बिजली

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कांग्रेसी कार्य-संस्कृति से मुक्त हुआ देश

आजादी के बाद से ही गरीबी मिटाने और सभी तक बिजली पहुंचाने के लिए ढेरों योजनाएं चलीं लेकिन लक्ष्‍य पूरा नहीं हुआ। हां, इन योजनाओं के भ्रष्‍टाचार से अफसरों-नेताओं-ठेकेदारों की कोठियां जरूर गुलजार हो गईं।

गरीबी की जड़ पर चोट करने में कामयाब रही मोदी सरकार

2014 में प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी गरीबी निवारण योजनाओं के साथ-साथ गरीबी पैदा करने वाले कारणों को दूर करने में जी जान से जुट गए। प्रधानमंत्री ने उन व्‍यवस्‍थागत खामियों का दूर किया जिनके चलते योजनाएं अपने लक्ष्‍य को हासिल नहीं कर पाती थीं।

ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति लाने में कामयाब मोदी सरकार

हाल ही में अन्तर्राष्ट्रीय ऊर्जा संस्थान ने एक समीक्षा प्रतिवेदन जारी किया है जिसमें बताया गया है कि भारत में  95 प्रतिशत लोगों के घरों में बिजली मुहैया कराई जा चुकी है और 98 प्रतिशत परिवारों की, खाना पकाने के लिए, स्वच्छ ईंधन तक पहुँच बन गई है। साथ ही, उक्त समीक्षा प्रतिवेदन में यह भी बताया गया है कि ऊर्जा के क्षेत्र में निजी निवेश की मात्रा भी बढ़ी है, जिससे भारत में ऊर्जा के क्षेत्र की दक्षता में सुधार हुआ है। उसकी वजह से ऊर्जा की क़ीमतों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है एवं ऊर्जा की क़ीमतें सस्ती हुई

वन नेशन-वन ग्रिड से आएगी बिजली क्रांति

मोदी सरकार अब देश के समूचे परिवहन तंत्र को पेट्रोल-डीजल के बजाए बिजली आधारित करने की महत्‍वाकांक्षी योजना पर काम कर रही हैं ताकि पेट्रोलियम पदार्थों के आयात में कमी लाई जा सके। सरकार ने 2020-21 तक रेलवे के समूचे ब्रॉडगेज नेटवर्क के विद्युतीकरण का लक्ष्‍य रखा है।

बिजली क्रांति: मोदी राज में हुई लालटेन युग की विदाई

एक बड़ी विडंबना यह है कि पूरा विपक्ष एक होकर जितना जोर नरेंद्र मोदी को हराने में लगा रहा है, उसका दसवां हिस्‍सा भी भाजपा को हराने में नहीं। आखिर मोदी के नाम पर विपक्ष को चिढ़ क्‍यों है इसे पिछले पांच वर्षों में नरेद्र मोदी के प्रयासों से देश में हुई अनेक विकासात्मक क्रांतियों में से एक बिजली क्रांति से समझा जा सकता है।

बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में अव्वल मोदी सरकार

बिजली, स्वच्छता और सड़क ये बेहद जरूरी बुनियादी सुविधायें हैं और मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में इन मोर्चों पर उल्लेखनीय कार्य किया है, जिसे खारिज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि मोदी सरकार द्वारा किये गये कार्य आंकड़ों के आईने में साफ-साफ नज़र आ रहे हैं।

परिवहन के क्षेत्र में एक नयी बिजली क्रांति लाने में जुटी मोदी सरकार

बिजली से चलने वाले वाहन अर्थव्‍यवस्‍था के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी मुफीद साबित होंगे। इसी प्रकार इलेक्‍ट्रिक वाहन पेरिस जलवायु समझौते की शर्तों के अनुपालन में भी मददगार बनेंगे। इतना ही नहीं इलेक्‍ट्रिक वाहनों के साथ आने वाली स्‍वचालन तकनीक से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।

‘मोदी का जितना विरोध होता है, वे उतने ही मजबूत होते जाते हैं’

समकालीन भारतीय राजनीति में जितना विरोध नरेंद्र मोदी का हुआ है, उतना शायद ही किसी नेता का हुआ हो। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि मोदी का जितना विरोध होता है, मोदी उतने ही मजबूत बनते जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह है, उनकी विकास की राजनीति जो “सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय” पर आधारित है।

हर गाँव के बाद हर घर तक बिजली पहुँचाने में जुटी मोदी सरकार

जिस देश में योजनाओं की लेट-लतीफी का रिकॉर्ड रहा हो वहां निर्धारित समय से पहले योजना पूरी हो जाए तो इसे चमत्‍कार ही कहा जाएगा। पंद्रह अगस्‍त, 2015 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हजार दिनों के भीतर देश के सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्‍य रखा था। राजनीतिक इच्‍छाशक्‍ति और नौकरशाही की चुस्‍ती के कारण यह महत्‍वाकांक्षी लक्ष्‍य 988 दिन में ही पूरा हो गया अर्थात तय समय से 12 दिन पहले।

हर गाँव तक बिजली पहुँचाने में कामयाब रही मोदी सरकार !

आजादी के सत्‍तर साल बाद ही सही लेकिन अब तक अंधेरे में डूबे 18,452 से अधिक गांवों में समय सीमा से पहले बिजली पहुंचना एक बड़ी उपलब्‍धि है। गौरतलब है कि प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्‍त, 2015 को लाल किले की प्राचीर से एक हजार दिनों में देश के इन गांवों में बिजली पहुंचाने का समयबद्ध लक्ष्‍य तय किया था। इसके लिए दीन दयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना शुरू की गई, जिसके तहत ग्रामीण घरों और कृषि