राजकोषीय घाटा

राजकोषीय घाटे को लक्ष्य के अनुरूप रखने में कामयाब रहेगी मोदी सरकार!

अगले वर्ष चुनाव होने के कारण सरकारी खर्च में बढ़ोतरी होने की गुंजाइश है। फिर भी,  राजकोषीय घाटा के लक्ष्य के अनुरूप रहने का अनुमान है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में केंद्र की हिस्सेदारी से चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी, क्योंकि आगामी महीनों में जीएसटी संग्रह में और भी वृद्धि होने का अनुमान है। हालाँकि, कहा जा रहा है

बाजार उधारी कम करने से आएगी राजकोषीय घाटे में कमी

नकदी और बॉन्ड यील्ड पर दबाव कम करने के लिये सरकार वित्त वर्ष 2018-19 में सकल बाजार उधारी में 700 अरब रुपये की कटौती करेगी, जिससे राजकोषीय घाटे में कमी आयेगी। अक्टूबर, 2018 से मार्च, 2019 के दौरान सरकार 2.47 लाख करोड़ रूपये बाजार उधारी को  कम करेगी। पहली छमाही यानी अप्रैल, 2018 से सितंबर, 2018 की अवधि में सरकार बाजार उधारी को

मूडीज रिपोर्ट : राजकोषीय घाटे को कम करने में कामयाब रहेगी मोदी सरकार

मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस के अनुसार भारत चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.3 प्रतिशत पर रखने के लक्ष्य को हासिल कर लेगा। बजटीय लक्ष्य को पाने के लिए सरकार पूँजीगत खर्च में कटौती कर सकती है। सरकार द्वारा ऐसा पूर्व के वर्षों में किया भी गया है। चूँकि, सरकार ने कच्चे तेल के दाम में वृद्धि होने पर भी पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती नहीं की