बचाने के लिए सोलह की बजाय तीस जानें जातीं तो भी

सारे गुनाह भाजपा के, बाकियों के तो सौ गुनाह माफ़ हैं!

पिछले दिनों यूपी भाजपा के एक नेता ने बसपा की महिला नेता के प्रति कुछ आपत्तिजनक बयान दिया था, जिसपर बिना देर किए भाजपा द्वारा अपने नेता पर कार्रवाई की गई। फिर उस भाजपा नेता की गिरफ्तारी भी हुई और कुछ समय बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत ही जमानत भी मिल गई। यह तो बात हुई भाजपा की, जिसमे स्पष्ट है कि भाजपा ने अपने नेता के आपत्तिजनक बयान को लेकर कोई नरमी नहीं दिखाई।

मायावती ‘देवी’ हैं तो क्या उनके भक्त खुलेआम महिलाओं को गाली देंगे ?

यह भारतीय राजनीति का गिरता स्तर ही है कि गाली के प्रतिकार में गाली दी जा रही है। दरअसल, पिछले सप्ताह भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती पर अभद्र टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी ने सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया। जाहिर है कि दयाशंकर सिंह ने मायावती के लिए बेहद आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था जो किसी भी महिला के लिए अपमानजनक था।