यूपी

क्या 97 हजार करोड़ की बंदरबांट ही अखिलेश यादव का समाजवाद है?

उत्‍तर प्रदेश से एक बड़े घोटाले की आहट सुनाई दे रही है। बताया जाता है कि ये घोटाला 97 हजार करोड़ रुपए का है जो कि अपने आप में बहुत बड़ी राशि है। देश की सबसे बड़ी ऑडिट एजेंसी सीएजी (कैग) की रिपोर्ट में यह गड़बड़ी उजागर हुई है। अधिक चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस राशि के खर्च का कोई हिसाब अभी तक प्रस्‍तुत नहीं किया गया है। यानी 97 हजार

मायावती के झटके के बाद क्या होगा महागठबंधन का भविष्य?

मायावती जानती हैं कि गठबन्धन की बात विकल्पहीनता की स्थिति  के कारण चल रही है। यदि सपा कमजोर नहीं होती तो आज भी बुआ के संबोधन में तंज ही होता। ऐसे में मायावती गठबन्धन नहीं सौदा करना चाहती हैं। गोरखपुर और फूलपुर में भी उन्होंने समझौता ही किया था। उन्होंने शर्तो के साथ ही समर्थन दिया था। इसमें उच्च सदन के लिए समर्थन की शर्त लगाई गई थी। लेकिन अखिलेश मायावती की शर्त को पूरा नहीं कर पाए थे।

पहले जिस यूपी में आने से कतराते थे निवेशक, अब निवेश के लिए सबसे सुगम प्रदेशों में है शामिल!

गत दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के विकास को गति देते हुए विभिन्न कल्याणकारी परियोजनाओं की आधारशिला रखी। राजधानी लखनऊ में सर्वप्रथम उन्होंने स्मार्ट सिटी, प्रधानमंत्री आवास योजना और अमृत योजना से जुड़ी 3897 करोड़ रूपए की 99 परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश के औद्योगिक निवेश का

यूपी में निवेश के लिए माहौल बनाने में जुटी योगी सरकार !

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में निवेश के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है। राष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा है। योगी यह भी जानते है कि मात्र सम्मेलन कर लेने से निवेश आकर्षित नही होता है। इसके लिए पहले से इंतजाम करने होते हैं। इसके पहले ये विषय नौकरशाही की प्राथमिकता में नहीं थे, क्योंकि पिछली सपा सरकार ही निवेश के अनुकूल माहौल बनाने के प्रति गम्भीर नहीं थी।

उम्मीद जगाती है योगी सरकार की औद्योगिक नीति

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने औद्योगिक विकास का कारगर रोडमैप तैयार किया है। इसके प्रति निवेशकों ने उत्साह दिखाया है। इसमें संदेह नहीं कि उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास की दौड़ में बहुत पीछे रह गया। अब ऐसा लग रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस स्थिति में सुधार का बीड़ा उठाया है। उनकी सरकार ने एक साथ कई मोर्चे पर कार्य शुरू किया है। योगी आदित्यनाथ ने इसे अपनी निगरानी में

‘अर्घ्य के दिन किसी छठ घाट पर चले जाइए, आप वो देखेंगे जो आपके मन को प्रफुल्लित कर देगा !’

ये यूं ही नहीं कहा जाता कि भारत पर्वों, व्रतों, परम्पराओं और रीति-रिवाजों का देश है। दरअसल यहां शायद ही ऐसा कोई महीना बीतता हो जिसमें कोई व्रत या पर्व न पड़े। हमारे पर्वों में सबसे अलग बात ये होती है कि इन सब में हमारा उत्साह किसी न किसी आस्था से प्रेरित होता है। कारण ये कि भारत के अधिकाधिक पर्व अपने साथ किसी न किसी व्रत अथवा पूजा का संयोजन किए हुए हैं। ऐसे ही त्योहारों की कड़ी में पूर्वी

योगी की गुजरात यात्रा राजनीतिक होने के साथ-साथ यूपी के विकास पर भी केन्द्रित थी !

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गुजरात यात्रा मुख्य रूप से राजनीतिक थी, लेकिन यहां भी वह उत्तर प्रदेश के विकास को नही भूले। अवस्थापना और औद्योगिक विकास के अधिकारी गुजरात यात्रा में उनके साथ थे। मुख्यमंत्री गुजरात के निवेशकों से मिले और उन्हें उत्तर प्रदेश में निवेश का आमंत्रण दिया। इस प्रकार यह यात्रा आर्थिक विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो गई। कार्य करने का यही अंदाज प्रधानमंत्री

योगी सरकार ने जारी किया रिपोर्ट कार्ड, सुधार और विकास की राह पर बढ़ रहा प्रदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रिपोर्ट कार्ड जारी करने की परंपरा को आगे बढाया। अपनी सरकार के सौ दिन पूरे होने पर उन्होने रिपोर्ट कार्ड जारी किया था। वह बिल्कुल शुरुआती दौर था। फिर भी योगी आदित्यनाथ ने अपनी जबाबदेही का स्वयं निर्धारण किया। रिपोर्ट कार्ड के रूप में उसे सार्वजनिक किया। अब सरकार ने छह महीने पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर भी मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट कार्ड जारी किया है। यह तय

योगी सरकार के श्वेत पत्र ने खोला सपा-बसपा सरकारों के ‘कारनामों’ का कच्चा-चिट्ठा

विरासत पर श्वेतपत्र जारी करना प्रत्येक सरकार का अधिकार और कर्तव्य दोनो है। यह एक बेहतर परम्परा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी शुरुआत की है। प्रदेश की जनता को पिछली सरकारों के क्रियाकलापो के संबन्ध में जानने का अधिकार भी है। चुनाव के समय बहुत आरोप प्रत्यारोप लगते हैं। जो पार्टी सत्ता में आती है, उसी पर सच्चाई को सामने लाने की जिम्मेदारी होती है। यदि यह कार्य पिछली

कड़े फैसलों से यूपी को पटरी पर लाने की कवायदों में जुटी योगी सरकार

यूपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार को करीब चार महीने पूरे हो गए हैं। किसी सरकार की समीक्षा के लिए यूं तो चार महीने का समय पर्याप्त नहीं होता लेकिन इन चार महीनों में ही सरकार ने अपने अंदाज से आगाज का एहसास करा दिया है। ये बता दिया है कि उत्तर प्रदेश में अब वो नहीं चलेगा जो पिछले चौदह पंद्रह सालों से यहां होता आ रहा था। जाहिर है, डेढ़ दशक का वक्त काफी होता है और डेढ़ दशकों में ना सिर्फ उत्तर