बाबरी मस्जिद

राम जन्मभूमि फैसला : सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने वाला समाधान

9 नवंबर, 2019 की तारीख भारतीय इतिहास में सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने वाले एक ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज हो चुकी है। इस दिन एक तरफ माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने लम्बे समय से चले आ रहे रामजन्मभूमि विवाद पर निर्णय देकर उसका समाधान किया तो वहीं दूसरी तरफ भारत-पाकिस्तान के बीच सिख समुदाय की आस्था से जुड़े करतारपुर कॉरिडोर की शुरुआत हुई।  

‘अदालत के फैसले ने बता दिया कि अब इतिहास से आगे बढ़ भविष्य के निर्माण का समय है’

भगवान श्रीराम देश के अधिसंख्य लोगों के दिलों में वास करते हैं, इसके लिए किसी प्रमाण की ज़रुरत नहीं थी, लेकिन प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या ही है, इस बात को प्रमाणित करने में 70 साल लग गए। इस फैसले की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व में बने बेंच में सभी पांच जजों ने सर्व सम्मति से फैसला लिया। सुप्रीम कोर्ट में लंबी कानूनी

अयोध्या प्रकरण : विवाद के समाधान के साथ सामाजिक सद्भाव का मार्ग प्रशस्त करने वाला निर्णय

अयोध्या में श्रीराम जन्म स्थान के प्रति करोड़ों हिंदुओं की आस्था रही है। इसके अलावा यहां मंदिर होने के पुरातात्विक प्रमाण भी उपलब्ध हैं। यह सराहनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी का संज्ञान लिया। इसके बाद निर्णय दिया कि जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण किया जा सकेगा।